विधायकों की गैरमौजूदगी, नेताओं की नाराजगी और हमलों के बीच क्या राजनीतिक रूप से अकेली पड़ रही हैं ममता बनर्जी?
पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस अंदरूनी कलह, नेताओं की नाराजगी और संगठनात्मक चुनौतियों से जूझती नजर आ रही है।
पश्चिम बंगाल चुनाव में मिली हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सामने राजनीतिक और संगठनात्मक चुनौतियां लगातार बढ़ती दिखाई दे रही हैं। पार्टी नेतृत्व एक तरफ चुनावी झटके से उबरने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर विधायकों की गैरमौजूदगी, नेताओं की नाराजगी और संगठन के भीतर उठ रही असंतोष की आवाजें नई मुश्किलें पैदा कर रही हैं।
हाल ही में कोलकाता स्थित कालीघाट आवास पर बुलाई गई विधायक दल की बैठक में 80 में से केवल 20 विधायक ही पहुंचे। बैठक का उद्देश्य चुनावी हार और हाल के घटनाक्रमों की समीक्षा करना था, लेकिन अधिकांश विधायकों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए। पार्टी की ओर से कहा गया कि विधायक विरोध प्रदर्शनों की तैयारियों में व्यस्त थे, लेकिन विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषक इसे संगठन के भीतर बढ़ती असहजता का संकेत मान रहे हैं।