समुद्र की शांत लहरें, मंजिल की तरफ बढ़ता एक बड़ा पानी का जहाज और उसमें सवार सैकड़ों बेफिक्र मुसाफिर... किसी ने सोचा भी नहीं था कि कुछ ही मिनटों में यह खुशनुमा सफर एक भयानक खौफनाक मंजर में बदल जाएगा। रविवार की सुबह जब ज्यादातर लोग गहरी नींद में थे, तभी समुद्र के बीचों-बीच अचानक आग की लपटें उठने लगीं और देखते ही देखते चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। यह दर्दनाक हादसा इंडोनेशिया के मदुरा द्वीप के पास हुआ। पूर्वी जावा प्रांत के सुराबाया से दक्षिण सुलावेसी के मकासर जा रही इस फेरी में 271 लोग सवार थे, जिनमें यात्री और क्रू मेंबर्स शामिल थे।
जान बचाने के लिए समंदर में कूदने लगे लोग
जहाज में आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। धुएं के भयानक गुबार और उठती लपटों के बीच यात्रियों में भगदड़ मच गई। जान बचाने की होड़ में कई लोग बिना सोचे-समझे सीधे गहरे समुद्र में छलांग लगाने लगे। हादसे की सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीमें मौके पर पहुँचीं और राहत कार्य शुरू किया गया। अधिकारियों के मुताबिक अब तक 5 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 225 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। वहीं 41 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश में बचाव दल लगातार समंदर की खाक छान रहे हैं।
क्या आग के पीछे कोई बड़ी लापरवाही थी?
हादसे के कई घंटे बीत जाने के बाद भी यह साफ नहीं हो सका है कि आखिर इतनी बड़ी फेरी में अचानक इतनी भयानक आग लगी कैसे? क्या इंजन में कोई तकनीकी खराबी आई थी, या फिर सुरक्षा मानकों में कोई बड़ी लापरवाही बरती गई? बचाव दल लगातार लापता 41 लोगों को तलाशने में जुटे हैं, लेकिन समंदर की तेज लहरों के बीच वक्त बीतने के साथ उम्मीदें भी धुंधली पड़ती जा रही हैं। क्या लापता यात्रियों को सकुशल निकाला जा पाएगा, या फिर मौतों का यह आंकड़ा और भयानक रूप लेगा? जांच एजेंसियां अब इस पूरे हादसे के पीछे की असली वजह की तहकीकात में जुट गई हैं।