उदयपुर में आषाढ़ी बीज (द्वितीया) के पावन अवसर पर भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा श्रद्धा और उत्साह के साथ निकाली गई। यह रथयात्रा देश की तीसरी सबसे बड़ी और राजस्थान की सबसे बड़ी जगन्नाथ रथयात्रा मानी जाती है। इस बार यात्रा का विशेष आकर्षण मंदिर स्थापना के इतिहास में पहली बार 375 वर्ष पुराने ऐतिहासिक लकड़ी के रथ का शामिल होना रहा, जिसने श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींचा।
सुबह से ही जगदीश चौक और आसपास के क्षेत्रों में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद रजत रथ और ऐतिहासिक लकड़ी के रथ पर विराजमान भगवान नगर भ्रमण के लिए रवाना हुए। जैसे ही रथयात्रा आगे बढ़ी, श्रद्धालुओं ने "जय जगन्नाथ" के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना दिया।
भगवान जगन्नाथ के स्वागत में पारंपरिक रूप से 21 बंदूकों की सलामी दी गई। रथयात्रा मार्ग पर जगह-जगह पुष्पवर्षा की गई और विभिन्न सामाजिक व धार्मिक संगठनों ने स्वागत द्वार बनाकर भगवान का अभिनंदन किया। बड़ी संख्या में लोग अपने घरों और दुकानों की छतों, बालकनियों तथा खिड़कियों से रथयात्रा का दर्शन करते नजर आए। पूरे मार्ग पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
रथयात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस और प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए थे। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और ड्रोन व सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से भी निगरानी रखी गई।
हालांकि, आस्था के इस महापर्व के बीच चेन स्नेचिंग की दो घटनाएं भी सामने आईं। भीड़ का फायदा उठाकर बदमाशों ने दो महिलाओं के गले से सोने की चेन झपट ली। दोनों पीड़ित महिलाओं ने पुलिस को शिकायत दी है, जिसके बाद पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और आरोपियों की तलाश में जुट गई है।
श्रद्धा, भक्ति और परंपरा से सराबोर इस ऐतिहासिक रथयात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। 375 साल पुराने लकड़ी के रथ की पहली ऐतिहासिक सहभागिता ने इस वर्ष की यात्रा को और भी विशेष और यादगार बना दिया।