अजमेर शरीफ। विश्व प्रसिद्ध सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती (रहमतुल्लाह अलैह) उर्फ गरीब नवाज के 814वें सालाना उर्स के दौरान रविवार (21 दिसंबर 2025) को कलंदर और मलंगों का पारंपरिक जुलूस निकाला गया। इस जुलूस में देशभर से आए करीब 2 हजार कलंदर-मलंगों ने हैरतअंगेज करतब दिखाकर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। किसी ने आंखों में लोहे का सरिया डाल लिया, तो किसी ने चाकू से पुतलियां बाहर निकाल दीं। कुछ ने जीभ और गर्दन के आर-पार नुकीली छड़ें घुसा लीं, जबकि कई ने शरीर को धारदार हथियारों से भेदा। ये करतब उनकी आस्था और तपस्या का प्रतीक माने जाते हैं।
दिल्ली से 450 किमी पैदल सफर, 18 दिन में अजमेर पहुंचे यह परंपरा सदियों पुरानी है। उर्स से पहले दिल्ली के महरौली स्थित हजरत कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की दरगाह से कलंदर-मलंग छड़ियां (पवित्र डंडे) लेकर पैदल चलते हैं। इस बार भी लगभग 2 हजार कलंदर-मलंग महरौली से रवाना हुए और 450 किलोमीटर का कठिन सफर 18 दिनों में पूरा करके अजमेर पहुंचे। रास्ते में वे ख्वाजा गरीब नवाज का संदेश फैलाते हुए आए। अजमेर पहुंचने पर उनका भव्य स्वागत किया गया।
जुलूस का नजारा: गंज चिल्ले से दरगाह तक जुलूस की शुरुआत गंज स्थित गरीब नवाज के चिल्ले से हुई। सबसे आगे कलंदर और मलंगों की टोली चल रही थी, जो धारदार हथियारों और नुकीली वस्तुओं से करतब दिखाते हुए आगे बढ़ रही थी। सड़कों के दोनों ओर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा था। बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी मौजूद थे, जो इन करतबों को देखकर स्तब्ध रह गए। जुलूस में बैंड वादकों ने ख्वाजा गरीब नवाज की शान में धुनें बजाईं। ढोल-नगाड़ों की थाप और सूफियाना कलाम से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। कई कलंदर राष्ट्रीय ध्वज और विभिन्न रंगों के झंडे लहराते हुए चल रहे थे, जो अनेकता में एकता का संदेश दे रहे थे। जुलूस दिल्ली गेट पहुंचा, जहां इसका औपचारिक स्वागत हुआ। गंज, दिल्ली गेट और दरगाह बाजार में लोगों ने पुष्प वर्षा करके कलंदर-मलंगों का अभिनंदन किया। इसके बाद जुलूस धान मंडी और दरगाह बाजार होते हुए रोशनी की नमाज से पहले दरगाह पहुंचा। निजाम गेट पर छड़ियां लगाई गईं और जुलूस का समापन हुआ। ये करतब देखकर मौजूद श्रद्धालु आश्चर्य और श्रद्धा से भर गए। कई लोगों ने इसे ख्वाजा साहब की कृपा और कलंदरों की गहन तपस्या का चमत्कार बताया। उर्स के दौरान ऐसे जुलूस दरगाह की रौनक बढ़ाते हैं और लाखों जायरीनों को आकर्षित करते हैं।