अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की राशि में कथित गड़बड़ी और चोरी के आरोपों का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। मामले की जांच के लिए गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) मंगलवार को लगातार दूसरे दिन श्रीराम जन्मभूमि परिसर पहुंची और जांच को आगे बढ़ाया। इस बीच मामले में FIR दर्ज कराने की मांग भी तेज हो गई है। हालांकि अब तक पुलिस ने किसी शिकायत पर औपचारिक मुकदमा दर्ज नहीं किया है।
मंगलवार को धर्मसेना के संस्थापक संतोष दुबे ने श्रीराम जन्मभूमि थाने में शिकायत देकर चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की। उनका आरोप है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिन लोगों की भूमिका संदिग्ध है, उन्हें जांच के दायरे में लाया जाना चाहिए। दूसरी ओर, यूपी युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष शरद शुक्ला ने भी इसी मामले में शिकायत दर्ज कराने की घोषणा की है। उनका कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में तत्काल मुकदमा दर्ज कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
दूसरे दिन भी राम मंदिर पहुंची SIT
मंगलवार सुबह करीब 11 बजे SIT टीम राम मंदिर परिसर पहुंची। टीम के साथ अयोध्या के जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी और अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। जांच टीम मंदिर परिसर में दान और चढ़ावे की व्यवस्था, सुरक्षा प्रणाली और कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
सोमवार को जांच के पहले दिन टीम ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से विस्तृत जानकारी ली थी। इसके अलावा ट्रस्ट के आमंत्रित सदस्य गोपाल राव से भी पूछताछ की गई। जांच एजेंसी ने करीब 42 कर्मचारियों से सवाल-जवाब किए, जिनमें कई ऐसे कर्मचारी भी शामिल थे जो दान राशि की गिनती और प्रबंधन से जुड़े रहे हैं।
सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार SIT ने मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। जांच के दौरान सुरक्षा अधिकारियों से पूछा गया कि कर्मचारियों की मंदिर परिसर में प्रवेश और निकास के समय किस प्रकार की जांच होती थी। प्रारंभिक जानकारी में सामने आया कि कर्मचारियों की प्रवेश के समय तो जांच होती थी, लेकिन बाहर निकलते समय तलाशी की कोई सख्त व्यवस्था नहीं थी। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कहीं इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर कथित अनियमितताएं तो नहीं की गईं।
अब तक 2 करोड़ रुपए की बरामदगी
जांच में अब तक पांच लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनमें लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर शामिल बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार इन लोगों की निशानदेही पर करीब 2 करोड़ रुपये की बरामदगी की जा चुकी है। ये सभी किसी न किसी रूप में मंदिर में आने वाली दान राशि की गिनती और प्रबंधन से जुड़े थे।
लवकुश और अनुकल्प को पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां इनके बैंक खातों, संपत्तियों और आर्थिक गतिविधियों की भी जांच कर रही हैं।
करोड़ों की संपत्ति और बदली जीवनशैली भी जांच के दायरे में
जांच के दौरान कुछ कर्मचारियों और उनसे जुड़े लोगों की संपत्तियां भी संदेह के घेरे में आई हैं। चंपत राय के सहयोगी बताए जाने वाले रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू की अयोध्या और लखनऊ में करोड़ों रुपये की संपत्ति होने की बात सामने आई है। इसके अलावा कुछ अन्य कर्मचारियों की पिछले कुछ वर्षों में अचानक बदली आर्थिक स्थिति भी जांच का विषय बनी हुई है।
सूत्रों के मुताबिक, नोटों की गिनती करने वाले कुछ कर्मचारियों की आय और संपत्ति के बीच बड़ा अंतर पाया गया है। SIT इस पहलू की भी जांच कर रही है।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
मामले को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने मामले की न्यायिक जांच की मांग करते हुए कहा कि इतने बड़े मामले में पारदर्शी जांच जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े घोटाले बिना मिलीभगत के संभव नहीं होते।
वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि सरकार ने तुरंत SIT का गठन कर निष्पक्ष जांच शुरू कर दी है और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री नरेंद्र कश्यप ने कहा कि योगी सरकार पूरी गंभीरता से जांच करवा रही है और सच जल्द सामने आएगा।
संतों और धर्माचार्यों की प्रतिक्रिया
कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि यदि किसी ने भगवान राम के नाम पर आए चढ़ावे में गड़बड़ी की है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी को दोषी मानना उचित नहीं है, लेकिन मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब समाजवादी पार्टी सरकार में मंत्री रहे पवन पांडेय ने राम मंदिर के चढ़ावे से 5 से 7.5 करोड़ रुपये तक की कथित चोरी का दावा किया। इसके बाद मामला राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर CBI और ED जांच की मांग की थी। इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी मंदिर ट्रस्ट से रिपोर्ट मांगी थी।
धर्मसेना के संस्थापक ने थाने में शिकायत दी, बोले- SIT जांच पर भरोसा नहीं
धर्मसेना के संस्थापक संतोष दुबे ने मंगलवार को रामजन्मभूमि थाने में शिकायत दी। उन्होंने कहा- राम मंदिर में हर दिन करोड़ों का चढ़ावा आता है।
अभी सामने आया है कि साढ़े 7 करोड़ का चढ़ावा चोरी हुआ है। टिन्नू यादव ने 8 महीने की CCTV डिलीट करवाई हैं। 2022 में भी SIT गठित हुई थी, लेकिन उसकी रिपोर्ट आज तक सामने नहीं आई है। जिस मामले को पेंडिंग में डालना होता है, सरकार उसे ED, CBI के हवाले कर देती है, जिससे मामले की जांच लंबी खिंच जाए।
चंपत राय, टिन्नू यादव, अनिल मिश्रा और गोपाल राव चोर हैं। अगर इनके खिलाफ FIR दर्ज नहीं होती है, तो हम SSP-DIG के पास जाएंगे। अगर वहां भी कार्रवाई नहीं हुई, तो कोर्ट जाएंगे। जब बाबरी मस्जिद गिराई गई थी, तब CBI ने जांच की थी और मुझे मुख्य आरोपी बनाया गया था।
30 साल तक हमने कैसे मुकदमे लड़े, यह चंपत राय नहीं जानते। हम लोगों ने अपनी पूरी जवानी खपा दी। लेकिन आज राम के नाम पर लूट की जा रही है। हमें किसी SIT पर विश्वास नहीं है।धर्म सेना के संस्थापक ने शिकायत में क्या लिखा, पढ़िए
धर्मसेना के संस्थापक संतोष दुबे ने अपने शिकायती लेटर में लिखा है- पिछले कुछ दिनों से खबरों और सार्वजनिक चर्चाओं में यह बात सामने आ रही है कि राम मंदिर में भक्तों द्वारा दिए गए दान और चढ़ावे के प्रबंधन में गड़बड़ी हुई है। धन के दुरुपयोग और चोरी जैसे आरोप लगाए जा रहे हैं। इन आरोपों ने करोड़ों रामभक्तों और अयोध्यावासियों को गहरी चिंता और पीड़ा में डाल दिया है।
यह मामला सिर्फ आर्थिक अनियमितता का नहीं है, बल्कि लोगों की आस्था और विश्वास से जुड़ा है। मंदिर में दिया गया हर दान प्रभु श्रीराम के लिए होता है, किसी व्यक्ति के लिए नहीं। अगर किसी भी कर्मचारी, अधिकारी या जिम्मेदार व्यक्ति ने इस पवित्र धन के साथ गलत काम किया है, तो यह कानून के साथ-साथ धर्म और समाज के साथ भी विश्वासघात है।
मैं यह साफ कहना चाहता हूं कि यह आवेदन किसी व्यक्ति, ट्रस्ट या संस्था के खिलाफ निजी द्वेष के कारण नहीं दिया जा रहा है। मेरी केवल यही मांग है कि पूरे मामले की ईमानदारी से जांच हो। अगर जांच में कोई दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई हो, चाहे वह कितना ही बड़ा या प्रभावशाली क्यों न हो।
इसलिए आपसे निवेदन है-
- राम मंदिर के दान और चढ़ावे से जुड़े सभी आरोपों की गंभीर जांच कराई जाए।
- अगर शुरुआती जांच में अपराध के संकेत मिलते हैं, तो संबंधित लोगों पर तुरंत FIR दर्ज की जाए।
- दान से जुड़े दस्तावेज, खाते, CCTV फुटेज और अन्य सबूत सुरक्षित रखे जाएं।
- किसी भी दबाव या प्रभाव से मुक्त होकर निष्पक्ष जांच हो।
- जांच पूरी होने के बाद दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
- श्रद्धालुओं का भरोसा बनाए रखने के लिए जांच प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रखी जाए।