राजस्थान की गौरवशाली लोकसंगीत परंपरा को देश और दुनिया में नई पहचान दिलाने वाले मांगणियार समाज के दो प्रतिभाशाली कलाकारों को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान मिलने से पूरे प्रदेश में खुशी की लहर है। सुप्रसिद्ध लोक कलाकार समंदर खान मांगणियार को "संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार-2024" तथा युवा लोक कलाकार और ढोलक वादक मंजूर खान मांगणियार को "उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार-2024" से सम्मानित किया गया है।

यह सम्मान दोनों कलाकारों की वर्षों की साधना, लोककला के संरक्षण और संवर्धन के प्रति समर्पण तथा राजस्थान की मांगणियार गायकी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित पहचान दिलाने के योगदान का सम्मान है।

लोकसंगीत की परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया

समंदर खान ने अपनी अद्वितीय गायकी और लोकसंगीत की विरासत को जीवंत बनाए रखने के प्रयासों से राजस्थान का नाम देश-विदेश में रोशन किया है। वहीं मंजूर खान ने ढोलक वादन की कला को नई पहचान दी है। उनकी ढोलक की थाप में राजस्थान की मिट्टी की खुशबू और लोकजीवन की आत्मा झलकती है।

देश-विदेश के सैकड़ों मंचों पर अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके मंजूर खान ने लोकसंगीत की उस परंपरा को आगे बढ़ाया है, जो पीढ़ियों से मांगणियार समाज की पहचान रही है।

‘गुदड़ी के लाल’ से राष्ट्रीय सम्मान तक का सफर

करीब ढाई दशक पहले बाड़मेर जिले के शिव क्षेत्र के छोटे से गांव देदड़ीयार के मंजूर खान ने एक विदेशी फिल्म में अभिनय कर लोगों का ध्यान आकर्षित किया था। उस फिल्म में उनके साथ प्रसिद्ध लोक कलाकार स्वरूप खान भी शामिल थे। वर्ष 2004-05 में उन पर प्रकाशित एक समाचार का शीर्षक था “गुदड़ी के लाल साबित हुए मंजूर खान”।

आज वर्षों बाद वही शीर्षक एक बार फिर सच साबित हुआ है। कभी "बालक मंजूर" के नाम से पहचाने जाने वाले कलाकार आज "उस्ताद मंजूर खान" के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित हुए हैं। यह उपलब्धि उनकी अथक मेहनत, समर्पण और संगीत साधना का परिणाम है।

लोकधरोहर को मिला राष्ट्रीय मंच

मांगणियार समाज, बाड़मेर-जैसलमेर अंचल और लोकसंगीत प्रेमियों के लिए यह बेहद गर्व का क्षण है। दोनों कलाकारों की यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत संघर्ष और सफलता की कहानी है, बल्कि राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की वैश्विक पहचान का भी प्रतीक है।

यह सम्मान आने वाली पीढ़ियों को लोककला और लोकसंगीत के संरक्षण के लिए प्रेरित करेगा। समंदर खान और मंजूर खान ने अपनी कला के माध्यम से यह साबित किया है कि लोकसंगीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि संस्कृति और परंपरा की जीवंत धरोहर है।

दोनों सम्मानित कलाकारों को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए अनंत शुभकामनाएं।