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राजस्थान

"थार सुंदरी में 35 तोला सोने की चमक, मोटर मिस्त्री ने जीता थार-श्री का ताज"

Mohit Parihar 11 months ago
बाड़मेर: थार सुंदरी प्रतियोगिता में चमकी 35 तोला सोने की शान, मोटर मिस्त्री ने थार-श्री का ताज जीता बाड़मेर जिले के रेगिस्तानी इलाके में धूमधाम से आयोजित थार सुंदरी और थार-श्री प्रतियोगिता ने एक बार फिर स्थानीय संस्कृति और उत्साह की झलक पेश की। यह वार्षिक आयोजन, जो राजस्थान के थार मरुस्थल की जीवंत परंपराओं को दर्शाता है, इस बार खास तौर पर रोमांचक रहा, जहां पारंपरिक वेशभूषा, ऊंटों की रेस और सांस्कृतिक प्रदर्शनों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रतियोगिता का मुख्य आकर्षण थार सुंदरी रही, जिसमें एक प्रतिभागी ने पूरे 35 तोला सोना पहनकर सबका ध्यान खींचा, जबकि थार-श्री खिताब एक साधारण मोटर मिस्त्री के हाथ लगा। इसके अलावा, दादा-पोते की जोड़ी और एक दंपति ने ऊंटों की रेस में अपनी चपलता दिखाकर तालियां बटोरीं। थार सुंदरी: सोने की चमक और राजस्थानी ठाठ प्रतियोगिता का उद्घाटन थार सुंदरी इवेंट से हुआ, जो महिलाओं की पारंपरिक सजावट और सौंदर्य को श्रद्धांजलि अर्पित करता है। इसमें भाग लेने वाली महिलाएं घाघरा-चोली, ओढ़नी और आभूषणों से सजी हुईं, जो थार की रेत से प्रेरित रंग-बिरंगे डिजाइनों से जगमगा रही थीं। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा हुई एक युवती की, जिसने अपने पूरे शरीर पर करीब 35 तोला सोना ओढ़ा रखा था। यह सोना न सिर्फ हार-माला, बल्कि कंगन, पायल, बाजूबंद और तक कमरबंद के रूप में चमक रहा था, जो राजस्थान के अमीराना वैभव की याद दिलाता था। जजों ने उनकी सज्जा, मुस्कान और आत्मविश्वास को सराहते हुए उन्हें प्रथम स्थान प्रदान किया। यह विजेता न सिर्फ स्थानीय स्तर पर, बल्कि पूरे क्षेत्र में अपनी सादगी और पारंपरिक निखार के लिए जानी जाती हैं। आयोजकों के अनुसार, यह इवेंट महिलाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने का माध्यम बनता है, जहां आधुनिकता और पुरानी परंपराओं का संगम दिखता है। दर्शकों की भीड़ ने तालियों और नारों से उनका स्वागत किया, जो कार्यक्रम की जीवंतता को दर्शाता है। थार-श्री: साधारण पृष्ठभूमि से असाधारण जीत पुरुष वर्ग की थार-श्री प्रतियोगिता में भी उतना ही उत्साह देखने को मिला। यहां प्रतिभागियों को उनकी शारीरिक बनावट, पारंपरिक पोशाक और थार के कठोर जीवन से प्रेरित आत्मबल के आधार पर चुना गया। अप्रत्याशित रूप से, खिताब जीता एक मोटर मिस्त्री ने, जो रोजमर्रा में गाड़ियों की मरम्मत का काम करते हैं। इस व्यक्ति का नाम स्थानीय स्तर पर अब चर्चा का विषय बन चुका है, क्योंकि उन्होंने अपनी मजबूत कद-काठी और सादगी भरी मुस्कान से जजों को प्रभावित किया। वे पारंपरिक धोती-कुर्ता और पगड़ी में सजे हुए थे, जो थार के सूरज की तरह चमक रही थी। विजेता ने बताया कि यह जीत उनके परिवार और गांव वालों के लिए गर्व का क्षण है, और वे अब इस खिताब को गांव की समृद्धि के लिए इस्तेमाल करेंगे। यह घटना साबित करती है कि थार-श्री सिर्फ बाहरी दिखावे का नहीं, बल्कि आंतरिक शक्ति का प्रतीक है। ऊंटों की रेस: पारिवारिक बंधन की मिसाल कार्यक्रम का सबसे रोमांचक हिस्सा ऊंटों की रेस रहा, जहां थार के इन 'रेगिस्तानी जहाजों' ने रेत पर उड़ान भरी। यहां पारिवारिक जोड़ियों ने हिस्सा लिया, जो उत्सव को और भी भावुक बना दिया। एक तरफ दादा-पोते की जोड़ी ने सबको हैरान कर दिया – बुजुर्ग दादाजी की अनुभवी सलाह और नौजवान पोते की तेजी ने उन्हें दूसरे स्थान पर पहुंचा दिया। दादाजी ने साझा किया कि यह रेस उनके लिए न सिर्फ खेल, बल्कि आने वाली पीढ़ी को थार की विरासत सौंपने का तरीका है। वहीं, एक पति-पत्नी की जोड़ी ने अपनी तालमेल भरी सवारी से पहला स्थान हासिल किया। पत्नी ने ऊंट को संभाला, जबकि पति ने दिशा निर्देश दिए, जो वैवाहिक जीवन की एकता का प्रतीक बन गया। रेस के दौरान धूल उड़ती रही और दर्शक सांसें थामे देखते रहे। आयोजकों ने इन जोड़ियों को विशेष पुरस्कार देकर सम्मानित किया, जो पारिवारिक मूल्यों को बढ़ावा देने का संदेश देता है। आयोजन का महत्व और भविष्य यह पूरा आयोजन बाड़मेर के एक प्रमुख मेले के हिस्से के रूप में हुआ, जहां हजारों लोग इकट्ठा हुए। स्थानीय कलाकारों के लोक नृत्य, संगीत और हस्तशिल्प स्टॉल ने माहौल को और रंगीन बना दिया। जिला प्रशासन और सांस्कृतिक संगठनों के सहयोग से चले इस कार्यक्रम ने पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे इवेंट थार की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अगले साल के लिए आयोजक और बड़े पैमाने पर योजना बना रहे हैं, जिसमें अधिक अंतरराष्ट्रीय भागीदारी की उम्मीद है।
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