राजधानी जयपुर के अक्षयपात्र चौराहे के पास बैंक ऑफ इंडिया (BOI) के एटीएम में हुई 41.70 लाख रुपये की सनसनीखेज लूट का पुलिस ने मात्र 48 घंटे के भीतर पर्दाफाश कर दिया है। इस फिल्मी स्टाइल डकैती की पटकथा किसी पेशेवर अपराधी ने नहीं, बल्कि एक 22 वर्षीय युवती ने अपने बॉयफ्रेंड और उसके साथियों के साथ मिलकर लिखी थी। पुलिस ने मुख्य महिला आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और उसके पास से लूट की आधी से ज्यादा रकम भी बरामद कर ली है।
कैसे रची गई लूट की खौफनाक साजिश?
डीसीपी ईस्ट रंजिता शर्मा ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि मुख्य आरोपी युवती अंशु कुमारी जाटव (22) को गिरफ्तार कर लिया गया है। अंशु एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करती है। पूछताछ में सामने आया है कि लूट का मास्टरमाइंड उसका प्रेमी मस्तराम मीणा (निवासी मासलपुर, करौली) है। मस्तराम ने ही अंशु को बताया था कि अक्षयपात्र स्थित एटीएम से नियमित तौर पर भारी कैश निकाला जाता है।
इस जानकारी के बाद अंशु ने इलाके की रेकी की। 14 सितंबर की सुबह जब बैंक के तीन कर्मचारी (दो महिला और एक पुरुष) तीन दिन की छुट्टी के बाद डिपोजिट मशीन से भारी मात्रा में कैश निकालकर बैंक के अंदर जा रहे थे, तभी वहां संदिग्ध रूप से घूम रही अंशु ने अपने साथियों को इशारा कर दिया और खुद वहां से निकल गई।
महज 30 सेकंड में दिया वारदात को अंजाम
सूचना मिलते ही कुछ दूरी पर घात लगाए बैठे दो बाइक सवार बदमाश हेलमेट पहनकर तेजी से वहां पहुंचे। बदमाशों ने बैंक कर्मचारियों पर पिस्तौल तान दी और उनके साथ धक्का-मुक्की की। महज 30 सेकंड के भीतर वे कर्मचारियों के हाथ से 41.70 लाख रुपये से भरा काला बैग छीनकर फरार हो गए। पुलिस की नाकाबंदी से बचने के लिए आरोपियों ने पूरी प्लानिंग के तहत बाइक को रास्ते में छोड़कर कैश को एक कार में शिफ्ट किया और चकमा देने के लिए अपने कपड़े तक बदल लिए।
किराए के कमरे से मिला सूटकेस, 26.80 लाख बरामद
लूट के बाद रकम को दो हिस्सों में बांटा गया। एक बड़ा हिस्सा अंशु कुमारी के रामनगरिया (श्रीकृष्णपुरा) स्थित बजरंग दीप प्रथम के किराए के कमरे में एक सूटकेस में छिपा दिया गया। घटना के बाद जब रामनगरिया थाना पुलिस और डीएसटी (DST) टीम ने सीसीटीवी खंगाले, तो एटीएम के आसपास अंशु की संदिग्ध गतिविधियां रडार पर आ गईं।
सख्ती से पूछताछ करने पर युवती ने सारे राज उगल दिए। पुलिस ने उसके कमरे से 26.80 लाख रुपये बरामद कर लिए हैं। हालांकि, वारदात में शामिल उसका बॉयफ्रेंड मस्तराम मीणा और दो अन्य साथी पुष्पेंद्र मीणा (पुस्सी) व सुमित जांगम अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।
क्या वारदात में शामिल है कोई बैंक कर्मचारी? (Inside Job Angle)
इस पूरे हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस को किसी बैंक कर्मचारी के मिले होने का भी शक है। पुलिस के अनुसार:
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सटीक समय की जानकारी: एटीएम से कैश निकालने का कोई फिक्स टाइम नहीं था, फिर भी बदमाशों को सटीक समय पता था कि कैश कब बाहर आएगा।
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छुट्टियों का फायदा: बदमाशों को यह भी भली-भांति मालूम था कि तीन दिन की छुट्टियों के कारण मशीन में सामान्य से बहुत ज्यादा कैश जमा है।
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कर्मचारी का नाम: जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि आरोपी आपस में किसी 'बैंक कर्मचारी' का नाम ले रहे थे।
फिलहाल पुलिस बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों से भी पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि मुखबिरी का असली स्रोत कौन था। फरार आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस की कई टीमें संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं।