“मजदूर अपनी जमीन पर मजदूरी मांग रहे हैं, ये उनका हक है” — रविंद्र सिंह भाटी

बाड़मेर। राजस्थान के बाड़मेर जिले के शिव विधानसभा क्षेत्र के गिरल गांव में चल रहा 55 दिनों पुराना मजदूर आंदोलन आखिरकार सहमति बनने के बाद समाप्त हो गया। यह धरना राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड (RSMML) की लिग्नाइट माइंस से जुड़ी मांगों को लेकर चल रहा था।

इस पूरे आंदोलन के दौरान शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी लगातार मजदूरों के समर्थन में नजर आए। उन्होंने कहा कि मजदूरों की मांगें पूरी तरह से जायज थीं और यदि उन्हें समय पर सुना गया होता तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।

धरने के दौरान एक मजदूर की मौत ने बढ़ाया तनाव

धरने के बीच आंदोलनकारी मजदूर जैसाराम की तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई थी, जिससे माहौल और अधिक संवेदनशील हो गया। इसके बाद प्रशासन और प्रतिनिधियों के बीच वार्ताओं का दौर तेज हुआ।

भाटी ने बताया कि इस घटना के बाद उनकी पहली प्राथमिकता मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता दिलाना रही। उन्होंने अपने विधायक कोष से 10 लाख रुपये की सहायता, परिवार को आवास और तीन लोगों को नौकरी देने पर सहमति की जानकारी दी।

55 दिन बाद बनी सहमति, धरना समाप्त

विधायक के अनुसार, 24 सूत्री मांगों को लेकर सरकार, प्रशासन और मजदूर प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई। अंतिम वार्ता सर्किट हाउस में हुई, जिसमें सभी पक्षों की सहमति बनने के बाद धरना समाप्त करने का निर्णय लिया गया।

उन्होंने बताया कि एक महीने बाद इन मांगों की रिव्यू मीटिंग भी होगी, ताकि जमीनी स्तर पर काम की स्थिति की समीक्षा की जा सके।

“मजदूरों की अनदेखी सबसे बड़ी गलती” — भाटी

रविंद्र सिंह भाटी ने कहा कि मजदूरों की समस्याओं को नजरअंदाज करना सबसे बड़ी भूल होती है। उन्होंने कहा कि—

उन्होंने प्रशासन और सरकार से अपील की कि गरीब, वंचित और श्रमिक वर्ग की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।

“राजनीति नहीं, समाधान जरूरी”

धरने के दौरान राजनीतिक दखल के सवाल पर भाटी ने कहा कि ऐसे मामलों में राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह समय समाधान का है, न कि आरोप-प्रत्यारोप का।

आगे क्या होगा?

भाटी ने साफ कहा कि यदि मजदूर उन्हें दोबारा बुलाते हैं तो वह फिर से उनके साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने इसे अपनी “नैतिक जिम्मेदारी और कर्तव्य” बताया।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सभी मांगों पर जमीन पर काम सुनिश्चित किया जाएगा और यदि जरूरत पड़ी तो फिर से आंदोलन का हिस्सा बनने से पीछे नहीं हटेंगे।