मणिपुर में पिछले तीन वर्षों से जारी जातीय तनाव के बीच अब एक नया संघर्ष उभरकर सामने आया है। मैतेई और कुकी समुदायों के बीच हिंसा के बाद अब नगा और कुकी समुदाय आमने-सामने आ गए हैं। फरवरी 2026 से शुरू हुए इस नए संघर्ष ने राज्य में सुरक्षा और शांति व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।
शिक्षक की पिटाई से शुरू हुआ विवाद
7 फरवरी 2026 को उखरुल जिले के लिटान सरईखोंग गांव में एक नगा शिक्षक ने कुछ युवकों को स्कूल के पास शराब पीने से रोका। आरोप है कि युवकों ने शिक्षक के साथ मारपीट की और उन्हें इलाके से चले जाने की धमकी दी। इसके बाद विवाद ने जातीय रूप ले लिया।
8 और 9 फरवरी की रात आसपास के नगा गांवों में कई घरों को आग के हवाले कर दिया गया। हालात बिगड़ने पर प्रशासन ने उखरुल और कांगपोकपी जिलों में इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दीं और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी।
चार महीने में कई हिंसक घटनाएं
रिपोर्टों के अनुसार फरवरी से जून 2026 के बीच 48 लोगों के अपहरण, 20 हत्याओं और 50 से अधिक घरों को जलाने की घटनाएं सामने आई हैं। इन घटनाओं ने 1992 के नगा-कुकी संघर्ष की यादें ताजा कर दी हैं, जिसमें वर्षों तक हिंसा चली थी और बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी।
छह लोगों के शव मिलने से बढ़ा तनाव
10 जून को तनाव और बढ़ गया जब कांगपोकपी क्षेत्र से लापता छह नगा लोगों के शव बरामद किए गए। मृतकों के परिजनों का आरोप है कि उन्हें अगवा कर प्रताड़ित किया गया था। इस घटना के बाद नगा संगठनों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
दोनों समुदायों के आरोप-प्रत्यारोप
नगा संगठनों का आरोप है कि उनके लोगों को निशाना बनाया जा रहा है और दोषियों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं हो रही। वहीं कुकी समुदाय के नेताओं का कहना है कि उनके क्षेत्रों में जरूरी सामानों की आपूर्ति प्रभावित हुई है और हालात लगातार खराब हो रहे हैं।
दोनों पक्षों के बीच अविश्वास बढ़ने से स्थिति और जटिल होती जा रही है। विभिन्न संगठनों द्वारा विरोध प्रदर्शन और रैलियां भी आयोजित की जा रही हैं।
सरकार और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने दोनों समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर शांति बनाए रखने की अपील की है। कई गंभीर मामलों की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी गई है।
सुरक्षा बलों ने कांगपोकपी, इंफाल और चुराचांदपुर सहित कई इलाकों में संयुक्त अभियान चलाया है। पुलिस और केंद्रीय बल लगातार संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त कर रहे हैं।
1992 जैसी स्थिति का डर
विशेषज्ञों का मानना है कि नगा और कुकी समुदायों के बीच ऐतिहासिक तनाव और क्षेत्रीय विवाद वर्तमान संघर्ष को और जटिल बना रहे हैं। यदि समय रहते हालात पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो राज्य एक बार फिर लंबे समय तक जातीय हिंसा की चपेट में आ सकता है।
फिलहाल मणिपुर में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। प्रशासन शांति बहाली और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है, जबकि विभिन्न जांच एजेंसियां हिंसा से जुड़े मामलों की जांच में जुटी हुई हैं।