हत्या, फिरौती, और तस्करी जैसे जघन्य अपराधों के दम पर रातों-रात करोड़पति बनने वाले गैंगस्टर्स के लिए राजस्थान में अब उल्टी गिनती शुरू हो गई है। पुलिस ने अपराधियों को सिर्फ जेल भेजने के बजाय, उन्हें 'आर्थिक रूप से कंगाल' करने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।

प्रदेश में लॉरेंस, रोहित गोदारा और आनंदपाल जैसे बड़े सिंडिकेट से जुड़े 636 कुख्यात (हार्डकोर) अपराधियों की एक विस्तृत कुंडली तैयार की गई है। पुलिस ने अब तक इनकी 220 करोड़ रुपये की ऐसी संपत्तियों को ट्रेस किया है, जो काली कमाई से बनाई गई थीं। इनमें आलीशान बंगले, फार्महाउस, लग्जरी गाड़ियां और सरकारी जमीनों पर किए गए कब्जे शामिल हैं।

आने वाले दिनों में 300 करोड़ तक पहुंचेगा आंकड़ा

एडीजी (क्राइम) विपिन कुमार पांडे के अनुसार, प्रदेश के इतिहास में पहली बार इतने बड़े स्तर पर एक साथ अपराधियों के खिलाफ यह अभियान छेड़ा गया है। यह 636 अपराधियों की लिस्ट सभी जिलों के एसपी (SP) को सौंप दी गई है। अगर किसी भी जिले में इन बदमाशों की बेनामी संपत्ति मिलती है, तो तुरंत संबंधित थाने को अलर्ट किया जा रहा है। पुलिस मुख्यालय का अनुमान है कि अगले कुछ ही हफ्तों में जब्त/चिन्हित संपत्तियों का यह आंकड़ा 300 करोड़ रुपये को पार कर जाएगा।

पुलिस के रडार पर कौन हैं?

इस खास 'ऑपरेशन' के तहत पुलिस ने अपराधियों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर टारगेट किया है:

  • हार्डकोर अपराधी व हिस्ट्रीशीटर: वे अपराधी जो बार-बार संगीन अपराध करके जनता में खौफ का व्यापार करते हैं।

  • साइबर ठग: जो डिजिटल दुनिया में धोखाधड़ी कर अकूत संपत्ति बना रहे हैं।

  • विभिन्न माफिया: इनमें ड्रग्स (नशा) तस्कर, अवैध हथियारों के सप्लायर और अंतरराज्यीय शराब तस्कर मुख्य रूप से शामिल हैं।

कैसे खंगाला जा रहा है अपराधियों का खजाना?

बदमाशों के छिपे हुए खजाने का पता लगाने के लिए पुलिस एक मल्टी-लेयर इन्वेस्टिगेशन कर रही है:

  1. राजस्व रिकॉर्ड की जांच: जमीनों और कृषि भूमि का रिकॉर्ड निकाला जा रहा है।

  2. फिजिकल वेरिफिकेशन: कमर्शियल बिल्डिंग्स और मकानों की मौके पर जाकर जांच।

  3. बैंक डिटेल और लॉकर: खातों में हुए लेनदेन और लॉकरों की पूरी ट्रैकिंग।

  4. बेनामी संपत्ति की खोज: केवल अपराधी ही नहीं, बल्कि उसके रिश्तेदारों, सहयोगियों और गुर्गों के नाम पर खरीदी गई संपत्तियों की भी पड़ताल की जा रही है।

अब तक की बड़ी कार्रवाइयां: झालावाड़ सबसे आगे

इस साल (1 जनवरी 2026 से 1 सितंबर 2026 तक) पुलिस 55 बड़े ठिकानों पर हथौड़ा चला चुकी है। इन कार्रवाइयों में लगभग 35 करोड़ रुपये की अवैध प्रॉपर्टी को जमींदोज किया गया है। आंकड़ों की बात करें तो झालावाड़ जिला इसमें टॉप पर है, जहां 12 ताबड़तोड़ कार्रवाइयों में 23 करोड़ की संपत्तियों को नष्ट किया गया है।

बड़े एक्शन की दो प्रमुख मिसालें:

  • अजमेर (खुशीराम फौजी): बांदरसिंदरी इलाके में कुख्यात हिस्ट्रीशीटर खुशीराम फौजी ने अपने पिता (रघुनाथ) और चाचा (भगवान) के साथ मिलकर 25 बीघा सरकारी जमीन पर कब्जा जमाया हुआ था। इसकी बाजार कीमत करीब 3 करोड़ रुपये थी। एसपी हर्षवर्धन अग्रवाला की अगुवाई में इस कब्जे को मुक्त कराया गया। खुशीराम पर 11 बेहद गंभीर मामले दर्ज हैं।

  • रोहित गोदारा का गुर्गा (हरिओम रामावत): लूट, हत्या के प्रयास और फिरौती के 15 मुकदमों में नामजद हरिओम रामावत के खिलाफ भी बड़ा एक्शन हुआ। प्रशासन ने उसकी अवैध संपत्तियों को तोड़ा, सीज किया और उसके वाहन व कृषि भूमि भी कुर्क कर ली।

क्या है BNSS की धारा 107, जिससे कांप रहे हैं अपराधी?

जुलाई 2024 में देश में 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' (BNSS) लागू की गई थी। इसी कानून की धारा 107 पुलिस का सबसे बड़ा हथियार बनकर उभरी है।

  • धारा 107 का मुख्य उद्देश्य: इसका मकसद केवल अपराधी को गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे धकेलना नहीं है, बल्कि उसके द्वारा अपराध से कमाए गए पूरे 'आर्थिक साम्राज्य' (Financial Power) को जड़ से खत्म करना है।

  • जब तक अपराधी के पास काली कमाई का पैसा रहता है, वह जेल से भी अपनी गैंग ऑपरेट करता है। धारा 107 के तहत संपत्ति जब्त होने से अपराधी पूरी तरह कमजोर और असहाय हो जाता है। पुलिस मुख्यालय ने जमीनी स्तर पर इसका सख्ती से पालन करवाने के लिए सभी जिलों को कड़े दिशा-निर्देश (SOP) जारी कर दिए हैं।