कोटा के चर्चित चंद्रेसल मठ महंत देवानंद वन हत्याकांड में जांच के दौरान एक बड़ा खुलासा सामने आया है। हत्या के मुख्य आरोपी संतोष राय ने महंत की हत्या से कुछ महीने पहले ही मंदिर ट्रस्ट पर कब्जा करने की कोशिश शुरू कर दी थी। उसने देवस्थान विभाग में ट्रस्ट की नई कार्यकारिणी का प्रस्ताव पेश कर खुद को ट्रस्ट का अध्यक्ष और विधिक अधिकारी घोषित कर दिया था, जबकि कई ऐसे लोगों को सदस्य बनाया गया था जिनका मठ से कोई संबंध नहीं था।

जानकारी के अनुसार संतोष राय ने मार्च 2026 में देवस्थान विभाग में एक प्रस्ताव जमा कराया था, जिसमें पूर्व में मठ से जुड़े किशोरवन महाराज को संरक्षक और आजीवन सदस्य बताया गया। वहीं स्वयं को अध्यक्ष घोषित कर ट्रस्ट के संचालन का अधिकार लेने की कोशिश की गई। प्रस्ताव में 10 पदाधिकारियों और 11 सदस्यों के नाम शामिल थे, जिनमें अधिकांश नए चेहरे थे।

सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि प्रस्तावित कार्यकारिणी में एक ही परिवार के तीन सदस्यों को शामिल किया गया था। दस्तावेज में एक व्यक्ति को एक जगह मृत और दूसरी जगह जीवित दर्शाया गया, जिससे प्रस्ताव की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

हत्या से पहले रची गई थी साजिश

पुलिस जांच के अनुसार 5 जून की रात आरोपी दो मोटरसाइकिलों पर सवार होकर चंद्रेसल मठ पहुंचे थे। उन्होंने पहले नंदनवन महाराज के कमरे को बाहर से बंद किया और फिर सो रहे महंत देवानंद वन पर चाकुओं से हमला कर उनकी हत्या कर दी। मामले में संतोष राय सहित पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि एक नाबालिग को निरुद्ध किया गया है।

जांच में सामने आया है कि संतोष राय ने महंत देवानंद वन को रास्ते से हटाने के लिए आदित्य वर्मा को एक लाख रुपए की सुपारी दी थी। इसके बाद अन्य आरोपियों को भी साजिश में शामिल किया गया।

फर्जी ट्रस्ट गठन पर उठे सवाल

ट्रस्ट से लंबे समय से जुड़े लोगों का दावा है कि संतोष राय कभी भी ट्रस्ट का सदस्य नहीं रहा। इसके बावजूद उसने देवस्थान विभाग में ट्रस्ट की गोल सील लगाकर दस्तावेज जमा किए। महंत देवानंद वन ने भी इस पर सवाल उठाते हुए पूछा था कि संतोष राय के पास ट्रस्ट की सील कैसे पहुंची और उसने किस अधिकार से उसका इस्तेमाल किया।

महंत देवानंद वन खुद मंदिर ट्रस्ट के पुनर्गठन की प्रक्रिया चला रहे थे। उन्होंने जनवरी 2026 में नई कार्यकारिणी का प्रस्ताव तैयार कर देवस्थान विभाग में भेजा था, जिसमें पुराने और सक्रिय सदस्यों को शामिल किया गया था। माना जा रहा है कि ट्रस्ट और मठ की संपत्तियों पर नियंत्रण को लेकर विवाद ही हत्या की बड़ी वजह बना।

कई सवाल अब भी अनसुलझे

जांच एजेंसियां अब इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि संतोष राय ट्रस्ट से कैसे जुड़ा, उसे ट्रस्ट की सील किसने उपलब्ध कराई और पुराने सदस्यों ने उसके दावों का विरोध क्यों नहीं किया। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि फर्जी कार्यकारिणी बनाने के पीछे उसका अंतिम उद्देश्य क्या था।

महंत देवानंद वन हत्याकांड में सामने आए इन नए तथ्यों ने मामले को और गंभीर बना दिया है। पुलिस अब हत्या के साथ-साथ ट्रस्ट से जुड़े दस्तावेजों और संपत्ति विवाद की भी गहन जांच कर रही है।