AI अब समझेगा आपकी बोली और जरूरतें: निमिषा कर्नाटक की अनोखी सोच

निमिषा कर्नाटक, ऑक्सफोर्ड की शोधकर्ता और वर्ल्ड बैंक सलाहकार, AI को 'हाइपर-लोकल' बनाने पर जोर दे रही हैं। उनका AVA AI सिस्टम वर्ल्ड बैंक के लिए साक्ष्य-आधारित समाधान देता है, जबकि भारत में आशा कार्यकर्ताओं के लिए मल्टी-एजेंट AI उनकी स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाएगा

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Web Desk Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Sub Editor
September 26, 2025 • 7:08 PM  39
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26 Sep 2025
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AI अब समझेगा आपकी बोली और जरूरतें: निमिषा कर्नाटक की अनोखी सोच

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में एक नया मोड़ आ रहा है, और इसके पीछे है यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड की भारतीय शोधकर्ता और वर्ल्ड बैंक की अंतरराष्ट्रीय सलाहकार, निमिषा कर्नाटक। जहाँ विश्व भर में AI के विशाल और शक्तिशाली मॉडल बनाने की होड़ मची है, वहीं निमिषा एक ऐसी सोच पेश कर रही हैं जो AI को स्थानीय भाषा, संस्कृति और ज़रूरतों के अनुरूप ढालने पर केंद्रित है। उनका मानना है कि AI की असली ताकत 'हाइपर-लोकल' समाधानों में निहित है, जो हर समुदाय की विशिष्ट आवश्यकताओं को समझे और उनकी मदद करे।

AI में विश्वास और पारदर्शिता का नया आधार

निमिषा का शोध इस सिद्धांत पर टिका है कि AI को भरोसेमंद, साक्ष्य-आधारित और अपनी सीमाओं को स्वीकार करने वाला होना चाहिए। वह कहती हैं, "AI का भविष्य एक ऐसा मॉडल नहीं है जो सब कुछ जानता हो, बल्कि ऐसा सिस्टम है जो स्थानीय समस्याओं को गहराई से समझे और विश्वसनीय समाधान दे।" इस दृष्टिकोण के साथ, निमिषा ने वर्ल्ड बैंक के लिए AVA AI सिस्टम विकसित किया है, जो नीति-निर्माताओं को सटीक और साक्ष्य-आधारित जानकारी प्रदान करता है।

AVA AI: वर्ल्ड बैंक में 'हैलुसिनेशन' पर लगाम

AI का सबसे बड़ा खतरा है 'हैलुसिनेशन', यानी गलत या मनगढ़ंत जानकारी देना। निमिषा ने वर्ल्ड बैंक के लिए AVA AI सिस्टम को इस तरह डिज़ाइन किया है कि यह केवल वर्ल्ड बैंक के आधिकारिक डेटा और रिपोर्ट्स पर आधारित जवाब देता है। हर जवाब के साथ साक्ष्य प्रस्तुत करने की इसकी क्षमता नीति-विश्लेषकों के लिए जोखिम-मुक्त और विश्वसनीय निर्णय लेना आसान बनाती है। यह सिस्टम वैश्विक संस्थानों के लिए AI के उपयोग में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।

भारत की आशा कार्यकर्ताओं के लिए 'AI सहेली'

निमिषा अपनी पीएचडी के तहत भारत की ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के लिए एक मल्टी-एजेंट AI सिस्टम विकसित कर रही हैं। यह सिस्टम विशेष रूप से आशा कार्यकर्ताओं जैसे कम्युनिटी हेल्थ वर्कर्स के लिए बनाया जा रहा है, जो ग्रामीण भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं। यह AI सिस्टम मरीजों का रिकॉर्ड रखने, सही स्वास्थ्य सलाह देने और स्थानीय भाषाओं में संवाद करने में उनकी मदद करेगा।

निमिषा कहती हैं, "एक आशा कार्यकर्ता की ज़रूरतें न्यूयॉर्क के डॉक्टर से बहुत अलग हैं। हमारा लक्ष्य है कि वर्ल्ड-क्लास AI तकनीक को भारत के गाँवों तक पहुँचाया जाए, जो उनकी भाषा और समस्याओं को समझे और उनकी सच्ची सहेली बने।" यह सिस्टम न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाएगा, बल्कि ग्रामीण भारत में तकनीकी समावेशन को भी बढ़ावा देगा।

स्थानीय सलाहकारों के सहयोग से डिज़ाइन किया गया यह चैटबॉट

निमिषा की प्रतिभा केवल भारत तक सीमित नहीं है। उन्होंने मोरक्को के उच्च शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार मंत्रालय के साथ मिलकर एक जेंडर-सेंसिटिव चैटबॉट विकसित किया है। यह चैटबॉट महिला स्नातकों को करियर मार्गदर्शन प्रदान करता है, जो मोरक्को के सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश के अनुरूप है। स्थानीय सलाहकारों के सहयोग से डिज़ाइन किया गया यह चैटबॉट यह सुनिश्चित करता है कि सलाह न केवल उपयोगी हो, बल्कि सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील भी हो।

इसके अलावा, निमिषा ने गूगल डीपमाइंड के साथ मिलकर छोटे व्यापारियों के लिए एक AI प्रोटोटाइप विकसित किया है, जो ब्रांड-विशिष्ट विज्ञापन बनाने में मदद करता है। इस नवाचार के लिए एक यूएस पेटेंट आवेदन दायर किया गया है, और इसका शोध अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में प्रकाशित हो चुका है।

भारत के छोटे शहरों से निकलकर वैश्विक मंच पर कैसे प्रभाव डाला

निमिषा कर्नाटक का जन्म और पालन-पोषण उत्तराखंड के पंतनगर में हुआ। उन्होंने 2018 में गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से बी.टेक की डिग्री हासिल की, जहाँ उनकी अकादमिक उत्कृष्टता के लिए उन्हें वाइस-चांसलर रजत पदक से सम्मानित किया गया। उनकी यह यात्रा न केवल उनकी प्रतिभा को दर्शाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि भारत के छोटे शहरों से निकलकर वैश्विक मंच पर कैसे प्रभाव डाला जा सकता है।

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