प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जीवाड़े के खिलाफ SOG (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) का एक्शन लगातार जारी है। इसी कड़ी में SOG ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की 2022 वरिष्ठ अध्यापक (हिंदी) भर्ती परीक्षा में बड़ी कार्रवाई की है। टीम ने डमी अभ्यर्थी (Dummy Candidate) बनकर परीक्षा देने वाले 10 हजार रुपए के इनामी आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पकड़ा गया आरोपी कोई और नहीं, बल्कि मूल अभ्यर्थी का सगा साला है।

2 साल से जालोर-भीनमाल में छिपा था आरोपी

एसओजी के एडीजी विशाल बंसल ने जानकारी देते हुए बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान खारा निवासी दिनेश कुमार (पुत्र किशनलाल विश्नोई) के रूप में हुई है। दिनेश पर पुलिस ने 10 हजार रुपए का इनाम रखा हुआ था। वह पिछले करीब दो साल से पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहा था। गिरफ्तारी से बचने के लिए दिनेश लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था और जालोर-भीनमाल इलाके में अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था। लंबी तलाश के बाद आखिरकार वह SOG के हत्थे चढ़ गया।

कैसे रची गई फर्जीवाड़े की साजिश?

जांच में यह बात सामने आई है कि परीक्षा का मूल अभ्यर्थी रानीवाड़ा क्षेत्र का रहने वाला सैलाराम है, जो रिश्ते में दिनेश कुमार का जीजा लगता है। जब सैलाराम ने परीक्षा के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरा था, उसी दौरान इस फर्जीवाड़े की स्क्रिप्ट लिखी गई।

आवेदन करते समय दिनेश कुमार ने अपनी और अपने जीजा सैलाराम की तस्वीरों को मॉर्फ (एडिट) कर एक फर्जी फोटो तैयार की और उसे फॉर्म में लगा दिया। इसी मॉर्फ्ड फोटो के सहारे दिनेश परीक्षा केंद्र तक पहुंच गया। उसने बड़ी चालाकी से प्रवेश पत्र (Admit Card) और उपस्थिति पत्रक (Attendance Sheet) पर फर्जी हस्ताक्षर किए और जीजा की जगह डमी अभ्यर्थी बनकर परीक्षा दे दी।

डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन में खुली पोल

डमी कैंडिडेट के सहारे परीक्षा तो पास कर ली गई, लेकिन जब चयन के बाद दस्तावेज सत्यापन (Document Verification) की बारी आई, तो सारा खेल बिगड़ गया। फॉर्म में अपलोड की गई मॉर्फ्ड फोटो और वास्तविक अभ्यर्थी (सैलाराम) की शक्ल आपस में मैच नहीं हुई।

गड़बड़ी का संदेह होने पर RPSC ने मूल अभ्यर्थी सैलाराम को नोटिस जारी कर आयोग के सामने पेश होने का आदेश दिया, लेकिन वह डर के मारे उपस्थित नहीं हुआ।

जीजा पहले ही जा चुका है जेल, अब साले से पूछताछ

मूल अभ्यर्थी के पेश न होने पर मामला SOG के पास पहुंचा और मुकदमा दर्ज किया गया। जांच में डमी अभ्यर्थी द्वारा परीक्षा देने की पुष्टि हुई। इसके बाद SOG ने कार्रवाई करते हुए 23 अगस्त 2024 को ही मूल अभ्यर्थी (जीजा) सैलाराम को गिरफ्तार कर लिया था। उसके खिलाफ चार्जशीट भी कोर्ट में पेश की जा चुकी है।

तभी से उसका साला दिनेश कुमार (डमी कैंडिडेट) फरार चल रहा था। SOG अधिकारियों का कहना है कि अब दिनेश से पूछताछ की जा रही है। इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल हैं, इसे लेकर विस्तृत जांच की जा रही है।