हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर में कई ऐसे महान कलाकार और गायक हुए हैं, जिनकी कला के साथ-साथ उनके जीवन के किस्से भी बेहद मशहूर हैं। फिल्मी दुनिया की चकाचौंध के पीछे कई ऐसी अनसुनी कहानियां छिपी हैं, जो आज भी फैंस को हैरान कर देती हैं। ऐसी ही एक बेहद दिलचस्प कहानी बॉलीवुड के लेजेंडरी सिंगर के एल सहगल (K. L. Saigal) और मशहूर संगीतकार नौशाद अली (Naushad Ali) से जुड़ी है।

यह तो कई लोग जानते हैं कि सहगल साहब अपनी बेहतरीन गायकी के लिए जाने जाते थे, लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि वो कभी भी 'दो पेग' शराब पिए बिना अपना कोई गाना रिकॉर्ड नहीं करते थे। आइए जानते हैं कि कैसे बॉलीवुड के 'तानसेन' कहे जाने वाले नौशाद साहब ने सहगल जी से बिना शराब पिए गाना गवा लिया था।

'शाहजहां' की रिकॉर्डिंग और पेग का सिलसिला

यह वाकया फिल्म ‘शाहजहां’ (Shahjehan) के गानों की रिकॉर्डिंग के दौरान का है। सहगल साहब और नौशाद अली रिहर्सल के लिए स्टूडियो में मिले। कुछ देर प्रार्थना करने के बाद सहगल साहब अपनी चटाई पर बैठ गए और अपने ड्राइवर की तरफ एक खास इशारा किया। इशारा मिलते ही ड्राइवर तुरंत विस्की की एक बोतल ले आया और पेग बनाकर सिंगर के हाथ में थमा दिया।

यह नजारा देखकर नौशाद अली थोड़े हैरान हुए और उन्होंने पूछ लिया, "यह क्या है?" सहगल साहब ने बड़े इत्मीनान से जवाब दिया कि वो हमेशा इसी के साथ रिकॉर्डिंग करते हैं, क्या आपको कोई ऐतराज है? नौशाद जी ने सम्मान के साथ कहा, "जी नहीं, आप शौक फरमाएं।"

पहला टेक शुरू हुआ और खत्म होने तक सहगल साहब का पहला पेग भी खत्म हो गया। लेकिन नौशाद उस टेक से संतुष्ट नहीं थे, इसलिए उन्होंने दूसरा टेक लिया। इसके साथ ही दूसरा पेग भी बन गया। टेक पर टेक होते रहे और पेग भी बनते रहे, लेकिन गाना फाइनल ही नहीं हो पा रहा था। ज्यादा शराब पीने की वजह से सहगल साहब के सुर भटकने लगे थे। शाम 6 बजे से रिकॉर्डिंग शुरू हुई थी और सुबह के 4 बज गए, मगर नतीजा सिफर रहा। आखिरकार, नौशाद साहब ने पैक-अप की घोषणा करते हुए कहा कि म्यूजिशियन थक गए हैं, अब हम यह गाना आज शाम को रिकॉर्ड करेंगे।

संगीतकार नौशाद की जिद और एक अनोखी शर्त

उसी दिन शाम को जब सहगल साहब दोबारा स्टूडियो पहुंचे, तो नौशाद अली ने उनके सामने एक अजीब गुजारिश रख दी। उन्होंने कहा, "आज आप यह गाना बिना शराब पिए गा दीजिए।" यह सुनते ही सहगल साहब हैरान रह गए और बोले, "आप ये क्या कह रहे हैं? मैं तो बिना पिए गा ही नहीं सकता!"

लेकिन नौशाद साहब भी अपनी बात पर अड़ गए। उन्होंने जिद की कि बस एक टेक बिना शराब के गाकर देख लीजिए। संगीतकार की इस जिद के आगे सहगल साहब को झुकना पड़ा, लेकिन उन्होंने भी एक शर्त रख दी। उन्होंने कहा, "ठीक है, मैं एक टेक बिना पिए दूंगा और दूसरा टेक पीकर। दोनों में से जो बेहतर होगा, वही फिल्म में रखा जाएगा।" नौशाद तुरंत इस बात के लिए राजी हो गए।

जब खुद सहगल ने चुनी बिना शराब वाली रिकॉर्डिंग

अगले दिन जब दोनों की दोबारा मुलाकात हुई, तो नौशाद साहब ने सहगल जी को दोनों रिकॉर्डेड टेक सुनवाए। दोनों टेक ध्यान से सुनने के बाद जब चुनने की बारी आई, तो सहगल साहब ने जिस टेक को फाइनल किया, वह वही था जो उन्होंने पूरी तरह से होश में, बिना शराब पिए गाया था।

यह किस्सा न सिर्फ नौशाद अली की संगीत के प्रति उनकी समझ को दर्शाता है, बल्कि के एल सहगल की महानता को भी साबित करता है, जिन्होंने अपनी कला को पहचाना और सही फैसले को चुना। आज भी जब इस गाने को सुना जाता है, तो इसके पीछे की यह कहानी जहन में ताजा हो जाती है।