मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन के नामांकन निरस्त किए जाने को लेकर सियासी घमासान लगातार तेज होता जा रहा है। इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व राजस्व मंत्री हरीश चौधरी को दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

कांग्रेस नेताओं और विधायकों ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन को लेकर राष्ट्रपति भवन तक मार्च निकालने का ऐलान किया था। पार्टी का आरोप है कि राज्यसभा चुनाव में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन करते हुए विपक्षी उम्मीदवार को चुनावी मैदान से बाहर करने की साजिश रची गई। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को रोक दिया, जिनमें हरीश चौधरी भी शामिल थे।

कांग्रेस का कहना है कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त करना पूरी तरह राजनीतिक प्रेरित कार्रवाई है। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा राज्यसभा चुनाव में संभावित हार को देखते हुए विपक्षी उम्मीदवार को चुनाव लड़ने से रोकने का प्रयास कर रही है।

वहीं, सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि मीनाक्षी नटराजन केवल चुनाव लड़ने का अधिकार मांग रही हैं। उन्होंने कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर ने कानून की गलत व्याख्या करते हुए नामांकन खारिज किया है, जबकि उम्मीदवार के खिलाफ न तो कोई आरोप तय हुए हैं और न ही किसी सक्षम अदालत ने संज्ञान लिया है।

दूसरी ओर, प्रतिवादी पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया कि चुनाव लड़ना कोई मौलिक अधिकार नहीं बल्कि वैधानिक अधिकार है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 329 का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद अदालतें हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं और ऐसे मामलों का समाधान चुनाव याचिका के माध्यम से होना चाहिए।

इधर, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी केंद्र सरकार और भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि यह भारतीय राजनीति में अभूतपूर्व घटना है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या देश लोकतंत्र से तानाशाही की ओर बढ़ रहा है।

हरीश चौधरी की गिरफ्तारी को लेकर कांग्रेस नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने वाले नेताओं को गिरफ्तार करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला है।

फिलहाल, राज्यसभा नामांकन विवाद पर देश की नजरें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई हैं, वहीं कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर संघर्ष जारी रखने की बात कह रही है।