गर्मी से राहत पाने के लिए शिमला घूमने निकले प्रयागराज के चार दोस्तों की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत हो गई। गंगा एक्सप्रेसवे पर उन्नाव के पास उनकी कार सड़क किनारे खड़े ट्रक से जा टकराई, जिससे यह भयावह हादसा हुआ। चारों की मौके पर ही मौत हो गई।
मृतकों की पहचान अनुपम गुप्ता, उदय सिंह, विजय और अमन कश्यप के रूप में हुई है। चारों दोस्त फाफामऊ इलाके के रहने वाले थे और अलग-अलग व्यवसाय से जुड़े हुए थे।
हंसी-खुशी निकले थे, लौटे एंबुलेंस में
जानकारी के अनुसार, चारों दोस्त शुक्रवार को शिमला यात्रा के लिए निकले थे। घर से निकलते समय परिवार में हंसी-खुशी का माहौल था, किसी ने जल्द लौटने की बात कही थी तो किसी ने रास्ते में संपर्क करने को कहा था। लेकिन कुछ घंटों बाद आए एक फोन कॉल ने पूरे परिवार को तोड़ दिया।
तेज रफ्तार कार जब गंगा एक्सप्रेसवे से गुजर रही थी, तभी उन्नाव के पास खड़े ट्रक से भीषण टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और चारों युवकों की मौके पर ही मौत हो गई।
शव पहुंचते ही गांवों में मातम
शनिवार को जैसे ही चारों के शव प्रयागराज पहुंचे, पूरे इलाके में मातम छा गया। जहां कुछ समय पहले तक खुशियों की आवाजें थीं, वहां अब चीख-पुकार और सिसकियां सुनाई दे रही थीं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
अनुपम के घर का दर्दनाक दृश्य
अनुपम गुप्ता के घर में अंतिम दर्शन के दौरान ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने सभी को भावुक कर दिया। उनकी पत्नी प्रिया पति के शव के पास बैठकर बार-बार रोती रहीं और उन्हें अंतिम बार निहारती रहीं।
परंपरागत रस्मों के दौरान जब उनकी चूड़ियां और सुहाग के प्रतीक हटाए जा रहे थे तो वे फूट-फूटकर रो पड़ीं। उन्होंने रोते हुए कहा कि ये चूड़ियां उनके पति ने ही दी थीं, इन्हें कैसे उतारूं।
इसके बाद अंतिम संस्कार के दौरान परिजनों ने भारी मन से विदाई दी।
तीन और परिवारों का दर्द
उदय सिंह अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। बेटे की मौत से मां बेसुध हो गई, जबकि पिता ने भारी मन से अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभाई।
विजय के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उनके बड़े भाई ने निभाई, जबकि अमन कश्यप का अंतिम संस्कार प्रतापगढ़ में किया गया। चारों दोस्तों की अचानक मौत से पूरे इलाके में शोक की लहर है।
दोस्ती का अधूरा सफर
चारों दोस्त अलग-अलग कारोबार से जुड़े थे—अनुपम मोबाइल की दुकान चलाते थे, विजय टेंट हाउस का काम करते थे, उदय की फुटवियर शॉप थी और अमन अपना व्यवसाय संभालते थे। दोस्ती धीरे-धीरे इतनी गहरी हो गई कि उन्होंने साथ यात्रा करने का फैसला लिया।
लेकिन यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित हुआ।
दर्दनाक अंत, जो छोड़ गया कई सवाल
छतनाग घाट पर जब अंतिम संस्कार की चिताएं जलीं तो हर आंख नम थी। किसी ने दोस्ती को याद किया, किसी ने सपनों को। यह हादसा सिर्फ चार जिंदगियों का अंत नहीं था, बल्कि चार परिवारों की खुशियों, उम्मीदों और भविष्य का भी अंत बन गया।