पाली जिले में एक शादी उस समय मातम में बदल गई, जब फेरों के दौरान दूल्हे की अचानक तबीयत बिगड़ गई। किसी तरह शादी की रस्में पूरी कराई गईं, लेकिन इसके बाद दूल्हा बेहोश हो गया। उसे पहले पाली और फिर जोधपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 20 दिनों तक वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद 9 जुलाई को उसकी मौत हो गई। हैरानी की बात यह है कि डॉक्टर भी उसकी मौत की स्पष्ट वजह का पता नहीं लगा सके।

फेरों के दौरान सीने में दर्द और पसीना आने की शिकायत

मृतक की पहचान पाली जिले के सुकरलाई गांव निवासी 28 वर्षीय ओमप्रकाश के रूप में हुई है। परिवार के अनुसार, 20 जून को ओमप्रकाश की बारात मांडावास गांव गई थी। सुबह करीब 10:15 बजे विवाह की रस्में शुरू हुईं। मृतक के चाचा वजाराम ने बताया कि तीसरे फेरे के बाद ओमप्रकाश ने सीने में दर्द और तेज पसीना आने की शिकायत की। उस समय परिजनों ने इसे भीषण गर्मी का असर समझा और किसी तरह सातों फेरे पूरे कराए।

फेरों के बाद हुआ अचेत, अस्पताल में भर्ती

फेरे समाप्त होने के कुछ ही देर बाद ओमप्रकाश की तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ गई और वह बेहोश होकर गिर पड़ा। परिजन पहले उसे बारात के डेरे पर ले गए और आराम कराने की कोशिश की, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उसे तुरंत पाली के बांगड़ अस्पताल ले जाया गया।

बांगड़ अस्पताल के डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद जोधपुर के एमडीएम अस्पताल रेफर कर दिया। वहां उसे आईसीयू में भर्ती कर वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया।

20 दिन तक चला इलाज, नहीं बच सकी जान

ओमप्रकाश 21 जून से लेकर 8 जुलाई की रात तक एमडीएम अस्पताल के आईसीयू में भर्ती रहा। डॉक्टर लगातार उसकी जान बचाने का प्रयास करते रहे, लेकिन उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। आखिरकार 9 जुलाई को उसकी मौत हो गई।

परिजनों का कहना है कि इलाज के दौरान डॉक्टरों ने एमआरआई और सीटी स्कैन समेत कई जांचें कीं, लेकिन किसी गंभीर बीमारी या मौत के कारण का पता नहीं चल पाया।

परिवार का इकलौता बेटा था ओमप्रकाश

ओमप्रकाश जयपुर के मानसरोवर स्थित विजय पथ इलाके में एक निजी संस्थान में काम करता था। कुछ समय पहले उसके पिता देवाराम का निधन हो चुका था। वह परिवार का इकलौता बेटा था और अपनी विधवा मां तथा इकलौती बहन का सहारा था। शादी के कुछ ही घंटों बाद उसकी हालत बिगड़ने और फिर मौत हो जाने से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

दुल्हन ससुराल पहुंची, दूल्हा अस्पताल में रहा

घटना के बाद बारात की बाकी रस्में पूरी कर दुल्हन कविता को सुकरलाई गांव लाया गया। इसके बाद अधिकांश परिजन भी जोधपुर अस्पताल पहुंच गए, जहां ओमप्रकाश का इलाज चल रहा था। शादी की खुशियां देखते ही देखते मातम में बदल गईं।

पोस्टमार्टम नहीं कराया

9 जुलाई को मौत के बाद परिजन ओमप्रकाश का शव लेकर गांव पहुंचे और उसी दिन अंतिम संस्कार कर दिया। परिवार ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया, जिसके कारण मौत की वास्तविक वजह सामने नहीं आ सकी।

डॉक्टर ने क्या कहा?

पाली के बांगड़ अस्पताल के डॉक्टर राजेंद्र कुमार ने बताया कि जब ओमप्रकाश को अस्पताल लाया गया था, तब वह पहले से ही बेहोश था। परिजनों ने पूरी जानकारी नहीं दी थी। मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल उच्च केंद्र (हायर सेंटर) रेफर कर दिया गया था। डॉक्टरों के अनुसार, मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका।