राजस्थान के लाखों सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। राज्य की भजनलाल सरकार ने लंबे समय से सरकारी महकमों में तबादलों पर लगी रोक को अस्थाई रूप से हटा दिया है। प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा जारी आदेश के तहत राज्य में 19 जून से 5 जुलाई 2026 तक तबादले किए जा सकेंगे। सरकार के इस फैसले से प्रदेशभर के हजारों कर्मचारियों और अधिकारियों के स्थानांतरण का रास्ता साफ हो गया है।

विधायक दल की बैठक और मंत्रियों के मंथन के बाद फैसला

तबादला बैन हटाने का यह निर्णय अचानक नहीं लिया गया है। पिछले काफी समय से मंत्रियों और विधायकों की ओर से प्रशासनिक आवश्यकताओं को देखते हुए इसे हटाने की मांग की जा रही थी। हाल ही में मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित भाजपा विधायक दल की बैठक में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठा था, जहां जनप्रतिनिधियों ने तर्क दिया था कि लंबे समय से ट्रांसफर बंद होने के कारण जमीनी स्तर पर कार्य प्रभावित हो रहे हैं। विभिन्न विभागों से मिले फीडबैक और गहन मंथन के बाद मुख्यमंत्री ने इस पर अपनी सहमति दी।

इन श्रेणियों को मिलेगी ट्रांसफर में प्राथमिकता

मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए सरकार ने साफ किया है कि कुछ विशेष श्रेणियों के आवेदनों को प्राथमिकता के आधार पर देखा जाएगा। इनमें शामिल हैं:

  • एकल महिला, विधवा और परित्यक्ता कर्मचारी।

  • गंभीर बीमारियों (जैसे- कैंसर, ब्रेन ट्यूमर, हार्ट की बीमारी, फेफड़े और किडनी की गंभीर बीमारी) से ग्रसित कार्मिक।

  • दिव्यांग कर्मचारी।

  • राजकीय सेवा में कार्यरत पति-पत्नी के मामले (ताकि उन्हें एक ही स्थान या नजदीक पदस्थापित किया जा सके)।

यह आदेश राज्य के सभी मुख्य सरकारी विभागों के साथ-साथ निगमों, बोर्डों, मंडलों और स्वायत्तशासी संस्थाओं पर भी समान रूप से लागू होगा।

शिक्षा और चिकित्सा विभाग के इन कर्मचारियों को झटका

भले ही सरकार ने तबादलों की खिड़की खोल दी है, लेकिन दो बड़े महकमों के कर्मचारियों को इस प्रक्रिया से फिलहाल दूर रखा गया है।

  1. शिक्षा विभाग: इस अवधि में ग्रेड थर्ड टीचर्स (तृतीय श्रेणी अध्यापक) के तबादले नहीं हो सकेंगे।

  2. चिकित्सा विभाग: चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत आने वाले डॉक्टर्स, नर्सिंग ऑफिसर्स, लैब टेक्नीशियनों समेत अन्य संवर्गों के स्थानांतरण पर भी अग्रिम आदेश तक रोक बरकरार रहेगी।

5 जुलाई तक मचेगी प्रशासनिक हलचल

केवल 16 दिनों (19 जून से 5 जुलाई) के लिए खुली इस ट्रांसफर विंडो के कारण प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि इस फैसले से विभागों में रिक्त पदों का संतुलन बनेगा, कार्यकुशलता में सुधार होगा और पारिवारिक या व्यक्तिगत कारणों से परेशान कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगों का निपटारा हो सकेगा।