जैसलमेर। कार खरीदते समय जिस मॉडल की बुकिंग की थी, उसकी जगह कम फीचर्स वाला लोअर वैरिएंट मिलने पर एक उपभोक्ता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और आखिरकार उसे न्याय मिल गया। जैसलमेर उपभोक्ता आयोग ने टोयोटा डीलर को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए खरीदार के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है।

आयोग के अध्यक्ष पवन कुमार ओझा की पीठ ने 11 जून 2026 को दिए आदेश में कहा कि डीलर को उपभोक्ता से ली गई लोअर वैरिएंट कार वापस लेकर उसके बदले नई टोयोटा इनोवा हाईक्रॉस ZXO हाइब्रिड कार उपलब्ध करानी होगी। साथ ही मानसिक एवं आर्थिक क्षति के लिए 3 लाख रुपए तथा 10 हजार रुपए अदालती खर्च के रूप में भुगतान करना होगा।

50 हजार देकर बुक की थी हाईब्रिड कार

मामले के अनुसार जैसलमेर निवासी सुरेश कुमार बिस्सा ने 20 जुलाई 2023 को जोधपुर स्थित मयंक श्री मोटर्स शोरूम में टोयोटा इनोवा हाईक्रॉस ZXO हाइब्रिड मॉडल की बुकिंग कराई थी। इसके लिए उन्होंने 50 हजार रुपए एडवांस जमा करवाए थे।

शोरूम ने 16 मार्च 2024 को कार की डिलीवरी दे दी। करीब एक साल बाद 10 मार्च 2025 को मुंबई में सर्विस के दौरान सुरेश बिस्सा के बेटे दीपक बिस्सा को पता चला कि वाहन ZXO हाइब्रिड नहीं बल्कि ZX मॉडल है।

जब इस संबंध में कंपनी और डीलर से संपर्क किया गया तो संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद 21 नवंबर 2025 को जैसलमेर उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई गई।

आयोग ने माना सेवा में कमी

सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि खरीदार को वह मॉडल नहीं दिया गया जिसकी बुकिंग की गई थी। वाहन में वे फीचर्स भी मौजूद नहीं थे जो ZXO हाइब्रिड वैरिएंट में उपलब्ध होते हैं।

आयोग ने इसे उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन और सेवा में गंभीर कमी मानते हुए डीलर को नई इनोवा हाईक्रॉस ZXO हाइब्रिड कार ऑन-रोड खर्च सहित उपलब्ध कराने का आदेश दिया।

झूठा हलफनामा पड़ा भारी

मामले की सुनवाई के दौरान मयंक श्री मोटर्स की ओर से पेश किए गए कुछ दस्तावेज और हलफनामे अदालत की जांच में गलत और भ्रामक पाए गए।उपभोक्ता आयोग ने अदालत को गुमराह करने के प्रयास को गंभीर मानते हुए मयंक श्री मोटर्स पर 3 लाख रुपए का जुर्माना लगाया। वहीं शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले रिछपाल सिंह भाटी पर व्यक्तिगत रूप से 50 हजार रुपए का दंड लगाया गया।

इस प्रकार दोनों को मिलाकर 3.50 लाख रुपए राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं।

45 दिन में करना होगा आदेश का पालन

आयोग ने स्पष्ट किया है कि आदेश जारी होने की तारीख से 45 दिनों के भीतर नई कार की डिलीवरी और मुआवजे की राशि का भुगतान करना होगा। यदि निर्धारित अवधि में आदेश की पालना नहीं की गई तो पूरी राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

यह फैसला उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा और वाहन खरीद में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।