जयपुर। राजस्थान में निवेश और औद्योगिक विस्तार को नई रफ्तार देने के लिए रीको (RIICO) को आखिरकार बड़ी मात्रा में भूमि उपलब्ध करा दी गई है। जिला कलक्टरों और राजस्व विभाग की संयुक्त पहल के तहत प्रदेश के लगभग 70 स्थानों पर करीब 4150 हेक्टेयर जमीन औद्योगिक उपयोग के लिए आवंटित की गई है।

इस फैसले से राज्य में नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने और निवेशकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का रास्ता साफ हो गया है। अब रीको न केवल विकसित भूमि का सीधा आवंटन करेगा, बल्कि कई जगहों पर अविकसित औद्योगिक क्षेत्रों को भी विकसित कर भू-खंड उपलब्ध कराएगा।

बड़े जिलों में बड़े औद्योगिक क्षेत्र

इस भूमि आवंटन में कुछ जिलों को विशेष रूप से बड़े पैमाने पर जमीन मिली है, जिससे वहां बड़े औद्योगिक हब बनने की संभावना बढ़ गई है।

दौसा: 1013 हेक्टेयर

कोटा: 874 हेक्टेयर

बालोतरा क्षेत्र: 160 हेक्टेयर

अजमेर: 106 हेक्टेयर

पाली: 60 हेक्टेयर

भीलवाड़ा, धौलपुर, सीकर, टोंक: 125 हेक्टेयर

इसके अलावा बूंदी, नागौर, उदयपुर, डूंगरपुर, करौली, खैरथल-तिजारा, कोटपुतली-बहरोड़ और बांसवाड़ा जैसे जिलों में 5 से 50 हेक्टेयर तक छोटे औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जाएंगे।

कलक्टरों को दिए गए विशेष निर्देश

रीको ने जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि राष्ट्रीय और अंतरराज्यीय हाईवे तथा एक्सप्रेस-वे के आसपास भूमि चिन्हित की जाए, ताकि नए औद्योगिक कॉरिडोर और औद्योगिक क्षेत्रों का तेजी से विकास हो सके।

पहले कई औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि की कमी के कारण निवेशकों को परेशानी हो रही थी, जबकि मांग लगातार बढ़ रही थी। इस समस्या के समाधान के लिए यह बड़ा कदम उठाया गया है।

क्या होंगे इसके फायदे?

नए औद्योगिक क्षेत्रों का तेज विस्तार

निवेशकों को आसानी से भूमि और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर

स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन

छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी औद्योगिक विकास

आर्थिक गतिविधियों में तेजी और निवेश आकर्षण में वृद्धि

केंद्र की योजना में 5 बड़े औद्योगिक हब

राज्य सरकार ने केंद्र को पांच आधुनिक औद्योगिक हब विकसित करने का प्रस्ताव भेजा है। ये हब बालोतरा, जयपुर, जोधपुर, कोटा और दौसा में बनाए जाने की योजना है।

ये सभी क्षेत्र दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) के नजदीक स्थित हैं, जिससे इन्हें लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी का बड़ा लाभ मिलेगा। योजना के तहत देशभर में दो चरणों में 100 औद्योगिक क्षेत्रों का विकास किया जाएगा, जिनमें हर चरण में 50 क्षेत्रों का चयन होगा।

इन हब्स के विकास के लिए केंद्र सरकार की ओर से प्रति एकड़ अधिकतम 1 करोड़ रुपये तक का वित्तीय सहयोग मिलने की संभावना है, जबकि भूमि उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की नोडल एजेंसी की होगी।