बिहार की राजधानी पटना से एक ऐसी भावुक कर देने वाली तस्वीर सामने आई है, जो हमारे समाज की चकाचौंध और उसकी आड़ में छिपी कड़वी सच्चाई को उजागर करती है। अवसर था देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन का, जहां जश्न मनाने के लिए हजारों दीये रोशन किए गए। लेकिन इस उत्सव की रोशनी के बीच एक मासूम बच्ची की बेबसी ने वहां मौजूद हर शख्स को अंदर तक झकझोर कर रख दिया।
जश्न के बाद दिखी मुफलिसी की हकीकत
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीएम मोदी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में पटना के व्यस्ततम इनकम टैक्स चौराहे पर 'आशीर्वाद का दीया' नामक एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस दौरान चौराहे को हजारों मिट्टी के दीपों से सजाया गया। जब कार्यक्रम संपन्न हुआ और लोग वहां से चले गए, तब वहां एक अलग ही नजारा देखने को मिला। एक छोटी सी बच्ची अपने हाथों में एक खाली प्लास्टिक की बोतल लिए वहां पहुंची। वह बुझ चुके दीयों के पास बैठ गई और उनमें बचा हुआ थोड़ा-थोड़ा तेल बड़ी ही सावधानी से अपनी बोतल में इकट्ठा करने लगी।
"इसी तेल से कुछ दिन पकेगा घर का खाना...
" एक-एक बूंद तेल बटोरती उस बच्ची को देखकर वहां मौजूद कुछ लोगों का दिल पसीज गया। जब उससे पूछा गया कि वह यह बचा हुआ तेल क्यों जमा कर रही है, तो उसके जवाब ने सभी की आंखें नम कर दीं। बच्ची ने बड़ी ही मासूमियत से बताया कि वह इस तेल को घर ले जाएगी और इसी से उसके घर का खाना बनेगा। इस तेल से कुछ दिनों तक उसके घर का चूल्हा जल सकेगा। इतनी भीषण गरीबी और मजबूरी के बावजूद, उस बच्ची के चेहरे पर कोई शिकायत नहीं थी और उसने अपनी तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं भी दीं।
रोशनी के नीचे दबा हुआ गहरा अंधेरा
यह वाकया महज एक घटना नहीं, बल्कि सिस्टम और समाज पर एक बड़ा सवाल है। एक तरफ वह जगमगाता हुआ चौराहा था, जो किसी बड़े उत्सव की गवाही दे रहा था, तो दूसरी तरफ उसी जगह पर एक बच्ची चंद बूंद खाद्य तेल के लिए संघर्ष कर रही थी। इस दृश्य ने यह साबित कर दिया कि जिस दीये की रोशनी किसी के लिए महज एक उत्सव का हिस्सा है, उसी दीये का बचा हुआ तेल किसी गरीब के लिए दो वक्त की रोटी की उम्मीद बन सकता है।
गरीबी और जरूरत की इस तस्वीर ने हर किसी को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि विकास के दावों के बीच इस तरह की मुफलिसी आखिर कब तक हमारे समाज का हिस्सा बनी रहेगी।