राजस्थान में एक बार फिर मानव तस्करी के अंतरराज्यीय नेटवर्क का बड़ा खुलासा हुआ है। झालावाड़ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो नाबालिग लड़कियों को राजस्थान से मुंबई और अन्य बड़े शहरों तक ले जाकर बेचने का काम करता था।

इस कार्रवाई में पुलिस ने 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच जारी है। पुलिस के अनुसार यह गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता था और इसके तार कई राज्यों से जुड़े हुए हैं।

तीन लेयर में चलता था पूरा नेटवर्क

पुलिस जांच में सामने आया है कि यह मानव तस्करी रैकेट तीन स्तरों पर सक्रिय था। पहले स्तर पर स्थानीय एजेंट गांवों और गरीब बस्तियों में परिवारों को निशाना बनाते थे। दूसरे स्तर पर बिचौलिए आर्थिक तंगी और रोजगार का झांसा देकर लड़कियों को अपने साथ ले जाते थे। तीसरे स्तर पर मुंबई जैसे बड़े शहरों में मौजूद एजेंट उन्हें डांस बार और अनैतिक धंधों में धकेल देते थे।

पहचान बदलने का खतरनाक खेल

गिरोह की सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि नाबालिग लड़कियों के दस्तावेजों में हेरफेर किया जाता था। आधार कार्ड और अन्य पहचान पत्रों में उम्र बदलकर उन्हें बालिग दिखाया जाता था, ताकि ट्रैफिकिंग आसान हो सके। इसके बाद उनकी पहचान पूरी तरह बदल दी जाती थी, जिससे उनकी असली पहचान ढूंढना लगभग नामुमकिन हो जाता था।

कई राज्यों तक फैला नेटवर्क

यह पूरा रैकेट सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं था। इसके तार झालावाड़, बूंदी और टोंक से लेकर मध्यप्रदेश के ग्वालियर और महाराष्ट्र के मुंबई तक फैले हुए थे। पुलिस का कहना है कि यह एक संगठित अपराध नेटवर्क है, जिसमें अलग-अलग राज्यों के एजेंट एक-दूसरे से जुड़े हुए थे।

5 आरोपी गिरफ्तार, बाकी की तलाश जारी

झालावाड़ पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 5 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। एक अन्य संदिग्ध को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और मुंबई में इसके कितने बड़े नेटवर्क संचालित हो रहे हैं।

मानव तस्करी का यह मामला एक बार फिर सिस्टम और समाज दोनों के लिए गंभीर चेतावनी है। पुलिस की कार्रवाई से जहां कई जिंदगियां बचाई गई हैं, वहीं यह भी साफ हुआ है कि ऐसे नेटवर्क अभी भी सक्रिय हैं और कमजोर तबकों को निशाना बना रहे हैं।