जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में इबोला वायरस का पहला संदिग्ध मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है। राजधानी के राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (RUHS) अस्पताल में युगांडा से आई 19 वर्षीय युवती को भर्ती किया गया है। युवती में इबोला वायरस से मिलते-जुलते कुछ लक्षण पाए जाने के बाद उसे एहतियातन आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है और विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उसका इलाज जारी है।
जानकारी के अनुसार युवती को तेज बुखार और सिरदर्द की शिकायत थी। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसकी ट्रैवल हिस्ट्री और स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए इबोला संक्रमण की आशंका जताई। हालांकि अभी तक वायरस की पुष्टि नहीं हुई है और जांच के लिए आवश्यक सैंपल लैब भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला वास्तव में इबोला संक्रमण का है या नहीं।
RUHS अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अनिल गुप्ता ने बताया कि फिलहाल मरीज में कुछ ऐसे लक्षण दिखाई दिए हैं जो इबोला संक्रमण से मेल खाते हैं। चूंकि युवती हाल ही में युगांडा से भारत आई है, इसलिए सभी संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए सावधानी बरती जा रही है। उन्होंने कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन स्वास्थ्य सुरक्षा के सभी प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया जा रहा है।
स्वास्थ्य मंत्रालय पहले ही जारी कर चुका है एडवाइजरी
गौरतलब है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 2 जून को ही इबोला वायरस को लेकर देशभर के राज्यों और स्वास्थ्य संस्थानों के लिए एडवाइजरी जारी की थी। मंत्रालय ने विशेष रूप से उन लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है जो पिछले 21 दिनों के भीतर इबोला प्रभावित देशों से यात्रा कर भारत पहुंचे हैं या वहां से होकर आए हैं।
एडवाइजरी में कहा गया है कि ऐसे यात्रियों को अपने स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखनी चाहिए और किसी भी प्रकार के संदिग्ध लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। साथ ही संक्रमित होने की आशंका होने पर स्वयं को अन्य लोगों से अलग रखने की सलाह दी गई है।
क्या है इबोला वायरस?
इबोला वायरस एक गंभीर और जानलेवा संक्रामक बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति या संक्रमित जानवरों के शारीरिक द्रवों के संपर्क में आने से फैल सकती है। यह बीमारी मुख्य रूप से अफ्रीकी देशों में समय-समय पर प्रकोप के रूप में सामने आती रही है। इबोला संक्रमण तेजी से फैल सकता है और समय पर उपचार नहीं मिलने पर इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार इबोला वायरस रोग की औसत मृत्यु दर लगभग 50 प्रतिशत है। हालांकि विभिन्न प्रकोपों के दौरान यह दर 25 प्रतिशत से लेकर 90 प्रतिशत तक दर्ज की गई है।
इबोला वायरस के प्रमुख लक्षण
इबोला संक्रमण के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण जैसे दिखाई दे सकते हैं, लेकिन बाद में स्थिति गंभीर हो सकती है। प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं—
- तेज बुखार
- लगातार सिरदर्द
- मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द
- अत्यधिक कमजोरी
- उल्टी और दस्त
- पेट दर्द
- त्वचा पर चकत्ते
- बिना कारण खून बहना या रक्तस्राव
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और स्वयं दवा लेने से बचना चाहिए।
प्रशासन की अपील
स्वास्थ्य विभाग ने आमजन से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें। फिलहाल मरीज की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि मामला वास्तव में इबोला संक्रमण का है या नहीं।
राजस्थान में सामने आया यह संदिग्ध मामला स्वास्थ्य विभाग के लिए सतर्कता का संकेत जरूर है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर पहचान और उचित निगरानी से किसी भी संभावित खतरे को नियंत्रित किया जा सकता है।