राजस्थान सरकार ने हाल ही में बाड़मेर और बालोतरा जिलों की प्रशासनिक सीमाओं में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। 31 दिसंबर 2025 को जारी एक आदेश के आधार पर अधिसूचना जारी की गई, जिसमें बाड़मेर जिले के दो उपखंडों — गुड़ामालानी और धोरीमन्ना — को बालोतरा जिले में शामिल कर दिया गया है। वहीं, बालोतरा जिले के बायतु उपखंड को बाड़मेर जिले में स्थानांतरित कर दिया गया है। इस बदलाव से दोनों जिलों की प्रशासनिक संरचना में बदलाव आया है, जिससे लोगों की सुविधा और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने का उद्देश्य बताया जा रहा है।अधिसूचना जारी होने के बाद बालोतरा क्षेत्र में लोगों ने खुशी जताई और पटाखे फोड़े, जबकि कुछ क्षेत्रों में इस बदलाव को लेकर अंदरूनी विरोध भी सामने आ रहा है। खासकर धोरीमन्ना में, जहां जिला मुख्यालय (बालोतरा) से दूरी पहले बाड़मेर से करीब 60 किमी थी, अब बढ़कर लगभग 125 किमी हो गई है। इससे स्थानीय लोगों को प्रशासनिक कार्यों में अधिक यात्रा करनी पड़ेगी, जिसे लेकर असंतोष व्यक्त किया जा रहा है।
बालोतरा जिले की नई संरचना इस पुनर्गठन के बाद बालोतरा जिले में उपखंडों की संख्या बढ़कर 5 हो गई है। पहले यहां 4 उपखंड थे (बालोतरा, सिणधरी, सिवाना और बायतु), लेकिन बायतु को हटाने और गुड़ामालानी तथा धोरीमन्ना को जोड़ने से नई व्यवस्था बनी है।उपखंड (Sub-divisions):बालोतरा,सिणधरी,सिवाना,गुड़ामालानी,धोरीमन्ना।तहसीलें (Tehsils):पचपदरा,कल्याणपुर,गिड़ा,पाटोदी,सिणधरी,सिवाना,समदड़ी,धोरीमन्ना,गुड़ामालानी।उप-तहसीलें (Sub-tehsils):जसोल,दूदवा,सवाऊ पदमसिंह की ढाणी,हीरा की ढाणी,पादरू। कुल मिलाकर बालोतरा जिले में अब 9 तहसीलें और 5 उप-तहसीलें हो गई हैं।
बाड़मेर जिले की नई संरचना बाड़मेर जिले में अब उपखंडों की संख्या 7 हो गई है। बायतु के शामिल होने से यहां प्रशासनिक इकाइयां बढ़ी हैं।उपखंड (Sub-divisions):गडरा रोड,चौहटन,रामसर,बायतु,सेड़वा,शिव,बाड़मेर (मुख्य)।तहसीलें (Tehsils):बाड़मेर,बाड़मेर ग्रामीण,बाटाडू,नोखड़ा,गडरा रोड,चौहटन,धनाऊ,रामसर,बायतु,सेड़वा,शिव।उप-तहसीलें (Sub-tehsils):विशाला,चवा,मांगता,हरसाणी,लीलसर,फागलिया,भीयाड़।इसके साथ बाड़मेर जिले में 11 तहसीलें और 7 उप-तहसीलें रह गई हैं।
पृष्ठभूमि और प्रभाव बालोतरा को मूल रूप से 2023 में बाड़मेर से अलग कर नया जिला बनाया गया था, जिसमें मुख्य रूप से टेक्सटाइल उद्योग और पचपदरा रिफाइनरी क्षेत्र शामिल थे। यह बदलाव प्रशासनिक सुविधा के लिए किया गया था। अब यह पुनर्गठन दोनों जिलों की भौगोलिक और जनसंख्या संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया लगता है। हालांकि, धोरीमन्ना और गुड़ामालानी जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में दूरी बढ़ने से स्थानीय लोग असुविधा महसूस कर रहे हैं। दूसरी ओर, बालोतरा क्षेत्र में इस बदलाव को सकारात्मक माना जा रहा है, क्योंकि इससे जिले का विस्तार हुआ है।