अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'फेथ एंड फ्रीडम कोएलिशन' के 'रोड टू मेजॉरिटी' सम्मेलन में ईरान को लेकर कई बड़े दावे किए। अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा कि उनके प्रशासन ने ऐसा ऐतिहासिक कदम उठाया है, जिससे ईरान भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर पाएगा।

'ईरान कभी परमाणु हथियार नहीं बना पाएगा'

ट्रंप ने कहा कि हाल ही में हुए एक ऐतिहासिक समझौते के जरिए अमेरिका ने वह हासिल किया है, जो पहले कोई भी राष्ट्रपति नहीं कर सका। उनके मुताबिक, इस समझौते के बाद ईरान के परमाणु हथियार विकसित करने की संभावना लगभग समाप्त हो गई है।

ईरानी सेना की क्षमता पर किया बड़ा दावा

अपने भाषण में ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि ईरान की नौसेना, वायुसेना, एयर डिफेंस सिस्टम, रडार नेटवर्क और सैन्य उत्पादन क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हुई है।

हालांकि, ट्रंप ने इन दावों के समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण या आधिकारिक सैन्य रिपोर्ट पेश नहीं की।

ड्रोन और मिसाइल क्षमता में भारी कमी का दावा

ट्रंप ने कहा कि ईरान की सैन्य ताकत में बड़ी गिरावट आई है। उनके अनुसार—

  • ड्रोन क्षमता में 82% की कमी आई है।

  • मिसाइल क्षमता में 80% की गिरावट आई है।

  • रॉकेट लॉन्चर क्षमता में 90% तक कमी आई है।

उन्होंने कहा कि इन कार्रवाइयों के बाद ईरान की आक्रामक सैन्य क्षमता पहले की तुलना में काफी कमजोर हो गई है।

ईरानी नेतृत्व पर भी साधा निशाना

ट्रंप ने दावा किया कि हालिया घटनाओं में ईरान के शीर्ष सैन्य नेतृत्व को भी भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि नेतृत्व स्तर पर लगातार झटके लगने से अब कोई भी ईरान का नेता बनने के लिए तैयार नहीं है।

कासिम सुलेमानी का भी किया जिक्र

अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी के मारे जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सुलेमानी अमेरिकी सैनिकों पर हुए कई हमलों के लिए जिम्मेदार था और उसे मार गिराना उनकी सरकार के सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक था।

ट्रंप ने दावा किया कि सुलेमानी की मौत मध्य पूर्व की राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हुई और इससे ईरान की सैन्य रणनीति को गहरा झटका लगा।

दावों पर नहीं दिया कोई स्वतंत्र प्रमाण

अपने पूरे संबोधन में ट्रंप ने ईरान की सैन्य क्षमता और परमाणु कार्यक्रम को लेकर कई बड़े दावे किए। हालांकि, उन्होंने इन दावों की पुष्टि के लिए कोई स्वतंत्र रिपोर्ट, आधिकारिक खुफिया आकलन या अंतरराष्ट्रीय एजेंसी के आंकड़े प्रस्तुत नहीं किए। ऐसे में इन दावों पर विभिन्न पक्षों की अलग-अलग राय सामने आ सकती है।