राजस्थान के बीकानेर स्थित सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज से संबद्ध पीबीएम हॉस्पिटल में शनिवार को उस समय तनावपूर्ण माहौल बन गया, जब प्रसूताओं की मौत और अस्पताल की कथित अव्यवस्थाओं के विरोध में एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की हुई, जिसके बाद पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर स्थिति को नियंत्रित किया।

एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष श्रीकृष्ण गोदारा के नेतृत्व में दोपहर करीब 12 बजे शहर में विरोध रैली निकाली गई। रैली अस्पताल पहुंची, जहां कार्यकर्ता जूतों की माला लेकर अस्पताल अधीक्षक डॉ. बीसी घीया के कार्यालय की ओर बढ़े। पहले से तैनात पुलिस बल ने मुख्य प्रवेश द्वार पर उन्हें रोक दिया।

प्रदर्शनकारी अधीक्षक कार्यालय के भीतर जाने की जिद पर अड़ गए। पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया और प्रदर्शनकारियों को कार्यालय परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया। घटना के दौरान अस्पताल परिसर में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

प्रदर्शनकारियों ने चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने पीबीएम हॉस्पिटल में व्याप्त अव्यवस्थाओं को तत्काल दूर करने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

क्या है पूरा मामला?

पीबीएम हॉस्पिटल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं की तबीयत बिगड़ने का मामला मई में सामने आया था। अस्पताल के अनुसार, अब तक छह महिलाओं की किडनी फेल होने की पुष्टि हुई, जिनमें दो प्रसूताओं—प्रीति और शारदा—की मौत हो चुकी है। अन्य महिलाओं का इलाज अभी भी जारी है, जबकि कुछ को अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है।

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि सिजेरियन डिलीवरी के बाद मरीजों को बाजार से खरीदे गए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन लगाए गए थे, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ी। पूरे मामले की जांच के लिए राज्य सरकार ने दो अलग-अलग जांच समितियों का गठन किया है। एक टीम ने प्रारंभिक जांच पूरी कर ली है, जबकि ड्रग कंट्रोलर की टीम अभी विस्तृत जांच कर रही है।

पीबीएम हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ. बीसी घीया ने कहा कि जांच प्रक्रिया जारी है और रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल की ओर से मरीजों के उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई।