भारत का ऑटोमोबाइल बाजार तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है। एक ओर जहां इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को भविष्य की तकनीक माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर हाइब्रिड (Hybrid) कारें भी उपभोक्ताओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। पेट्रोल और पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों के बीच संतुलन बनाने वाली हाइब्रिड तकनीक को अब भारतीय ग्राहक एक व्यावहारिक विकल्प के रूप में देख रहे हैं। इसी बढ़ती मांग को देखते हुए हुंडई, टोयोटा, होंडा समेत छह प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियां अगले 12 महीनों में भारतीय बाजार में नई हाइब्रिड कारें लॉन्च करने की तैयारी कर रही हैं।
ऑटो उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अभी भी पूरी तरह विकसित नहीं हुआ है। ऐसे में कई ग्राहक इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने को लेकर अभी भी संकोच कर रहे हैं। हाइब्रिड कारें इस समस्या का समाधान प्रस्तुत करती हैं क्योंकि इनमें पेट्रोल इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर दोनों का संयोजन होता है। इससे ईंधन की बचत होती है, प्रदूषण कम होता है और चार्जिंग की चिंता भी नहीं रहती।
टोयोटा और होंडा पहले से ही भारतीय बाजार में मजबूत हाइब्रिड तकनीक वाली गाड़ियों की बिक्री कर रही हैं। टोयोटा की इनोवा हाईक्रॉस और अर्बन क्रूजर हाइराइडर तथा होंडा की सिटी ई:HEV को ग्राहकों से अच्छा प्रतिसाद मिला है। अब अन्य कंपनियां भी इस सेगमेंट में अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहती हैं।
हुंडई भारत में अपनी नई पीढ़ी की हाइब्रिड तकनीक के साथ कई मॉडल पेश करने की योजना बना रही है। वहीं मारुति सुजुकी भी अपने हाइब्रिड पोर्टफोलियो का विस्तार कर सकती है। इसके अलावा किआ, रेनो और कुछ अन्य अंतरराष्ट्रीय ब्रांड भी भारतीय बाजार में हाइब्रिड विकल्पों पर काम कर रहे हैं। कंपनियों का मानना है कि अगले कुछ वर्षों में हाइब्रिड वाहन भारतीय बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
हाइब्रिड वाहन पारंपरिक पेट्रोल कारों की तुलना में 25 से 40 प्रतिशत तक बेहतर माइलेज देने में सक्षम हैं। इससे बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच ग्राहकों को बड़ी राहत मिल सकती है। साथ ही इन वाहनों से कार्बन उत्सर्जन भी कम होता है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलती है।
सरकार भी स्वच्छ और वैकल्पिक ईंधन आधारित वाहनों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न नीतियों पर काम कर रही है। यदि हाइब्रिड वाहनों को करों और प्रोत्साहनों के मामले में अतिरिक्त समर्थन मिलता है, तो उनकी मांग और अधिक बढ़ सकती है।
ऑटोमोबाइल उद्योग के जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में भारतीय बाजार में पेट्रोल, इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड तकनीकों का मिश्रित दौर देखने को मिलेगा। ऐसे में नई हाइब्रिड कारों की लॉन्चिंग न केवल ग्राहकों के लिए अधिक विकल्प लेकर आएगी, बल्कि देश के ऑटो सेक्टर में तकनीकी बदलाव की नई दिशा भी तय करेगी।