जोधपुर। शहर में कानून व्यवस्था और आमजन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस आयुक्तालय की ओर से बिना अनुमति रैली, जुलूस, धरना-प्रदर्शन और सार्वजनिक सभाओं पर रोक लगाने के आदेश जारी किए गए हैं। इस फैसले के बाद राजस्थान की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने इस आदेश को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि जोधपुर में केंद्र और राज्य सरकार के महत्वपूर्ण पदों पर नेताओं के होने के बावजूद जनता की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

गहलोत ने आरोप लगाया कि शहर में बिजली और पानी की समस्याओं को लेकर लोगों में नाराजगी है, लेकिन उनकी आवाज सुनने की बजाय प्रदर्शन रोकने के लिए प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता को अपनी समस्याएं रखने का अधिकार मिलना चाहिए।

उन्होंने पेयजल व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। गहलोत ने दावा किया कि जोधपुर में जल संकट से लोग परेशान हैं और सरकारी दावों तथा जमीनी हालात में अंतर दिखाई दे रहा है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने राजीव गांधी लिफ्ट परियोजना फेज-3 का मुद्दा उठाते हुए कहा कि हजारों करोड़ रुपये की योजना के बावजूद काम में देरी हो रही है। उन्होंने परियोजना की गति और समय सीमा को लेकर सरकार से जवाब मांगा।

गहलोत ने राज्य सरकार के कानून एवं विधिक कार्य मंत्री जोगाराम पटेल पर भी राजनीतिक हमला करते हुए कहा कि सरकार को जनता की समस्याओं का समाधान करना चाहिए, न कि उनकी आवाज को रोकना चाहिए।

वहीं प्रशासन की ओर से यह कदम सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए बताया गया है। पुलिस का कहना है कि सार्वजनिक आयोजनों के लिए पहले अनुमति लेना जरूरी होगा।

इस पूरे मामले ने जोधपुर में एक बार फिर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। एक तरफ प्रशासन इसे कानून व्यवस्था से जोड़कर देख रहा है, वहीं विपक्ष इसे जनता की आवाज दबाने का प्रयास बता रहा है।