अपराध की दुनिया का अंत हमेशा खौफनाक होता है। सोशल मीडिया पर दिखने वाली रसूख और चकाचौंध के पीछे की असलियत बेहद खौफनाक होती है, जहां मौत हर वक्त साए की तरह साथ चलती है। जयपुर में कभी आतंक का पर्याय रही 'लेडी डॉन' मिंटू चौधरी की कहानी भी इसी का एक दर्दनाक उदाहरण बन गई है। पिछले करीब डेढ़ साल से लापता इस महिला डॉन का शव जयपुर के मुहाना थाना क्षेत्र में एक कुएं से बरामद हुआ है। आशंका जताई जा रही है कि काफी पहले ही उसकी हत्या कर शव को ठिकाने लगा दिया गया था।

कपड़ों से हुई शव की पहचान

जानकारी के अनुसार, मुहाना थाना पुलिस को मुखबिर के जरिए सूचना मिली थी कि बनखंडी बालाजी चौराहे के पास स्थित एक कुएं में किसी का शव पड़ा है। मुहाना थाना प्रभारी मुकेश कुमार खारड़िया ने तुरंत हरकत में आते हुए सिविल डिफेंस की टीम को मौके पर बुलाया। रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर जब शव को बाहर निकाला गया, तो वह एक कपड़े में लिपटा हुआ था। पुलिस ने परिजनों को सूचना दी, जिन्होंने शव के शर्ट और पायजामे को देखकर उसकी पहचान मिंटू चौधरी के रूप में की।

पति ने 7 महीने पहले दर्ज कराई थी गुमशुदगी

थाना प्रभारी मुकेश कुमार ने बताया कि मिंटू पिछले लगभग डेढ़ साल से लापता थी, लेकिन हैरानी की बात यह है कि उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट महज 7 महीने पहले ही दर्ज कराई गई थी। यह रिपोर्ट उसके पति लालाराम की ओर से लिखवाई गई थी। पुलिस जांच में सामने आया है कि मिंटू का अपने पति से लंबे समय से विवाद चल रहा था और वह अपने 6 साल के बेटे के साथ अलग रह रही थी। उसके अचानक गायब होने के बाद से बच्चा अपने पिता के पास चला गया था। हत्या के एंगल को देखते हुए पुलिस अब मिंटू के पति लालाराम से भी गहन पूछताछ कर रही है।

मजदूर की बेटी से 'लेडी डॉन' बनने तक का सफर

मिंटू का असली नाम सीमा चौधरी था। मूल रूप से टोंक जिले के मालपुरा की रहने वाली सीमा के माता-पिता मजदूरी करते थे। बचपन में ही सिर से मां का साया उठ जाने के बाद, उसके पिता मोती राम उसे लेकर जयपुर के समीप मदरामपुरा आ गए। पिता के दिनभर काम पर रहने के कारण मिंटू को सही परवरिश और मार्गदर्शन नहीं मिल सका। छोटी उम्र में ही वह आवारा लड़कों की संगत में पड़ गई। महज 15 साल की उम्र में उसने ऑटो चलाना शुरू कर दिया था और यहीं से उसके कदम जरायम की दुनिया की तरफ बढ़ गए।

पुलिस के लिए बनी रही सिरदर्द

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, मिंटू ने साल 2009 में अपराध की दुनिया में अपनी पहली दस्तक दी थी। सबसे पहले उस पर मारपीट का मुकदमा दर्ज हुआ था। पहली बार जेल की हवा खाने के बाद अपराध से तौबा करने के बजाय वह और ज्यादा बेखौफ हो गई। बेरहमी से मारपीट करना, रंगदारी मांगना और लूटपाट करना उसकी फितरत बन गई। पिछले 15 सालों में मिंटू के खिलाफ 12 से ज्यादा संगीन मामले दर्ज हुए। खासकर साल 2010 से 2015 के बीच उसने जयपुर पुलिस की नाक में दम कर रखा था। लेकिन कभी पूरे इलाके में अपना खौफ कायम करने वाली इस 'डॉन' की कहानी का अंत एक गुमनाम और खौफनाक मौत के साथ हुआ। पुलिस अब इस गुत्थी को सुलझाने में जुटी है कि आखिर मिंटू की हत्या किसने और क्यों की।