जोधपुर। बाड़मेर के सबसे चर्चित और विवादित कमलेश प्रजापत एनकाउंटर मामले में जोधपुर महानगर सेशन कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने आईपीएस (IPS) आनंद शर्मा और कालूराम रावत समेत सभी 24 पुलिस अधिकारियों और जवानों को बड़ी राहत देते हुए ट्रायल कोर्ट (एसीजेएम सीबीआई कोर्ट) के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का संज्ञान लिया गया था।

सेशन न्यायाधीश दिनेश त्यागी की अदालत ने स्पष्ट किया कि ट्रायल कोर्ट ने मामले से जुड़े सीसीटीवी (CCTV) फुटेज, एफएसएल (FSL) रिपोर्ट और वैज्ञानिक साक्ष्यों को नजरअंदाज कर संज्ञान लिया था। कोर्ट ने माना कि यह एनकाउंटर फर्जी नहीं था, बल्कि पुलिस ने आत्मरक्षा और अपने साथी की जान बचाने के लिए जवाबी कार्रवाई की थी।

सेशन कोर्ट का बड़ा ऑब्जर्वेशन: 'कमलेश ने पुलिस पर चढ़ाई थी गाड़ी'

अदालत ने निगरानी याचिका पर सुनवाई के दौरान सभी दस्तावेजों और सबूतों का गहराई से परीक्षण किया। सेशन कोर्ट ने अपने आदेश में प्रमुख रूप से इन बातों को रेखांकित किया:

  • लोहे का गेट तोड़कर भागने की कोशिश: घटना के समय कमलेश प्रजापत ने भागने के प्रयास में अपने भारी वाहन (इसुजु एसयूवी) से लोहे का मजबूत गेट तोड़ दिया था और सीधे सामने खड़ी पुलिस टीम की तरफ गाड़ी बढ़ा दी थी।

  • टायर के नीचे दबे थे हेड कांस्टेबल: इस दौरान मौके पर मौजूद हेड कांस्टेबल मेहाराम वाहन के टायर के नीचे दब गए थे। ऐसी गंभीर स्थिति में पुलिस टीम के पास तत्काल एक्शन लेने के अलावा और कोई रास्ता नहीं था।

  • आत्मरक्षा में चली गोली: अदालत ने माना कि हेड कांस्टेबल की जान बचाने और गाड़ी को रोकने के लिए ही कमांडो दिनेश ने वाहन के टायर और कमलेश के पैरों की तरफ गोलियां चलाई थीं। इसलिए, यह पूरी कार्रवाई 'राइट ऑफ प्राइवेट डिफेंस' (आत्मरक्षा के अधिकार) के तहत आती है।

2021 से अब तक: सिलसिलेवार समझें पूरा घटनाक्रम

1. 22 अप्रैल 2021 को हुआ था एनकाउंटर

बाड़मेर के सदर थाना क्षेत्र में सेंट पॉल स्कूल के पीछे स्थित एक मकान पर पुलिस टीम कमलेश प्रजापत को पकड़ने पहुंची थी। पुलिस के मुताबिक, कमलेश ने पुलिस पर गाड़ी चढ़ाने का प्रयास किया, जिसके जवाब में पुलिस कमांडो ने फायरिंग की और कमलेश की मौत हो गई। घटना के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में भारी आक्रोश देखा गया।

2. सर्च ऑपरेशन में मिला था कुबेर का खजाना

एनकाउंटर के बाद जब कार्यपालक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में कमलेश के ठिकाने पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया, तो वहां से भारी मात्रा में अवैध सामान और नकदी बरामद हुई:

  • नकदी: ₹59.69 लाख कैश

  • लग्जरी गाड़ियां: 11 कीमती वाहन

  • हथियार: 5 अवैध पिस्टल, 9 मैगजीन, 121 कारतूस

  • मादक पदार्थ: 2 किलो 360 ग्राम अफीम का दूध और 1.715 किलो डोडा-पोस्त

  • अन्य: 13 मोबाइल, 4 डोंगल और एटीएम कार्ड

3. सीबीआई (CBI) ने दी थी क्लीन चिट

भारी विरोध प्रदर्शनों के बाद 31 मई 2021 को राज्य सरकार ने जांच सीबीआई को सौंप दी थी। सीबीआई के तत्कालीन एसपी एमएस खान ने मामले की गहन जांच की, सीन रीक्रिएट किया और अंत में कोर्ट में नेगेटिव क्लोजर रिपोर्ट पेश की। सीबीआई ने साफ कहा कि साक्ष्यों के आधार पर इसे फर्जी मुठभेड़ साबित नहीं किया जा सकता और पुलिस की कार्रवाई हालात के मुताबिक सही थी।

4. पत्नी की चुनौती और ट्रायल कोर्ट का झटका

सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को मृतक कमलेश की पत्नी जसोदा ने 28 मार्च 2023 को अदालत में चुनौती दी। जसोदा के वकीलों ने आरोप लगाया कि घर के सीसीटीवी की डीवीआर के फुटेज डिलीट किए गए और जांच निष्पक्ष नहीं हुई। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए एसीजेएम (सीबीआई) कोर्ट ने 16 अप्रैल 2025 को सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया और आईपीएस आनंद शर्मा समेत 24 पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या और साजिश का मामला चलाने का आदेश दे दिया था।

ट्रायल कोर्ट का आदेश क्यों हुआ रद्द?

ट्रायल कोर्ट के इसी फैसले को पुलिस अधिकारियों ने सेशन कोर्ट में चुनौती दी थी। अब सेशन कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि जब वैज्ञानिक साक्ष्य, एफएसएल और सीसीटीवी फुटेज यह साबित कर रहे हैं कि पुलिस ने अपनी जान बचाने के लिए गोली चलाई, तो इसे हत्या का मामला नहीं माना जा सकता। कोर्ट के इस फैसले से पिछले 5 साल से कानूनी लड़ाई लड़ रहे 24 पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों ने बड़ी राहत की सांस ली है।