15 अप्रैल 2026 को अहमदाबाद में हुई गीता राजपुरोहित की संदिग्ध मौत का मामला अब राजस्थान और गुजरात दोनों राज्यों में चर्चा का विषय बना हुआ है। करीब 13 साल पहले शादी के बाद अहमदाबाद में रह रही गीता की मौत को शुरुआत में आत्महत्या बताया गया, लेकिन उनके परिजनों ने इसे सुनियोजित हत्या बताते हुए पति और ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए। मामला अब गुजरात हाईकोर्ट, जांच एजेंसियों और विभिन्न संवैधानिक संस्थाओं तक पहुंच चुका है।
कौन थीं गीता राजपुरोहित?
गीता राजपुरोहित मूल रूप से राजस्थान के राजपुरोहित परिवार से थीं। शादी के बाद वे अहमदाबाद में अपने पति अर्जुनसिंह राजपुरोहित के साथ रहती थीं। दंपती के एक बेटा और एक बेटी हैं।
परिजनों का कहना है कि शादी के बाद से गीता को लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। उनका दावा है कि इस संबंध में पुराने व्हाट्सएप चैट और अन्य दस्तावेज भी उपलब्ध हैं। परिवार का यह भी कहना है कि गीता भविष्य को लेकर कई योजनाएं बना रही थीं। वे जीएसटी रजिस्ट्रेशन, पीटीईटी परीक्षा की तैयारी और जोधपुर आने की योजना बना रही थीं।
15 अप्रैल को क्या हुआ?
15 अप्रैल 2026 को गीता की मौत की सूचना उनके मायके पक्ष को दी गई। ससुराल पक्ष ने इसे फांसी लगाकर आत्महत्या बताया। हालांकि परिजनों ने शुरुआत से ही इस दावे पर सवाल उठाते हुए हत्या का आरोप लगाया।
परिवार का आरोप है कि घटना के बाद मौके पर जरूरी फोरेंसिक प्रक्रिया में लापरवाही बरती गई। उनका कहना है कि एफएसएल टीम को समय पर नहीं बुलाया गया और कई अहम साक्ष्यों का सही तरीके से संरक्षण नहीं किया गया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर परिवार के सवाल
परिवार का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज कई बिंदु सामान्य फांसी के मामलों से मेल नहीं खाते। उनका दावा है कि रिपोर्ट में गले के निशान, शरीर की स्थिति और अन्य फोरेंसिक तथ्यों को देखते हुए स्वतंत्र विशेषज्ञों से दोबारा जांच कराई जानी चाहिए।
परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि विष-विज्ञान (टॉक्सिकोलॉजी) जांच पूरी तरह नहीं कराई गई और आधुनिक तकनीकों से दोबारा परीक्षण की जरूरत है।
डिजिटल साक्ष्यों पर भी उठे सवाल
परिजनों का आरोप है कि गीता का दूसरा मोबाइल फोन अब तक बरामद नहीं हुआ है। उनका कहना है कि उस फोन में मामले से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं। परिवार ने यह भी दावा किया है कि मृत्यु के बाद गीता के व्हाट्सएप संदेश पढ़े गए, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
इसके अलावा कॉल रिकॉर्ड, सीडीआर, आईपीडीआर, सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखकर उनकी वैज्ञानिक जांच कराने की मांग भी की गई है।
आरोपी और जांच की स्थिति
परिवार ने गीता के पति अर्जुनसिंह राजपुरोहित और ससुराल पक्ष के अन्य सदस्यों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। परिवार का आरोप है कि मुख्य आरोपी पुलिस विभाग में कार्यरत होने के कारण शुरुआती जांच प्रभावित हुई।
बाद में जांच स्थानीय पुलिस से क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई। परिवार का कहना है कि अब भी कई महत्वपूर्ण पहलुओं की निष्पक्ष जांच होना बाकी है।
आरोपी को मिली जमानत
मामले में मुख्य आरोपी अर्जुनसिंह राजपुरोहित की जमानत याचिका सेशंस कोर्ट ने दो बार खारिज की थी। इसके बाद गुजरात हाईकोर्ट ने उन्हें नियमित जमानत दे दी। परिवार इस फैसले से असहमत है और उपलब्ध कानूनी विकल्पों के तहत आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।
परिवार की मांग क्या है?
परिवार पूरे मामले की सीबीआई या स्वतंत्र एसआईटी से जांच कराने की मांग कर रहा है। साथ ही उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उचित कानूनी धाराएं जोड़ने, सभी नामजद आरोपियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई, पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच की स्वतंत्र समीक्षा, डिजिटल साक्ष्यों के संरक्षण तथा पीड़ित परिवार और गवाहों को सुरक्षा देने की मांग भी की गई है।
जोधपुर में प्रदर्शन
मामले को लेकर जोधपुर में परिजनों और समाज के लोगों ने कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन के दौरान निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई गई। गीता के भाई नत्थूसिंह राजपुरोहित ने कहा कि जब तक उनकी बहन को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
मामला क्यों बना चर्चा का विषय?
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि परिवार ने जांच प्रक्रिया, फोरेंसिक रिपोर्ट और डिजिटल साक्ष्यों को लेकर कई सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, जांच एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं और कानूनी प्रक्रिया जारी है। ऐसे में इस मामले का अंतिम निष्कर्ष न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों और जांच के आधार पर ही सामने आएगा।