हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और राजनेता राज बब्बर आज अपना 74वां जन्मदिन मना रहे हैं। चार दशक से अधिक लंबे करियर में उन्होंने हीरो, विलेन और चरित्र अभिनेता के रूप में कई यादगार भूमिकाएं निभाईं, लेकिन उनकी निजी जिंदगी भी हमेशा सुर्खियों में रही। एक समय ऐसा भी आया जब उनके अभिनय ने लोगों को उनसे नफरत करने पर मजबूर कर दिया और उनकी मां तक रो पड़ी थीं।
जब विलेन बने और लोगों की नफरत झेलनी पड़ी
साल 1980 में बी.आर. चोपड़ा की फिल्म ‘इंसाफ का तराजू’ रिलीज हुई। फिल्म में राज बब्बर ने रेपिस्ट रमेश गुप्ता का किरदार निभाया था। उस दौर के बड़े अभिनेता इस भूमिका को करने से बच रहे थे क्योंकि उन्हें डर था कि इससे उनकी छवि खराब हो जाएगी।
राज बब्बर ने जोखिम उठाया और यह किरदार स्वीकार कर लिया। फिल्म रिलीज होते ही सुपरहिट साबित हुई। उनके अभिनय की इतनी चर्चा हुई कि दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित प्रीमियर शो के दौरान दर्शकों ने उन्हें वास्तविक खलनायक समझ लिया। महिलाएं उन्हें गालियां देने लगीं और लोग नाराजगी जताने लगे।
सबसे ज्यादा असर उनकी मां पर हुआ। फिल्म खत्म होने के बाद टैक्सी में बैठते ही उनकी मां रोने लगीं और कहा, “बेटा, हम कम खा लेंगे, लेकिन ऐसा काम मत किया करो।” राज बब्बर ने बाद में कहा था कि उन्हें तभी महसूस हुआ कि उन्होंने अपने किरदार को इतनी सच्चाई से निभाया कि दर्शक उसे वास्तविक मान बैठे।
किराए के मकानों से बॉलीवुड तक का सफर
राज बब्बर का जन्म एक पंजाबी परिवार में हुआ था। उनके पिता और दादा रेलवे में नौकरी करते थे। विभाजन के बाद परिवार आगरा के टूंडला में आकर बस गया। बचपन आर्थिक संघर्षों के बीच किराए के मकानों में बीता।
उन्होंने आगरा कॉलेज से पढ़ाई पूरी की और 1975 में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) से स्नातक किया। अभिनय की बारीकियां सीखने के बाद वे मुंबई पहुंचे। शुरुआती दौर में उन्हें छोटी-छोटी भूमिकाएं मिलीं। उनकी पहली फिल्म ‘शारदा’ थी, जिसमें उनका केवल एक संवाद था। करीब 14 फिल्मों में छोटे रोल करने के बाद ‘इंसाफ का तराजू’ ने उन्हें पहचान दिलाई।
नादिरा से प्यार और धर्म परिवर्तन से इनकार
राज बब्बर की पहली पत्नी नादिरा जहीर से मुलाकात NSD में हुई थी। नादिरा उनसे चार साल बड़ी थीं और मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखती थीं। दोनों के बीच दोस्ती प्यार में बदली और 1975 में उन्होंने शादी कर ली।
परिवार चाहता था कि नादिरा धर्म परिवर्तन कर लें और नया नाम अपनाएं, लेकिन राज बब्बर ने साफ शब्दों में कहा कि “नादिरा हैं तो नादिरा ही रहेंगी।” उन्होंने न तो धर्म परिवर्तन कराया और न ही पत्नी का नाम बदला। इस फैसले में उनके पिता ने भी उनका पूरा समर्थन किया।
स्मिता पाटिल से प्यार और टूटता परिवार
फिल्मी दुनिया में काम करते हुए राज बब्बर की मुलाकात अभिनेत्री स्मिता पाटिल से हुई। दोनों फिल्म ‘भीगी पलकें’ की शूटिंग के दौरान करीब आए। यह रिश्ता इतना मजबूत हुआ कि राज बब्बर ने अपनी पहली पत्नी और बच्चों से दूरी बना ली और 1983 में स्मिता पाटिल से शादी कर ली।
हालांकि किस्मत को कुछ और मंजूर था। 1986 में बेटे प्रतीक के जन्म के बाद स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण स्मिता पाटिल का निधन हो गया। उनकी मौत ने राज बब्बर को गहरे सदमे में डाल दिया।
बताया जाता है कि स्मिता पाटिल को अपनी मौत का पूर्वाभास था। वह अक्सर कहती थीं कि वह ज्यादा समय तक साथ नहीं रह पाएंगी। उनके निधन के बाद राज बब्बर पूरी तरह टूट गए थे।
नादिरा ने फिर थामा साथ
स्मिता पाटिल के निधन के बाद राज बब्बर की जिंदगी मुश्किल दौर से गुजर रही थी। ऐसे समय में उनकी पहली पत्नी नादिरा ने पुरानी कड़वाहटों को भुलाकर उन्हें दोबारा सहारा दिया। समय के साथ दोनों फिर करीब आए और परिवार को संभालने की कोशिश की।
बेटे प्रतीक से बढ़ गई दूरियां
राज बब्बर और स्मिता पाटिल के बेटे प्रतीक बब्बर पिछले कुछ वर्षों से अपने पिता से दूरी बनाए हुए हैं। फरवरी 2025 में उन्होंने अभिनेत्री प्रिया बनर्जी से शादी की, लेकिन इस समारोह में राज बब्बर और उनके परिवार को आमंत्रित नहीं किया।
इतना ही नहीं, प्रतीक ने अपने नाम से ‘बब्बर’ सरनेम हटाकर ‘प्रतीक स्मिता पाटिल’ नाम अपना लिया। इस फैसले ने परिवार के भीतर मौजूद दूरियों को सार्वजनिक कर दिया।
राज बब्बर के बड़े बेटे आर्य बब्बर ने भी इस मामले पर नाराजगी जताई और कहा कि जब जरूरत होती है तब पिता याद आते हैं, लेकिन सम्मान देने की बारी आती है तो उन्हें स्वीकार नहीं किया जाता।
शाहरुख खान के ‘बब्बर शेर अंकल’
राज बब्बर का शाहरुख खान के परिवार से पुराना रिश्ता रहा है। शाहरुख के पिता NSD की कैंटीन चलाते थे और बचपन में शाहरुख अक्सर वहां समय बिताते थे। वह राज बब्बर को प्यार से ‘बब्बर शेर अंकल’ कहा करते थे।
एक बार शाहरुख ने मजाकिया अंदाज में उनसे पूछा था कि फिल्मों में किसिंग सीन सच में होते हैं या नहीं। इस पर राज बब्बर ने हंसते हुए जवाब दिया था, “जाकर आंटी से पूछ लो।”
सलमान खान ने गिफ्ट की लग्जरी कार
फिल्म ‘बॉडीगार्ड’ में राज बब्बर ने सलमान खान के साथ काम किया था। बताया जाता है कि उन्होंने इस फिल्म के लिए कोई फीस नहीं ली थी। शूटिंग खत्म होने पर सलमान खान ने उन्हें सरप्राइज देते हुए एक लग्जरी कार गिफ्ट कर दी। सलमान के इस व्यवहार से राज बब्बर बेहद भावुक हो गए थे।
राजनीति और अभिनय दोनों में पहचान
राज बब्बर ने अभिनय के साथ-साथ राजनीति में भी अपनी अलग पहचान बनाई। फिल्मों के अलावा उन्होंने संसद तक का सफर तय किया और सामाजिक मुद्दों पर मुखर रहे। आज भी वह हिंदी सिनेमा और राजनीति दोनों क्षेत्रों में एक सम्मानित नाम माने जाते हैं।
राज बब्बर की जिंदगी इस बात का उदाहरण है कि सफलता के पीछे संघर्ष, त्याग, विवाद और भावनात्मक उतार-चढ़ाव की लंबी कहानी छिपी होती है। एक अभिनेता के रूप में उन्होंने दर्शकों का प्यार पाया, लेकिन निजी जिंदगी में कई ऐसे मोड़ भी देखे जिन्होंने उन्हें भीतर तक बदल दिया।