अजमेर। राजस्थान के अजमेर में मानव तस्करी से जुड़े एक मामले की जांच में पुलिस को कई अहम सुराग मिले हैं। दरगाह क्षेत्र के अंदरकोट इलाके से सामने आए इस मामले में जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह गिरोह कितने समय से सक्रिय था और इसके तार किन-किन क्षेत्रों तक फैले हुए हैं।

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी कथित तौर पर अपने अवैध नेटवर्क को छिपाने के लिए कुछ कोडवर्ड का इस्तेमाल करते थे। प्रारंभिक जांच में ‘कटिंग’ जैसे शब्दों के जरिए सौदे और संपर्क से जुड़े संकेत देने की आशंका जताई गई है। हालांकि पुलिस सभी पहलुओं की पुष्टि सबूतों के आधार पर कर रही है।

कैटरिंग काम के बहाने बनाया जाता था संपर्क

जांच में यह बात सामने आई है कि गिरोह से जुड़ी एक महिला कैटरिंग के काम से जुड़ी हुई थी। शादी समारोहों और अन्य सामाजिक आयोजनों के दौरान वह किशोरियों और जरूरतमंद परिवारों तक पहुंच बनाती थी। आरोप है कि उन्हें रोजगार, आर्थिक मदद और बेहतर भविष्य का भरोसा देकर अपने संपर्क में लिया जाता था।

इसके बाद उन्हें गिरोह से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचाया जाता था। पुलिस अब इस पूरी कड़ी की जांच कर रही है कि कितने लोगों ने इस नेटवर्क में भूमिका निभाई।

आर्थिक गतिविधियों और संपत्ति की भी जांच

जांच एजेंसियां गिरोह से जुड़े लोगों की आर्थिक स्थिति और संपत्तियों की भी पड़ताल कर रही हैं। पुलिस को ऐसे संकेत मिले हैं कि कुछ लोगों ने सीमित आय के बावजूद इलाके में संपत्ति बनाई और आर्थिक गतिविधियां संचालित कीं।

एक महिला सदस्य के ब्याज पर पैसे देने के काम से जुड़े होने की भी जानकारी सामने आई है। अब पुलिस यह पता लगा रही है कि इन आर्थिक स्रोतों का संबंध कथित अपराध नेटवर्क से था या नहीं।

पुराने मामलों से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच

मामले में एक ऑटो चालक का नाम भी जांच के दायरे में आया है। बताया जा रहा है कि वह पहले भी एक नाबालिग से जुड़े अपहरण मामले में पूछताछ का सामना कर चुका था। उस समय पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी थी, लेकिन नए मामले के बाद उसकी भूमिका फिर से जांची जा रही है।

डर खत्म होने के बाद सामने आ रहे पीड़ित

मामला सामने आने के बाद कुछ परिवार पुलिस के पास पहुंचकर अपनी शिकायतें और जानकारी साझा कर रहे हैं। पुलिस का मानना है कि पहले डर या दबाव के कारण कई लोग सामने नहीं आए होंगे।

जांच टीम अब पीड़ितों के बयान, आरोपियों के संपर्क, मोबाइल रिकॉर्ड और अन्य सबूतों के आधार पर नेटवर्क की पूरी तस्वीर सामने लाने में जुटी है। पश्चिम बंगाल समेत अन्य संभावित कनेक्शनों की भी जांच की जा रही है।