भारत सरकार ने बिजली क्षेत्र से जुड़े सरकारी टेंडरों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। सरकार ने कुछ कड़ी शर्तों के साथ चार चीनी बिजली उपकरण (Power Equipment) कंपनियों को चुनिंदा पावर प्रोजेक्ट्स की बोलियों (Bidding) में भाग लेने की अनुमति दे दी है। इस फैसले के बाद शेयर बाजार में पावर इंफ्रास्ट्रक्चर और घरेलू बिजली उपकरण बनाने वाली कुछ कंपनियों के शेयरों में मुनाफावसूली और गिरावट देखने को मिली।
जिन चीनी कंपनियों को राहत दी गई है, उन्हें केवल विशेष परियोजनाओं में भाग लेने की अनुमति मिलेगी। इन कंपनियों को भारत सरकार द्वारा तय किए गए सुरक्षा मानकों, गुणवत्ता संबंधी नियमों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करना होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह छूट सामान्य नहीं है, बल्कि परियोजना-आधारित और सशर्त है।
वर्ष 2020 में भारत-चीन सीमा तनाव के बाद केंद्र सरकार ने चीनी कंपनियों की सरकारी खरीद और संवेदनशील क्षेत्रों में भागीदारी पर कई प्रतिबंध लगाए थे। खासतौर पर बिजली, दूरसंचार और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में विदेशी कंपनियों के लिए सुरक्षा मंजूरी (Security Clearance) अनिवार्य कर दी गई थी।
इस फैसले का उद्देश्य कुछ बड़े बिजली परियोजनाओं में उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और परियोजनाओं में देरी को कम करना हो सकता है। हालांकि, इससे घरेलू बिजली उपकरण निर्माताओं के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है।
इसी आशंका के चलते शेयर बाजार में पावर इंफ्रास्ट्रक्चर और इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट सेक्टर के कुछ शेयरों में दबाव देखने को मिला। निवेशकों ने घरेलू कंपनियों के संभावित ऑर्डर पर असर की चिंता के कारण कुछ शेयरों में मुनाफावसूली की, जबकि व्यापक बाजार पर इसका असर सीमित रहा।
आने वाले समय में सरकार की विस्तृत गाइडलाइंस और संबंधित परियोजनाओं की शर्तें सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस फैसले का घरेलू उद्योग और पावर सेक्टर की कंपनियों पर कितना बड़ा प्रभाव पड़ेगा। फिलहाल निवेशकों की नजर सरकार की आगे की नीति और बिजली क्षेत्र में नए टेंडरों पर बनी हुई है।