नई दिल्ली: NEET-UG पेपर लीक विवाद के बीच मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। टेलीग्राम के संस्थापक और CEO Pavel Durov ने भारत में ऐप पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध की आलोचना करते हुए इसे आम यूजर्स के लिए अनुचित कदम बताया है।
मामला तब सामने आया जब NEET-UG परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक और आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए टेलीग्राम समेत कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई की गई। सरकार की ओर से चिंता जताई गई कि मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल लीक हुए प्रश्नपत्र और अन्य परीक्षा सामग्री फैलाने के लिए किया जा रहा है।
टेलीग्राम के CEO पावेल डुरोव ने कहा कि किसी प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलता। उनके अनुसार, ऐसे कदमों का असर उन करोड़ों लोगों पर पड़ता है जो ऐप का इस्तेमाल सामान्य बातचीत, पढ़ाई और कामकाज के लिए करते हैं। उन्होंने दावा किया कि भारत में टेलीग्राम के 15 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं और बैन से बड़ी संख्या में आम लोगों को परेशानी हुई।
डुरोव ने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति या समूह ने नियमों का उल्लंघन किया है तो कार्रवाई उन्हीं लोगों के खिलाफ होनी चाहिए, न कि पूरे प्लेटफॉर्म के उपयोगकर्ताओं पर। उन्होंने तर्क दिया कि लीक जैसी गतिविधियां किसी एक ऐप तक सीमित नहीं रहतीं और प्रतिबंध के बाद ऐसी सामग्री दूसरे प्लेटफॉर्म पर भी जा सकती है।
वहीं, डिजिटल अधिकारों से जुड़े कई संगठनों ने भी व्यापक स्तर पर ऐप बैन करने के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर गलत इस्तेमाल रोकना जरूरी है, लेकिन इसके लिए ज्यादा लक्षित कार्रवाई और मजबूत निगरानी व्यवस्था की जरूरत है।
NEET-UG पेपर लीक मामला पहले ही देशभर में बड़ा मुद्दा बन चुका है। छात्रों और अभिभावकों ने परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए हैं। सरकार और जांच एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही गई है।
टेलीग्राम विवाद ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपराध रोकने और करोड़ों यूजर्स के अधिकारों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।