विश्व धरोहर चित्तौड़गढ़ दुर्ग में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की खातेदारी भूमि पर किए गए बड़े अवैध कमर्शियल निर्माण पर रविवार को प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चला दिया। जिला कलेक्टर डॉ. मंजू के आदेश पर नगर परिषद, पुलिस और ASI की संयुक्त टीम ने करीब 0.14 हेक्टेयर भूमि पर बने दो मंजिला अवैध निर्माण को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।

अधिकारियों का दावा है कि राजस्थान में ASI की भूमि पर अतिक्रमण हटाने की यह अब तक की पहली बड़ी कार्रवाई है। निर्माणकर्ताओं ने न केवल विभागीय चेतावनियों की अनदेखी की, बल्कि दुर्ग क्षेत्र के ऐतिहासिक पत्थरों का उपयोग कर व्यावसायिक भवन खड़ा कर दिया था।

सुबह 4 बजे से संभाला मोर्चा

कार्रवाई को लेकर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहा। रविवार सुबह 4 बजे ही नगर परिषद, पुलिस और ASI की संयुक्त टीम दुर्ग पहुंच गई। सुरक्षा के मद्देनजर रामपोल से लेकर राणा रतन सिंह महल तक का मार्ग बंद कर दिया गया और वाहनों की आवाजाही रोक दी गई।

सुबह 5 बजे से अवैध निर्माण को गिराने की कार्रवाई शुरू हुई, जो कई घंटों तक चली।

9 जेसीबी और 5 ट्रैक्टर लगाए

करीब 0.14 हेक्टेयर ASI भूमि पर बने दो मंजिला ढांचे को हटाने के लिए प्रशासन को 9 जेसीबी और 5 ट्रैक्टर लगाने पड़े। भारी मशीनरी की सहायता से पूरे निर्माण को चरणबद्ध तरीके से तोड़ा गया और मलबे को ट्रैक्टरों के जरिए मौके से हटाया गया।

स्विमिंग पूल की भी थी तैयारी

जांच में सामने आया कि अवैध निर्माण परिसर में एक आलीशान स्विमिंग पूल बनाने के लिए गहरा गड्ढा भी खोदा गया था। दुर्ग तक निर्माण सामग्री पहुंचाने की कठिनाई से बचने के लिए निर्माणकर्ताओं ने खुदाई में निकले पत्थरों के साथ-साथ आसपास के ऐतिहासिक पत्थरों का भी इस्तेमाल किया।

इन्हीं पत्थरों से दो मंजिला व्यावसायिक इमारत तैयार की जा रही थी।

2024 में सामने आया था मामला

यह विवाद वर्ष 2024 में सामने आया था, जब ASI की जमीन पर निर्माण शुरू होने की जानकारी विभाग को मिली। विभाग ने कई बार नोटिस जारी कर निर्माण कार्य रोकने के निर्देश दिए, लेकिन चेतावनियों के बावजूद निर्माण जारी रहा।

बताया जा रहा है कि जमीन कई बार हाथ बदलती रही और वर्तमान में नीमच निवासी नीलेश भटनागर तथा अंकुर नामक व्यक्ति यहां निर्माण करवा रहे थे।

नोटिस और सुनवाई के बाद हुई कार्रवाई

ASI के डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑर्गेनिस्ट मनोज द्विवेदी ने बताया कि निर्माणकर्ताओं को कानूनी नोटिस जारी कर सुनवाई का पूरा अवसर दिया गया था। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने और अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद जिला प्रशासन को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

उन्होंने बताया कि निर्माणाधीन अतिक्रमणों पर जिला मजिस्ट्रेट कार्रवाई के आदेश दे सकते हैं, जबकि पूर्ण निर्मित भवनों पर ASI मुख्यालय और डायरेक्टर जनरल स्तर से अनुमति आवश्यक होती है।

विभागीय लापरवाही भी आई सामने

कार्रवाई के दौरान ASI की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हुए। जानकारी के अनुसार वर्ष 2004 में दुर्ग क्षेत्र में 64 व्यावसायिक अतिक्रमण चिन्हित किए गए थे, जो 2026 तक बढ़कर 69 हो गए।

चौंकाने वाली बात यह रही कि पिछले 22 वर्षों में विभाग केवल पांच नए अतिक्रमणों की पहचान कर पाया, जबकि हाल के वर्षों में कई अवैध कमर्शियल निर्माण खड़े हो गए।

हालांकि ASI ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 1992 से पहले बने आवासीय मकानों को ध्वस्त नहीं किया जाएगा, लेकिन नए और अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।

कार्रवाई के दौरान एडिशनल एसपी मुकुल शर्मा, डीएसपी बृजेश सिंह, कोतवाली थानाधिकारी तुलसीराम प्रजापत, सदर थानाधिकारी प्रेमचंद सहित नगर परिषद, पुलिस और ASI के अधिकारी मौजूद रहे।