नेपाल और तिब्बत की सीमा पर बुधवार सुबह कुदरत ने भीषण तबाही मचाई। पहाड़ दरकने और ग्लेशियर टूटने की वजह से आई अचानक बाढ़ (Flash Flood) में अब तक 168 लोगों की जान जा चुकी है। इस भयानक त्रासदी में 1,400 से ज्यादा लोग लापता हैं, जिनमें 300 से अधिक भारतीय नागरिक शामिल हैं। बाढ़ का वेग इतना तेज था कि नेपाल के कई राजमार्ग तबाह हो गए और सैकड़ों गाड़ियां पानी में समा गईं।

कैलाश मानसरोवर यात्रियों समेत 300 से ज्यादा भारतीय लापता

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के मुताबिक, नेपाल में लापता 826 लोगों में 300 से अधिक भारतीय हैं। खराब मौसम और टूटे संपर्क मार्गों के कारण इन तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है।

  • कोलकाता का जत्था: कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कोलकाता के 32 लोगों (30 पर्यटक और 2 मैनेजर) का समूह लापता है। यह दल रसुवागढ़ी इमिग्रेशन ऑफिस में था, तभी यह हादसा हुआ।

  • ईशा फाउंडेशन और तमिलनाडु के यात्री: कोयंबटूर के ईशा फाउंडेशन के 77 लोगों से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा, तमिलनाडु के 37 पर्यटकों का भी कोई सुराग नहीं है, जो बाढ़ के वक्त एक मंदिर की ओर जा रहे थे। चितवन में त्रिशूली और नारायणी नदियों से अब तक 64 शव या शरीर के अंग बरामद किए गए हैं, जिन्हें भरतपुर अस्पताल भेजा गया है।

भूकंप नहीं, पहाड़ दरकने से मची तबाही

बुधवार सुबह 8:37 बजे नेपाल-चीन सीमा पर तेज झटके महसूस किए गए थे। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने पहले इसे 4.4 तीव्रता का भूकंप माना था, लेकिन बाद में स्पष्ट किया कि यह कोई भूकंप नहीं था। दरअसल, पहाड़ का एक विशाल हिस्सा बर्फ और चट्टानों के साथ टूटकर भोटेकोशी की सहायक नदी 'ल्हेंदे खोला' में गिर गया। यह भूस्खलन इतना शक्तिशाली था कि इससे 5.2 तीव्रता के भूकंप के बराबर कंपन पैदा हुआ। वैज्ञानिकों को आशंका है कि यह GLOF (ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड) की घटना हो सकती है, जो ठीक वैसी ही है जैसी 2013 में केदारनाथ (चोराबाड़ी ताल) में देखने को मिली थी।

यूपी-बिहार में हाई अलर्ट, गंडक नदी में उफान की आशंका

नेपाल में आई इस बाढ़ का सीधा असर भारत पर भी पड़ रहा है। नेपाल का पानी त्रिशूली नदी से होते हुए भारत में गंडक और उससे जुड़ी नदियों तक पहुंचेगा। इसके चलते करीब 3 मीटर ऊंची लहरें आने (फ्लड वेव) का अलर्ट जारी किया गया है। बिहार के पश्चिमी और पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर जिलों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। वहीं, उत्तर प्रदेश के महराजगंज और कुशीनगर में भी प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है।

रेस्क्यू ऑपरेशन तेज, 10 टन मदद के साथ खड़ा हुआ भारत

नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल के निर्देश पर प्रधानमंत्री बालेन शाह ने राहत-बचाव के लिए पूरी सरकारी मशीनरी झोंक दी है।

  • हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू: दुर्गम रास्तों को देखते हुए नेपाल सरकार ने 30 हेलीकॉप्टर रेस्क्यू में लगाए हैं, जबकि 20 को स्टैंडबाय पर रखा है।

  • सफल बचाव: नेपाली सेना ने रसुवा के टिमुरे से 116 लोगों (95 नेपाली, 21 भारतीय) और एक सुरंग में फंसे 7 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया है।

  • भारत की मदद: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि भारत ने पड़ोसी धर्म निभाते हुए 10 टन मानवीय सहायता और जरूरी दवाइयां नेपाल भेजी हैं।

चीन की सफाई- 'हमने नहीं छिपाई कोई जानकारी'

इस जलप्रलय के बाद नेपाल में यह आरोप लग रहे थे कि चीन ने समय रहते बाढ़ की चेतावनी नहीं दी। हालांकि, नेपाल में स्थित चीनी दूतावास ने इन दावों को भ्रामक बताया है। चीन का कहना है कि उन्होंने कोई भी जानकारी नहीं छिपाई है और इस प्राकृतिक आपदा के लिए उन पर आरोप लगाना पूरी तरह गलत है। फिलहाल, भूस्खलन के कारण 800 से 1,000 गाड़ियां (जिनमें 300 यात्री बसें शामिल हैं) फंसी हुई हैं और गोसाईंकुंड गई करीब 20 बसों से भी संपर्क टूटा हुआ है।