नीट पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली और बढ़ती बेरोजगारी के मुद्दे पर कांग्रेस अब सड़क से संसद तक संघर्ष का बिगुल फूंकने जा रही है। इस अभियान की शुरुआत 17 जून को राजस्थान के कोटा से होगी, जहां लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लाखों छात्रों के बीच संवाद कर युवाओं की आवाज को राष्ट्रीय मंच देने का प्रयास करेंगे।

दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में हुई रणनीतिक बैठक के बाद कांग्रेस ने परीक्षा घोटालों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर देशव्यापी अभियान के पहले चरण की घोषणा की है। पार्टी का मानना है कि पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों ने युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है और अब इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।

आखिर कोटा ही क्यों?

राजनीतिक विश्लेषकों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि कांग्रेस ने अपने इस बड़े अभियान की शुरुआत के लिए कोटा को ही क्यों चुना। इसका जवाब कोटा की पहचान में छिपा है। देश की "कोचिंग कैपिटल" कहे जाने वाले इस शहर में हर साल 2 से 3 लाख छात्र नीट और जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं।

उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, हरियाणा, झारखंड समेत देश के लगभग हर राज्य से छात्र कोटा पहुंचते हैं। ऐसे में कोटा केवल राजस्थान का शहर नहीं, बल्कि पूरे देश के छात्र समुदाय का प्रतिनिधि केंद्र बन चुका है।

कांग्रेस का मानना है कि नीट पेपर लीक का सबसे बड़ा असर इन्हीं छात्रों और उनके परिवारों पर पड़ा है। ऐसे में कोटा से आंदोलन शुरू करना सीधे उन लाखों परिवारों तक संदेश पहुंचाने का प्रयास है, जिनके बच्चे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।

छात्रों से सीधा संवाद करेंगे राहुल गांधी

17 जून को राहुल गांधी छात्रों, युवा संगठनों, शिक्षकों और परीक्षा व्यवस्था से प्रभावित अभ्यर्थियों के साथ संवाद करेंगे। कांग्रेस इस कार्यक्रम को केवल एक राजनीतिक सभा नहीं, बल्कि युवाओं के मुद्दों पर राष्ट्रीय चर्चा की शुरुआत के रूप में प्रस्तुत कर रही है।

पार्टी की योजना है कि एनएसयूआई, यूथ कांग्रेस, प्रदेश कांग्रेस कमेटी और जिला इकाइयों के माध्यम से देशभर में छात्रों तक पहुंच बनाई जाए। इसके लिए कैंपस संवाद, कोचिंग संस्थानों में संपर्क अभियान, सोशल मीडिया अभियान और डिजिटल आउटरीच कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे।

तैयार है आंदोलन का राष्ट्रीय रोडमैप

कोटा से शुरू होने वाला यह अभियान कई राज्यों तक पहुंचेगा।

  • 17 जून – कोटा (राजस्थान)

  • 10 जुलाई – प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)

  • 11 जुलाई – पटना (बिहार)

  • 14 जुलाई – नई दिल्ली

कांग्रेस का लक्ष्य छात्र आंदोलनों और प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रमुख केंद्रों में युवाओं के मुद्दों को प्रमुखता से उठाना है।

युवाओं और मध्यम वर्ग पर नजर

राजनीतिक दृष्टि से भी यह अभियान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस उन छात्रों, अभिभावकों और मध्यम वर्गीय परिवारों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है जो महंगी कोचिंग, बढ़ते शैक्षणिक खर्च और पेपर लीक जैसी घटनाओं से प्रभावित हुए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा व्यवस्था को लेकर बढ़ती नाराजगी को कांग्रेस राजनीतिक समर्थन में बदलने की रणनीति पर काम कर रही है।

कोटा से राहुल का पुराना जुड़ाव

राहुल गांधी का कोटा से संबंध नया नहीं है। दिसंबर 2022 में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान उन्होंने कोटा में कोचिंग छात्रों के साथ विशेष संवाद किया था। उस दौरान उन्होंने छात्रों के मानसिक दबाव, प्रतिस्पर्धा और करियर संबंधी चुनौतियों पर चर्चा की थी।

अब एक बार फिर कोटा आकर राहुल गांधी युवाओं को यह संदेश देने का प्रयास करेंगे कि उनकी समस्याएं कांग्रेस की प्राथमिकता में हैं।

भाजपा सरकार पर दोहरा निशाना

राजस्थान में भाजपा सरकार होने के कारण इस आंदोलन का राजनीतिक महत्व और बढ़ जाता है। कांग्रेस इस अभियान के जरिए केंद्र की मोदी सरकार के साथ-साथ राजस्थान की भजनलाल सरकार को भी युवाओं और रोजगार के मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार पर लगातार निशाना साध रहे हैं। ऐसे में यह अभियान केवल पेपर लीक विरोधी आंदोलन नहीं, बल्कि युवाओं के मुद्दों को लेकर राष्ट्रीय राजनीतिक नैरेटिव तैयार करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

अब सबकी नजर 17 जून को कोटा में होने वाले राहुल गांधी के कार्यक्रम पर टिकी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि कोचिंग कैपिटल से उठने वाली यह राजनीतिक आवाज देशभर में कितना प्रभाव छोड़ पाती है।