बीकानेर। राजस्थान के बीकानेर जिले में भाजपा और कांग्रेस की राजनीति के बीच एक वीडियो ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। कैबिनेट मंत्री एवं भाजपा नेता सुमित गोदारा के कोलायत दौरे के दौरान उनके ट्रैक्टर पर कांग्रेस नेता श्याम सिंह भाटी के बैठने का वीडियो सामने आने के बाद प्रदेश कांग्रेस ने तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें बीकानेर देहात कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष पद से हटा दिया।

गौरतलब है कि श्याम सिंह भाटी को महज 5 दिन पहले, 9 जुलाई को ही बीकानेर देहात कांग्रेस का जिला उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था। लेकिन भाजपा मंत्री के साथ सार्वजनिक रूप से नजर आने के बाद पार्टी नेतृत्व ने इसे अनुशासनहीनता का मामला मानते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई कर दी।

वीडियो सामने आने के बाद बढ़ा विवाद

कैबिनेट मंत्री सुमित गोदारा के कोलायत दौरे के दौरान एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें कांग्रेस नेता श्याम सिंह भाटी मंत्री के ट्रैक्टर पर बैठे दिखाई दिए। वीडियो सामने आते ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इसे पार्टी लाइन के खिलाफ बताया और मामले को गंभीरता से लिया। इसके बाद प्रदेश कांग्रेस ने संगठनात्मक अनुशासन का हवाला देते हुए भाटी को उनके पद से हटा दिया।

श्याम सिंह भाटी ने दी सफाई

कार्रवाई के बाद श्याम सिंह भाटी ने अपने ऊपर लगे राजनीतिक आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि वे किसी राजनीतिक उद्देश्य से मंत्री के साथ नहीं गए थे, बल्कि कोलायत क्षेत्र की जनसमस्याओं और स्थानीय मांगों को लेकर मंत्री सुमित गोदारा से मिलने पहुंचे थे।

भाटी ने बताया कि मंत्री सुमित गोदारा उनके पड़ोसी हैं और मुलाकात के दौरान उन्होंने उन्हें ट्रैक्टर पर बैठा लिया था। उनके अनुसार, वे करीब सौ कदम चलने के बाद ही ट्रैक्टर से उतर गए थे, लेकिन उनका पक्ष सुने बिना ही कांग्रेस पार्टी ने उनके खिलाफ कार्रवाई कर दी।

जनता की आवाज उठाने का दावा

श्याम सिंह भाटी का कहना है कि वे आगे भी कोलायत क्षेत्र की जनता की समस्याओं और मांगों को लेकर संघर्ष करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल क्षेत्र के विकास और जनहित के मुद्दों को मंत्री तक पहुंचाना था, न कि किसी राजनीतिक संदेश देना।

अनुशासन का संदेश

राजनीतिक गलियारों में कांग्रेस की इस कार्रवाई को संगठनात्मक अनुशासन से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व ने इस फैसले के जरिए स्पष्ट संकेत दिया है कि पार्टी लाइन से अलग सार्वजनिक गतिविधियों या विरोधी दल के नेताओं के साथ सार्वजनिक मंच साझा करने जैसे मामलों को गंभीरता से लिया जाएगा और ऐसे मामलों में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।