जयपुर, 18 नवंबर 2025: गुलाबी नगरी जयपुर ने मंगलवार को अपने 298वें स्थापना दिवस के अवसर पर पर्यटकों का भव्य स्वागत किया। शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर रंग-बिरंगे आयोजनों, लोक धुनों की ध्वनियों और पारंपरिक सजावट ने माहौल को उत्सवमय बना दिया। जंतर-मंतर पर सबसे अधिक पर्यटकों का जमावड़ा देखने को मिला, जबकि हवा महल के प्रवेश द्वार पर बनी मनमोहक रंगोली ने देश-विदेश से आए मेहमानों के दिलों को छू लिया। आमेर महल, अल्बर्ट हॉल म्यूजियम सहित अन्य स्मारकों पर भी पर्यटकों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ, जो इस ऐतिहासिक शहर की सांस्कृतिक धरोहर को नजदीक से महसूस करने के लिए उत्सुक दिखे।

जंतर-मंतर: खगोलीय चमत्कारों का केंद्र बना आकर्षण का केंद्र जयपुर का विश्व प्रसिद्ध जंतर-मंतर, जो यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल के रूप में जाना जाता है, आज स्थापना दिवस के मौके पर पर्यटकों का सबसे बड़ा केंद्र बना। सुबह से ही यहां सैकड़ों की संख्या में पर्यटक पहुंचने लगे, जो महाराजा जय सिंह द्वितीय द्वारा निर्मित इन विशाल खगोलीय यंत्रों की रहस्यमयी दुनिया में खो गए। स्थानीय प्रशासन और पर्यटन विभाग की ओर से विशेष आयोजन किए गए, जिसमें पारंपरिक लोक नृत्यों और धुनों के माध्यम से पर्यटकों का स्वागत किया गया। एक पर्यटक, दिल्ली से आई नेहा शर्मा ने बताया, "जंतर-मंतर की भव्यता और वैज्ञानिक महत्व हमेशा आकर्षित करता है, लेकिन आज का उत्सव इसे और यादगार बना गया। लोक संगीत की धुनों पर नाचते-गाते लोग देखकर लग रहा था जैसे इतिहास जीवंत हो गया हो।" आंकड़ों के मुताबिक, आज यहां सामान्य दिनों से 40 प्रतिशत अधिक पर्यटक पहुंचे, जिनमें विदेशी सैलानियों की संख्या भी उल्लेखनीय रही। पर्यटन गाइडों ने विशेष रूप से खगोलीय यंत्रों के इतिहास और उपयोग पर व्याख्यान दिए, जिससे पर्यटक ज्ञान और मनोरंजन दोनों का लाभ उठा सके।

हवा महल: रंगोली की कला ने बांधे पर्यटकों के कदम हवा महल, जिसे 'pale of winds' के नाम से भी जाना जाता है, आज अपनी राजसी शोभा के साथ चमका। महल के भव्य प्रवेश द्वार पर कलाकारों द्वारा बनाई गई विशाल रंगोली ने सभी का दिल जीत लिया। फूलों, रंगों और पारंपरिक राजस्थानी मोटिफ्स से सजी यह रंगोली न केवल दृश्यमान सौंदर्य का प्रतीक थी, बल्कि जयपुर की सांस्कृतिक समृद्धि को भी उजागर कर रही थी। पर्यटक फोटो खिंचवाने और सेल्फी लेने के लिए लंबी कतारें लगाए नजर आए।मुंबई से आए परिवार के साथ यात्रा कर रही रिया मेहता ने कहा, "हवा महल की नाजुक नक्काशी तो हमेशा लुभाती है, लेकिन आज की रंगोली ने इसे जादुई बना दिया। बच्चे तो इसे देखकर इतने उत्साहित हो गए कि घंटों यहीं रुकना पड़ा।" पर्यटन विभाग ने यहां भी लोक धुनों और राजस्थानी लोककथाओं के माध्यम से स्वागत की व्यवस्था की। महल के अंदर विशेष प्रदर्शनी लगाई गई, जिसमें राजपूतकालीन वेशभूषा और आभूषणों की झलक दिखाई गई। इस स्थल पर भी पर्यटकों की संख्या में 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

 जयपुर के स्थापना दिवस पर आमेर महल, जो अपनी भव्य किलेबंदी और शीश महल के लिए प्रसिद्ध है, पर्यटकों से गुलजार रहा। हाथी सफारी और पारंपरिक संगीत कार्यक्रमों ने यहां के माहौल को राजसी रंग दे दिया। पर्यटकों को विशेष छूट और गाइडेड टूर की सुविधा प्रदान की गई, जिससे परिवारों और जोड़ों के बीच खासा उत्साह दिखा। एक विदेशी पर्यटक, ब्रिटेन से आए जॉन स्मिथ ने अपनी अनुभूति साझा करते हुए कहा, "आमेर महल की ऊंचाइयों से जयपुर का नजारा लुभावना है, और आज का स्वागत इसे अविस्मरणीय बना गया।"इसी क्रम में अल्बर्ट हॉल म्यूजियम, जो अपनी इंडो-सरासेनिक वास्तुकला के लिए जाना जाता है, पर भी पर्यटकों का तांता लगा रहा। म्यूजियम में विशेष प्रदर्शनी आयोजित की गई, जिसमें राजस्थान की प्राचीन कलाकृतियां, मूर्तियां और ऐतिहासिक दस्तावेज प्रदर्शित किए गए। लोक धुनों के साथ पर्यटकों का स्वागत करने वाले कलाकारों ने माहौल को जीवंत कर दिया। म्यूजियम अधिकारियों के अनुसार, आज यहां 25 प्रतिशत अधिक विजिटर आए, जिनमें स्कूल-कॉलेज के छात्र भी शामिल थे।

अन्य स्मारकों पर भी उत्साह, पर्यटन को मिला बढ़ावा जयपुर के अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे सिटी पैलेस, नाहरगढ़ किला और जल महल पर भी स्थापना दिवस की खुशी में विशेष सजावट और कार्यक्रम आयोजित किए गए। सभी स्थलों पर पर्यटन विभाग की टीम ने पर्यटकों को राजस्थानी थाली का स्वाद चखाने के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। महापौर डॉ. मुंशी राम ने एक बयान में कहा, "जयपुर का स्थापना दिवस न केवल हमारी विरासत का जश्न है, बल्कि पर्यटन को बढ़ावा देने का अवसर भी। आज के आयोजनों से शहर की सॉफ्ट पावर मजबूत हुई है।"