राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सोमवार को गंगा दशमी के पावन अवसर पर टोंक जिले स्थित बीसलपुर बांध पहुंचकर ‘वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान’ का शुभारंभ किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने विधिवत जल पूजन कर प्रदेशवासियों को जल संरक्षण का संदेश दिया और पानी की हर बूंद बचाने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल ही जीवन का आधार है और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल स्रोतों का संरक्षण करना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से जल बचत को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया।

जल पूजन कर दिया संरक्षण का संदेश

बीसलपुर बांध पहुंचने पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ जल पूजन किया। गंगा दशमी के धार्मिक महत्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नदियों और जल स्रोतों को जीवनदाता माना गया है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ते जल संकट को देखते हुए समाज के हर वर्ग को जल संरक्षण के लिए आगे आना होगा। मुख्यमंत्री ने जल के विवेकपूर्ण उपयोग और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।

स्काडा प्रणाली का लिया जायजा

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने बीसलपुर बांध की स्काडा (SCADA) प्रणाली का अवलोकन किया। अधिकारियों ने उन्हें जल प्रबंधन, जल भंडारण और जल आपूर्ति की आधुनिक तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने जल आपूर्ति व्यवस्था की मॉनिटरिंग और तकनीकी सिस्टम की कार्यप्रणाली को समझते हुए अधिकारियों को बेहतर प्रबंधन बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के जरिए जल संसाधनों का बेहतर उपयोग और संरक्षण संभव है।

जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहे मौजूद

इस अवसर पर जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री कन्हैयालाल चौधरी, स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में आमजन मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान जल संरक्षण को लेकर जागरूकता संदेश भी दिए गए। सरकार का उद्देश्य इस अभियान के जरिए प्रदेशभर में जल संरक्षण के प्रति जनभागीदारी बढ़ाना और लोगों को पानी बचाने के लिए प्रेरित करना है।

जल संकट से निपटने की दिशा में बड़ा कदम

राजस्थान जैसे जल संकट प्रभावित राज्य में ‘वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान’ को महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आमजन की भागीदारी बढ़े तो जल संरक्षण के प्रयासों को नई मजबूती मिल सकती है। बीसलपुर बांध प्रदेश के कई जिलों के लिए पेयजल का प्रमुख स्रोत है। ऐसे में यहां से अभियान की शुरुआत को प्रतीकात्मक और रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।