पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी पर दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में हुए कथित हमले के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे एक सुनियोजित साजिश करार दिया है।

ममता बनर्जी ने दावा किया कि हमले के दौरान यदि अभिषेक बनर्जी ने हेलमेट नहीं पहना होता तो उनकी जान भी जा सकती थी। उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर दबाव बनाने और इलाज में हस्तक्षेप करने के भी गंभीर आरोप लगाए हैं।

वीडियो फुटेज के आधार पर 5 आरोपी गिरफ्तार

पुलिस अधिकारियों के अनुसार घटना के बाद इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों और स्थानीय वीडियो फुटेज की जांच की गई। इसके आधार पर रातभर छापेमारी अभियान चलाकर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस का कहना है कि सभी गिरफ्तार आरोपी स्थानीय निवासी हैं और उनसे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि घटना पूर्व नियोजित थी या अचानक विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थिति बिगड़ी।

क्या हुआ था सोनारपुर में?

शनिवार को अभिषेक बनर्जी दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर क्षेत्र में चुनाव बाद हिंसा से प्रभावित टीएमसी कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों से मिलने पहुंचे थे।

इसी दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने उनका विरोध किया। आरोप है कि विरोध कर रही भीड़ ने अभिषेक को घेर लिया और नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति जल्द ही तनावपूर्ण हो गई और भीड़ की ओर से कथित तौर पर अंडे, जूते और पत्थर फेंके गए।

हंगामे के दौरान धक्का-मुक्की और हाथापाई भी हुई, जिसमें अभिषेक बनर्जी की शर्ट फट गई। सुरक्षा कर्मियों ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए उन्हें हेलमेट पहनाया और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।

हेलमेट ने बचाई जान: ममता बनर्जी

घटना के बाद अभिषेक बनर्जी को अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी चिकित्सकीय जांच की गई। बाद में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अस्पताल पहुंचीं और वहां से निकलने के बाद मीडिया से बातचीत की।

ममता ने कहा कि हमले के दौरान अभिषेक के शरीर पर गंभीर चोटें आईं और शरीर में खून के थक्के जम गए थे। उनका दावा था कि यदि अभिषेक ने हेलमेट नहीं पहना होता तो परिणाम और गंभीर हो सकते थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल राजनीतिक विरोध नहीं बल्कि एक खतरनाक हमला था, जिसकी पूरी जांच होनी चाहिए।

अस्पताल प्रशासन पर दबाव के आरोप

ममता बनर्जी ने अस्पताल प्रशासन और कुछ अधिकारियों पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं और दक्षिण कोलकाता के कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की ओर से अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों पर दबाव बनाया गया। उनका कहना था कि अभिषेक को जल्द अस्पताल से छुट्टी देने का प्रयास किया गया।

ममता ने सवाल उठाया कि यदि अभिषेक की हालत गंभीर नहीं थी तो उन्हें इंटेंसिव थेरेपी यूनिट (आईटीयू) में क्यों रखा गया था, और यदि हालत गंभीर थी तो अचानक डिस्चार्ज क्यों किया गया।

अब घर पर होगा इलाज

मुख्यमंत्री ने बताया कि अब अभिषेक बनर्जी का उपचार घर पर ही किया जाएगा। उनके निवास पर आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

घर पर ऑक्सीजन सिलेंडर, मेडिकल मॉनिटरिंग सिस्टम और अन्य जरूरी उपकरण लगाए गए हैं। पारिवारिक चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज जारी रहेगा।

राजनीतिक हिंसा का केंद्र रहा है सोनारपुर

दक्षिण 24 परगना जिले का सोनारपुर क्षेत्र लंबे समय से राजनीतिक संघर्ष और चुनावी हिंसा के लिए चर्चा में रहा है।

हालिया विधानसभा चुनावों के बाद भी यहां कई हिंसक घटनाएं सामने आई थीं। चुनाव परिणाम आने के बाद एक टीएमसी कार्यकर्ता की मौत हुई थी, जबकि भाजपा समर्थकों की संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने के आरोप भी लगे थे।

सोनारपुर दक्षिण विधानसभा सीट से भाजपा नेता रूपा गांगुली विधायक हैं। 2026 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने टीएमसी उम्मीदवार अरुंधति मैत्रा को हराया था।

बंगाल की सत्ता बदलने के बाद बढ़ा राजनीतिक तनाव

4 मई को आए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणामों में पहली बार भाजपा ने राज्य में पूर्ण बहुमत हासिल कर सरकार बनाई थी। 294 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा ने 208 सीटें जीतकर ऐतिहासिक विजय दर्ज की, जबकि टीएमसी 80 सीटों तक सिमट गई।

इसके बाद राज्य में चुनावी हिंसा, राजनीतिक टकराव और आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है। अभिषेक बनर्जी पर हुआ हमला भी इसी बढ़ते राजनीतिक संघर्ष का हिस्सा माना जा रहा है।

ममता की कोर्ट में एंट्री भी बनी चर्चा का विषय

इस पूरे घटनाक्रम के बीच तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हाल ही में कलकत्ता हाईकोर्ट में भी चुनावी हिंसा से जुड़े एक मामले में स्वयं पैरवी करती नजर आई थीं।

कोर्ट परिसर के बाहर उनके खिलाफ नारेबाजी भी हुई थी, जिससे राज्य की राजनीतिक गर्माहट और बढ़ गई थी।

बंगाल की राजनीति में फिर बढ़ा टकराव

अभिषेक बनर्जी पर हमले और उसके बाद हुई गिरफ्तारियों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है। एक ओर टीएमसी इसे लोकतंत्र और विपक्ष की राजनीति पर हमला बता रही है, वहीं विपक्षी दल इस मामले को जनता के गुस्से से जोड़ रहे हैं।

फिलहाल पुलिस जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां या नए खुलासे सामने आ सकते हैं।