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राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: हिडन कैमरे से खुला खेल! नोटों की गड्डियों और जेवरात में ऐसे होती थी कथित हेराफेरी, SIT जांच तेज

Kashish Sain 3 months ago
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT की जांच तेज हो गई है। जांच में हिडन कैमरों, नोटों की गड्डियों में कथित हेराफेरी, जेवरात की चोरी और सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही समेत कई अहम पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
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3 months ago

अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT जांच जारी, आज हो सकती हैं दो FIR दर्ज

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की राशि में कथित गड़बड़ी और चोरी के आरोपों का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। मामले की जांच के लिए गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) मंगलवार को लगातार दूसरे दिन श्रीराम जन्मभूमि परिसर पहुंची और जांच को आगे बढ़ाया। इस बीच मामले में FIR दर्ज कराने की मांग भी तेज हो गई है। हालांकि अब तक पुलिस ने किसी शिकायत पर औपचारिक मुकदमा दर्ज नहीं किया है।

मंगलवार को धर्मसेना के संस्थापक संतोष दुबे ने श्रीराम जन्मभूमि थाने में शिकायत देकर चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की। उनका आरोप है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिन लोगों की भूमिका संदिग्ध है, उन्हें जांच के दायरे में लाया जाना चाहिए। दूसरी ओर, यूपी युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष शरद शुक्ला ने भी इसी मामले में शिकायत दर्ज कराने की घोषणा की है। उनका कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में तत्काल मुकदमा दर्ज कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

दूसरे दिन भी राम मंदिर पहुंची SIT

मंगलवार सुबह करीब 11 बजे SIT टीम राम मंदिर परिसर पहुंची। टीम के साथ अयोध्या के जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी और अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। जांच टीम मंदिर परिसर में दान और चढ़ावे की व्यवस्था, सुरक्षा प्रणाली और कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।

सोमवार को जांच के पहले दिन टीम ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से विस्तृत जानकारी ली थी। इसके अलावा ट्रस्ट के आमंत्रित सदस्य गोपाल राव से भी पूछताछ की गई। जांच एजेंसी ने करीब 42 कर्मचारियों से सवाल-जवाब किए, जिनमें कई ऐसे कर्मचारी भी शामिल थे जो दान राशि की गिनती और प्रबंधन से जुड़े रहे हैं।

सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल

सूत्रों के अनुसार SIT ने मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। जांच के दौरान सुरक्षा अधिकारियों से पूछा गया कि कर्मचारियों की मंदिर परिसर में प्रवेश और निकास के समय किस प्रकार की जांच होती थी। प्रारंभिक जानकारी में सामने आया कि कर्मचारियों की प्रवेश के समय तो जांच होती थी, लेकिन बाहर निकलते समय तलाशी की कोई सख्त व्यवस्था नहीं थी। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कहीं इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर कथित अनियमितताएं तो नहीं की गईं।

अब तक 2 करोड़ रुपए की बरामदगी

जांच में अब तक पांच लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनमें लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर शामिल बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार इन लोगों की निशानदेही पर करीब 2 करोड़ रुपये की बरामदगी की जा चुकी है। ये सभी किसी न किसी रूप में मंदिर में आने वाली दान राशि की गिनती और प्रबंधन से जुड़े थे।

लवकुश और अनुकल्प को पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां इनके बैंक खातों, संपत्तियों और आर्थिक गतिविधियों की भी जांच कर रही हैं।

करोड़ों की संपत्ति और बदली जीवनशैली भी जांच के दायरे में

जांच के दौरान कुछ कर्मचारियों और उनसे जुड़े लोगों की संपत्तियां भी संदेह के घेरे में आई हैं। चंपत राय के सहयोगी बताए जाने वाले रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू की अयोध्या और लखनऊ में करोड़ों रुपये की संपत्ति होने की बात सामने आई है। इसके अलावा कुछ अन्य कर्मचारियों की पिछले कुछ वर्षों में अचानक बदली आर्थिक स्थिति भी जांच का विषय बनी हुई है।

सूत्रों के मुताबिक, नोटों की गिनती करने वाले कुछ कर्मचारियों की आय और संपत्ति के बीच बड़ा अंतर पाया गया है। SIT इस पहलू की भी जांच कर रही है।

राजनीतिक बयानबाजी भी तेज

मामले को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने मामले की न्यायिक जांच की मांग करते हुए कहा कि इतने बड़े मामले में पारदर्शी जांच जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े घोटाले बिना मिलीभगत के संभव नहीं होते।

वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि सरकार ने तुरंत SIT का गठन कर निष्पक्ष जांच शुरू कर दी है और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री नरेंद्र कश्यप ने कहा कि योगी सरकार पूरी गंभीरता से जांच करवा रही है और सच जल्द सामने आएगा।

संतों और धर्माचार्यों की प्रतिक्रिया

कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि यदि किसी ने भगवान राम के नाम पर आए चढ़ावे में गड़बड़ी की है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी को दोषी मानना उचित नहीं है, लेकिन मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब समाजवादी पार्टी सरकार में मंत्री रहे पवन पांडेय ने राम मंदिर के चढ़ावे से 5 से 7.5 करोड़ रुपये तक की कथित चोरी का दावा किया। इसके बाद मामला राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर CBI और ED जांच की मांग की थी। इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी मंदिर ट्रस्ट से रिपोर्ट मांगी थी।

फिलहाल SIT वित्तीय रिकॉर्ड, दान प्रबंधन प्रणाली, कर्मचारियों की भूमिका और सुरक्षा व्यवस्था की गहन जांच कर रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि चढ़ावे की राशि में वास्तव में कोई गड़बड़ी हुई है या नहीं।

Reported by: Kashish Sain
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अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे की राशि में कथित गड़बड़ी और चोरी के आरोपों की जांच लगातार तेज होती जा रही है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) लगातार दूसरे दिन श्रीराम जन्मभूमि परिसर पहुंची और दान प्रबंधन, कर्मचारियों की भूमिका, सुरक्षा व्यवस्था तथा वित्तीय रिकॉर्ड की जांच आगे बढ़ाई। इस बीच मामले में एफआईआर दर्ज कराने की मांग भी तेज हो गई है, हालांकि खबर लिखे जाने तक पुलिस ने किसी शिकायत पर औपचारिक मुकदमा दर्ज नहीं किया है।

SIT ने दूसरे दिन भी की जांच

मंगलवार सुबह SIT टीम अयोध्या के जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी और अन्य अधिकारियों के साथ राम मंदिर परिसर पहुंची। टीम ने दान पेटियों की व्यवस्था, नोटों की गिनती की प्रक्रिया, CCTV व्यवस्था और कर्मचारियों की भूमिका की जांच की।

पहले दिन जांच टीम ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, आमंत्रित सदस्य गोपाल राव और दान प्रबंधन से जुड़े कई कर्मचारियों से पूछताछ कर चुकी है।

हिडन कैमरों से कथित गड़बड़ी का खुलासा

जांच से जुड़ी जानकारी के अनुसार, ट्रस्ट को तब शक हुआ जब बैंक में जमा हो रही दान राशि और दान पेटियों से निकलने वाली अनुमानित राशि में अंतर दिखाई देने लगा। इसके बाद नोट गिनने वाले कमरे में हिडन कैमरे लगाए गए।

बताया जा रहा है कि फुटेज में कुछ कर्मचारी नोटों की गड्डियां बनाते समय कथित रूप से रकम छिपाते दिखाई दिए। जांच एजेंसियां इन फुटेज और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही हैं। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

नोटों की गड्डियों में कथित हेराफेरी का तरीका

जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि नोटों की गड्डियों में अतिरिक्त नोट लगाकर वाउचर तैयार किए जाते थे। बाद में बैंक ले जाते समय कथित रूप से अतिरिक्त नोट निकाल लिए जाते थे, जिससे रिकॉर्ड और जमा राशि का मिलान प्रभावित न हो। जांच एजेंसियां इस कथित तरीके की सत्यता की जांच कर रही हैं।

जेवरात की भी जांच के दायरे में

सूत्रों के अनुसार, जांच में दान पेटियों में आए जेवरात के रिकॉर्ड और वास्तविक जमा का भी मिलान किया जा रहा है। फिलहाल इस संबंध में किसी निष्कर्ष की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

अब तक 2 करोड़ रुपये की बरामदगी

जांच एजेंसियों के अनुसार, अब तक पांच लोगों के नाम जांच में सामने आए हैं। उनकी निशानदेही पर करीब 2 करोड़ रुपये बरामद किए जाने की जानकारी दी गई है। कुछ आरोपियों से पूछताछ जारी है और उनके बैंक खातों, संपत्तियों तथा वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा रही है।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

SIT ने मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि कर्मचारियों की प्रवेश के समय जांच होती थी, लेकिन बाहर निकलते समय तलाशी की व्यवस्था पर्याप्त सख्त नहीं थी। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या इसी व्यवस्था का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया।

एफआईआर की मांग तेज

धर्मसेना के संस्थापक संतोष दुबे ने रामजन्मभूमि थाने में शिकायत देकर मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। वहीं यूपी युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष शरद शुक्ला ने भी मुकदमा दर्ज कराने की बात कही है।

राजनीतिक बयानबाजी जारी

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मामले की न्यायिक जांच की मांग की है। दूसरी ओर भाजपा नेताओं का कहना है कि राज्य सरकार ने SIT गठित कर निष्पक्ष जांच शुरू कर दी है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

मामला कैसे शुरू हुआ

विवाद तब सामने आया जब पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने राम मंदिर के चढ़ावे में करोड़ों रुपये की कथित गड़बड़ी का दावा किया। इसके बाद राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर मामला चर्चा में आया। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा भी ट्रस्ट से रिपोर्ट मांगे जाने की जानकारी सामने आई थी।

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