राजस्थान में इस साल मानसून की धीमी चाल ने भविष्य के लिए एक बड़े जल संकट की घंटी बजा दी है। मानसून सीजन के लगभग 70 दिन बीत जाने के बाद भी प्रदेश में उम्मीद के मुताबिक बारिश नहीं हुई है। इसका सीधा असर राज्य के जलस्रोतों पर पड़ा है। हालात यह हैं कि प्रदेश के 23 प्रमुख बांध अभी भी प्यासे हैं और राज्य के सभी बांधों में औसत रूप से केवल 64 प्रतिशत पानी ही आ पाया है।
अब प्रदेशवासियों और किसानों की निगाहें केवल सितंबर के महीने पर टिकी हैं। अगर मौसम विभाग के अनुमानों से परे कोई 'चमत्कार' नहीं हुआ, तो आगामी गर्मियों में भारी जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
जयपुर की लाइफलाइन 'बीसलपुर बांध' की स्थिति चिंताजनक
राजधानी जयपुर सहित कई जिलों की प्यास बुझाने वाले बीसलपुर बांध की स्थिति इस बार चिंता का विषय बनी हुई है। आमतौर पर अगस्त महीने में लबालब हो जाने वाला यह बांध अभी भी अपनी पूर्ण क्षमता से डेढ़ मीटर खाली है।
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जलस्तर के ताजा आंकड़े: बांध की कुल भराव क्षमता 315.50 आरएल मीटर है, जबकि बुधवार सुबह 6 बजे तक इसका जलस्तर 314.09 आरएल मीटर ही दर्ज किया गया है।
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घटी पानी की आवक: चिंता की बात यह है कि 19 अगस्त से 25 अगस्त के बीच बांध में पानी की आवक लगभग नगण्य रही। सात दिनों के लंबे इंतजार के बाद बुधवार को जलस्तर में मात्र 4 सेंटीमीटर की मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई। मौजूदा समय में बीसलपुर बांध केवल 73.98 प्रतिशत ही भरा है।
प्रदेश के 205 बांध पूरी तरह सूखे
राजस्थान के कुल 693 छोटे-बड़े बांधों के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति और भी स्पष्ट हो जाती है:
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पूरी तरह भरे (ओवरफ्लो): केवल 43 बांध।
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आंशिक रूप से भरे: 445 बांध।
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पूरी तरह खाली: 205 बांध पानी की एक बूंद को तरस रहे हैं।
प्रमुख बांधों का जलस्तर (प्रतिशत में):
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कोटा बैराज: 96.59%
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राणा प्रताप सागर: 70.82%
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जवाहर सागर: 70.62%
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माही बजाज सागर: 58.54%
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ईसरदा बांध: 41.22%
संभागवार स्थिति: बांसवाड़ा में राहत, जोधपुर में सबसे ज्यादा सूखा
प्रदेश के अलग-अलग संभागों में बारिश का असर भी अलग-अलग देखने को मिला है। बांसवाड़ा संभाग की स्थिति सबसे बेहतर है, जबकि जोधपुर में सबसे कम पानी जमा हुआ है:
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बांसवाड़ा: 63 बांधों में सबसे अधिक 98.24% जलभराव।
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कोटा: 81 बांधों में 70.93% जलभराव।
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जयपुर: 186 बांधों में 55.93% जलभराव।
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भरतपुर: 68 बांधों में 46.41% जलभराव।
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उदयपुर: 178 बांधों में 44.49% जलभराव।
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जोधपुर: 117 बांधों में मात्र 18.10% जलभराव।
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में मानसून की सक्रियता को लेकर जो संकेत मिल रहे हैं, वे बहुत ज्यादा उत्साहजनक नहीं हैं। चूंकि राजस्थान में सितंबर तक ही मानसूनी गतिविधियां मानी जाती हैं, इसलिए अब बचे हुए कुछ हफ्तों की बारिश पर ही पूरे प्रदेश का भविष्य निर्भर करेगा। यदि अच्छी बारिश नहीं होती है, तो प्रशासन को जल प्रबंधन के लिए अभी से कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं।