संसद के मानसून सत्र से पहले प्रस्तावित परिसीमन (Delimitation) विधेयक को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी बीच कांग्रेस ने इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि पार्टी इस विधेयक का समर्थन नहीं कर रही है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मीडिया में चल रही उन खबरों का खंडन किया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस ने परिसीमन बिल का समर्थन किया है।
जयराम रमेश ने मीडिया रिपोर्ट्स को बताया झूठा
सर्वदलीय बैठक के बाद जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि कुछ टीवी चैनल जानबूझकर यह गलत खबर चला रहे हैं कि कांग्रेस ने परिसीमन विधेयक का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि यह दावा पूरी तरह झूठा और मनगढ़ंत है तथा कांग्रेस का ऐसा कोई रुख नहीं है।
मानसून सत्र में बिल आने की अटकलें
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में केंद्र सरकार एक बार फिर परिसीमन विधेयक पेश कर सकती है। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित विधेयक में लोकसभा और विधानसभा की सीटों में बढ़ोतरी का प्रावधान हो सकता है। यह भी चर्चा है कि सभी राज्यों में सीटों की संख्या लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रस्ताव शामिल किया जा सकता है।
संविधान संशोधन के लिए चाहिए दो-तिहाई बहुमत
यदि परिसीमन विधेयक संविधान संशोधन के दायरे में आता है, तो इसे पारित कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी।
लोकसभा की कुल 543 सीटों में फिलहाल तीन सीटें रिक्त हैं। ऐसे में प्रभावी संख्या के आधार पर लगभग 360 सांसदों का समर्थन आवश्यक माना जा रहा है।
क्या है सियासी गणित?
मौजूदा समय में एनडीए के पास करीब 293 सांसदों का समर्थन बताया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषणों में यह भी चर्चा है कि यदि कुछ अन्य दलों और सहयोगी सांसदों का समर्थन मिलता है तो सरकार का आंकड़ा काफी बढ़ सकता है।
हालांकि यह पूरा गणित राजनीतिक संभावनाओं और चर्चाओं पर आधारित है। फिलहाल सरकार ने न तो विधेयक पेश करने की पुष्टि की है और न ही इसके अंतिम स्वरूप को सार्वजनिक किया है।
सरकार की आधिकारिक घोषणा का इंतजार
परिसीमन विधेयक को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो चुकी है, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में मानसून सत्र के दौरान इस मुद्दे पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।