बाड़मेर :ज़मीन का एक टुकड़ा और सालों पुरानी रंजिश... जब इन दोनों के बीच प्रशासन की अनदेखी आ मिलती है, तो उसका अंजाम कितना ख़ौफ़नाक हो सकता है, इसकी एक ताज़ा मिसाल देखने को मिली है। खेत में काम करने गए एक बुजुर्ग की बेरहमी से हत्या कर दी गई। हैरान करने वाली बात यह है कि यह कोई अचानक हुआ हादसा नहीं था। मृतक बुजुर्ग ने ठीक एक महीने पहले ही पुलिस के सामने अपनी जान का ख़तरा जताया था। उन्होंने साफ़ कहा था कि उनकी हत्या हो सकती है, लेकिन उनकी इस पुकार को अनसुना कर दिया गया।
खेत में पसरा सन्नाटा और बिखरा ख़ून
रोज़ की तरह बुजुर्ग सुबह अपने खेत के लिए निकले थे। जब काफी देर तक वे घर नहीं लौटे, तो घरवालों को अनहोनी की आशंका हुई। घबराए परिजन जब तलाशते हुए खेत पहुंचे, तो वहाँ का नज़ारा देखकर उनके पैरों तले ज़मीन खिसक गई। बुजुर्ग की लाश ज़मीन पर पड़ी थी और शरीर पर चोट के गंभीर निशान थे। साफ़ दिख रहा था कि हमलावरों ने बेहद दरिंदगी से इस वारदात को अंजाम दिया था। ख़बर फैलते ही पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया।
चेतावनी को किया गया नज़रअंदाज़
पीड़ित परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। उनका कहना है कि ज़मीन की सरहद को लेकर दूसरे पक्ष से काफी समय से विवाद चल रहा था। लगातार मिल रही धमकियों से तंग आकर बुजुर्ग ने महीने भर पहले पुलिस थाने के चक्कर काटे थे, लिखित शिकायत दी थी और सुरक्षा की गुहार लगाई थी। अब सवाल उठना लाज़मी है कि अगर वक्त रहते उस शिकायत पर कार्रवाई हो जाती, तो क्या आज एक बेगुनाह की जान बचाई नहीं जा सकती थी?
निष्कर्ष
सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुँचा, शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और मामले की तफ्तीश शुरू कर दी। आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है।लेकिन इस पूरी घटना ने कई ऐसे सवाल छोड़ दिए हैं जिनका जवाब मिलना बाकी है। क्या यह सिर्फ दो पक्षों के बीच ज़मीन की लड़ाई थी, या इसके पीछे गाँव की कोई और अंदरूनी रंजिश छिपी है? आखिर वो कौन लोग हैं जिन्होंने पुलिस की चेतावनी के बावजूद इतना बड़ा दुस्साहस कर डाला? और सबसे बड़ा सवाल— क्या पीड़ित परिवार को वक्त पर इंसाफ मिलेगा, या यह मामला भी कागज़ों में सिमट कर रह जाएगा? पुलिस की तफ़तीश जारी है, और आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े कई बड़े राज़ फाश हो सकते हैं।