बिहार के भोजपुर जिले में भरत भूषण तिवारी के कथित एनकाउंटर मामले ने नया मोड़ ले लिया है। एक ओर मृतक का परिवार पुलिस और न्यायिक जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर इस मामले में आयोजित महापंचायत के दौरान विवादित बयान देने वाले मोतिहारी के कॉन्स्टेबल आशीष कुमार तिवारी को निलंबित कर दिया गया है।
परिवार ने पुलिस सुरक्षा लेने से किया इनकार
मृतक के पिता काशीनाथ तिवारी ने पुलिस द्वारा सुरक्षा देने के प्रस्ताव को ठुकराते हुए कहा कि उन्हें पुलिस पर भरोसा नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि एनकाउंटर के सात दिन बाद पुलिस अधिकारी आधी रात को उनके घर पहुंचे, जिससे उनकी नीयत पर संदेह पैदा होता है।
काशीनाथ तिवारी ने कहा कि यदि पुलिस दिन में आ सकती थी तो रात 12 बजे आने की क्या जरूरत थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बिना वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति के ऐसी कार्रवाई संभव नहीं होती और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
FIR से नाम हटाने पर लिखित आदेश की मांग
गांव वालों के खिलाफ दर्ज FIR से नाम हटाने के पुलिस के दावे पर भी परिवार ने सवाल उठाए। काशीनाथ तिवारी ने कहा कि केवल मौखिक आश्वासन पर्याप्त नहीं है। प्रशासन को लिखित आदेश जारी करना चाहिए, तभी उन्हें भरोसा होगा कि निर्दोष लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी।
भाई ने SP पर लगाए धमकी देने के आरोप
मृतक के छोटे भाई चंदन तिवारी ने आरोप लगाया कि जिले के पुलिस अधीक्षक ने उन्हें आंदोलन बंद करने की चेतावनी दी और भाई जैसा अंजाम भुगतने की धमकी दी। उनका कहना है कि यदि जांच के आदेश दिए जा चुके हैं तो ऐसे में वरिष्ठ अधिकारी द्वारा इस तरह का व्यवहार जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है।
मां और भाभी ने भी जताया अविश्वास
मृतक की मां आशा देवी ने कहा कि उन्हें मौजूदा जांच प्रक्रिया पर भरोसा नहीं है और वह केवल निष्पक्ष जांच के जरिए न्याय चाहती हैं। वहीं भाभी सुमन तिवारी ने आरोप लगाया कि जिन अधिकारियों पर सवाल उठ रहे हैं, उन्हीं के अधीन जांच कराई जा रही है, जिससे निष्पक्षता पर संदेह पैदा होता है।
'दूसरा भरत तिवारी' बयान पर कॉन्स्टेबल सस्पेंड
भरत तिवारी के समर्थन में आयोजित महापंचायत में मोतिहारी के कॉन्स्टेबल आशीष कुमार तिवारी ने कहा था कि यदि न्याय नहीं मिला तो वह "दूसरा भरत तिवारी" बनेंगे। इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूर्वी चंपारण पुलिस ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी।
पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया पर दिए गए उनके बयान बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली का उल्लंघन हैं और यह विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला आचरण माना गया।
पुराने मामलों का भी किया गया उल्लेख
निलंबन आदेश में आशीष तिवारी के पूर्व सेवा रिकॉर्ड का भी उल्लेख किया गया है। पुलिस के अनुसार, वर्ष 2023 में उन पर ड्यूटी के दौरान एक होमगार्ड जवान पर चाकू से हमला करने का आरोप लगा था। वहीं 2024 में उन पर सर्विस पिस्तौल से चौकीदार पर गोली चलाने और एक सब-इंस्पेक्टर पर हथियार तानने का मामला भी दर्ज हुआ था। इन मामलों में उनके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई पहले से चल रही है।
जांच जारी
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में पुलिस और न्यायिक स्तर पर जांच जारी है। परिवार लगातार स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है, जबकि पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।