भरतपुर। राजस्थान के भरतपुर में जीजीएसटी (GGST) कमिश्नरेट की एंटी-इवेजन शाखा ने बड़ी कार्रवाई करते हुए राहुल ब्रांड की फ्लेवर्ड सुपारी बनाने वाली मैसर्स किशन फूड प्रोडक्ट्स में करोड़ों रुपये की GST चोरी का खुलासा किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कंपनी ने पिछले पांच वर्षों में करीब 56.51 करोड़ रुपये का वास्तविक कारोबार किया, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में केवल करीब 2.5 करोड़ रुपये का कारोबार दर्ज कराया। इस तरह अब तक 10.52 करोड़ रुपये की GST चोरी सामने आई है।
जांच में खुलासा हुआ कि कंपनी का मालिक द्वारका मतलानी टैक्स चोरी के लिए एक समानांतर वित्तीय नेटवर्क संचालित कर रहा था। बिना टैक्स इनवॉइस बेची गई फ्लेवर्ड सुपारी का भुगतान सीधे अपने कर्मचारियों और मजदूरों के नाम से खुलवाए गए बैंक खातों और यूपीआई आईडी में मंगवाया जाता था, ताकि वास्तविक लेन-देन विभाग की नजर से छिपा रहे।
मुखबिर की सूचना पर हुई कार्रवाई
जीजीएसटी कमिश्नरेट की एंटी-इवेजन शाखा ने 17 जुलाई को मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर जीएसटी एक्ट की धारा 67(2) के तहत फैक्ट्री परिसर में तलाशी अभियान चलाया। जांच में पता चला कि कंपनी कम्पोजीशन स्कीम में पंजीकृत होने के बावजूद बड़े स्तर पर ब्रांडेड फ्लेवर्ड सुपारी का निर्माण और सप्लाई कर रही थी। अधिकांश बिक्री बिना टैक्स इनवॉइस के की जा रही थी और उसका अलग से कच्चा हिसाब रखा जाता था।
मजदूरों के खातों में मंगवाता था करोड़ों रुपये
जांच के दौरान अधिकारियों को पता चला कि कंपनी में काम करने वाले करीब 13 मजदूरों के नाम पर बैंक खाते और यूपीआई आईडी खुलवाई गई थीं। बिना बिल बेचे गए माल का भुगतान इन्हीं खातों में जमा कराया जाता था। इसके बाद राशि को विभिन्न माध्यमों से कंपनी के नेटवर्क में उपयोग किया जाता था। विभाग ने सभी संबंधित बैंक खातों को फ्रीज कर उनके लेन-देन की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
56 करोड़ का कारोबार, रिकॉर्ड में सिर्फ 2.5 करोड़
एडवोकेट विवेक हथैनी के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में कंपनी ने सरकारी रिकॉर्ड में केवल लगभग 2.5 करोड़ रुपये का कारोबार दिखाया, जबकि जांच में 56.51 करोड़ रुपये की बिना बिल बिक्री का खुलासा हुआ। इस अंतर के आधार पर अब तक 10.52 करोड़ रुपये की GST चोरी सामने आई है। कंपनी पूरे समय कम्पोजीशन स्कीम के तहत पंजीकृत थी।
मोबाइल, मशीनें और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त
तलाशी के दौरान अधिकारियों ने 4 मोबाइल फोन, 23-24 मशीनें, हजारों कच्ची पर्चियां, व्हाट्सएप चैट, समानांतर हिसाब-किताब, बैंक लेन-देन से जुड़े दस्तावेज और अन्य डिजिटल साक्ष्य जब्त किए। अधिकारियों का कहना है कि मोबाइल फोन में बिना बिल बिक्री, ऑर्डर, सप्लाई, भुगतान और कच्चे कारोबार से जुड़ी हजारों एंट्री मिली हैं। व्हाट्सएप चैट और डिजिटल रिकॉर्ड से टैक्स चोरी के पूरे नेटवर्क की पुष्टि हुई है।
हरियाणा से आता था मेंथॉल, कई राज्यों तक सप्लाई की जांच
जांच में फ्लेवर्ड सुपारी बनाने में इस्तेमाल होने वाला मेंथॉल भी बरामद हुआ है। प्रारंभिक जांच के अनुसार यह हरियाणा से मंगाया जाता था। विभाग अब यह भी पता लगा रहा है कि बिना बिल तैयार किया गया माल किन-किन राज्यों में सप्लाई किया गया और इस पूरे नेटवर्क में अन्य लोग या फर्में भी शामिल थीं या नहीं।
फिलहाल जीजीएसटी विभाग कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रहा है। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर टैक्स चोरी का आंकड़ा और बढ़ सकता है।