राजस्थान के नागौर जिले में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) द्वारा आयोजित जन आक्रोश रैली ने सोमवार को ऐतिहासिक रूप ले लिया। भारी बारिश के पूर्वानुमान के बावजूद हजारों लोग पशु प्रदर्शनी स्थल पर जनसैलाब के रूप में एकत्रित हुए और आरएलपी प्रमुख व नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के नेतृत्व में प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोला। लगभग 14 घंटे तक चले इस धरने के बाद रात 2:05 बजे जिला कलेक्टर मंच पर पहुंचे और मांगों पर सहमति बनने के बाद रात 2:15 बजे धरना समाप्त कर दिया गया।
आरएलपी कार्यकर्ताओं और समर्थकों का आरोप था कि नागौर जिले में प्रशासन और पुलिस द्वारा जनहित से जुड़े मुद्दों की लगातार अनदेखी की जा रही है। किसानों, युवाओं और आम जनता से संबंधित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही थी। पार्टी ने दावा किया कि जनता की आवाज को दबाया जा रहा है और प्रशासन निष्पक्ष कार्यवाही करने में विफल रहा है। इस रैली का उद्देश्य इन मुद्दों को उजागर करना और प्रशासन को त्वरित कार्रवाई के लिए मजबूर करना था।
दिनभर का घटनाक्रम
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सुबह: रैली की शुरुआत सुबह 11:15 बजे से हुई, जिसमें ग्रामीण, किसान, महिलाएं और युवा बड़ी संख्या में शामिल हुए। नागौर जिला मुख्यालय पर लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
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शाम 7:30 बजे: धरना स्थल पर भीड़ और तेज हो गई। विभिन्न जिलों से आए आरएलपी कार्यकर्ताओं ने मोर्चा संभाला और मंच से नेताओं ने प्रशासन के खिलाफ तीखे भाषण दिए। हनुमान बेनीवाल ने जनता के हक की लड़ाई को और तेज करने का आह्वान किया।
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रात 2:05 बजे: लंबे इंतजार के बाद जिला कलेक्टर, जिला परिषद के सीईओ और अन्य अधिकारियों ने धरना स्थल पर पहुंचकर वार्ता की। मंच से मांगों पर सहमति की घोषणा की गई, जिसके बाद रात 2:15 बजे धरना समाप्त हुआ।
प्रमुख मांगें और प्रशासन की सहमति
रैली और धरने के दौरान आरएलपी ने निम्नलिखित प्रमुख मांगें उठाईं, जिन पर प्रशासन ने सहमति जताई:
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किसानों की समस्याओं का त्वरित समाधान: रास-मेड़ता और मेड़ता-पुष्कर रेलवे लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा और पुनर्वास।
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युवाओं के रोजगार में पारदर्शिता: भर्ती प्रक्रियाओं में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना।
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एसआई और शिक्षक भर्ती में अनियमितताओं की जांच: 29 साल पुराने शिक्षक भर्ती मामले और 2021 की एसआई भर्ती में कथित अन्यायों की उच्च स्तरीय जांच।
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थानों में निष्पक्ष कार्रवाई: पुलिस थानों में जनता के साथ निष्पक्ष व्यवहार और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की मांग।
बड़ी हस्तियों का समर्थन
रैली में पूर्व विधायक नारायण बेनीवाल भी शामिल हुए, जिन्होंने प्रशासन से जवाब तलब करने के लिए पुरानी एफआईआर की प्रतियां प्रस्तुत कीं। इसके अलावा, जाट समाज, बंजारा समाज और अन्य समुदायों के नेताओं ने भी इस आंदोलन को समर्थन दिया। हनुमान बेनीवाल ने इस अवसर पर कहा, "यह आंदोलन केवल एक पार्टी का नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति का है जो अपने हक के लिए लड़ रहा है।"
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
हनुमान बेनीवाल ने धरने के दौरान कांग्रेस और बीजेपी दोनों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस को "गूंगी और बहरी" करार देते हुए कहा कि वह जनता की आवाज नहीं सुन रही। साथ ही, उन्होंने बीजेपी और प्रशासन पर जनता के हितों की अनदेखी का आरोप लगाया। बेनीवाल ने स्पष्ट किया, "यह आंदोलन आम जनता के हक के लिए है, न कि किसी राजनीतिक लाभ के लिए।" उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
रैली में शामिल लोगों ने हनुमान बेनीवाल के नेतृत्व की सराहना की। स्थानीय निवासी और कार्यकर्ता लाडू गोदारा ने सोशल मीडिया पर लिखा, "यह जन आक्रोश रैली एक जन आंदोलन के रूप में नई चेतना थी। यह नागौर के जुझारू किसानों और जागरूक नौजवानों की एकजुटता की मिसाल है।"