जयपुर। राजस्थान में निकाय और पंचायत चुनाव की घोषणा के साथ ही प्रदेश की राजनीति पूरी तरह चुनावी मोड में आ गई है। एक ओर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने चुनाव टालने को लेकर भजनलाल सरकार पर तीखा हमला बोला है, वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने अपने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने के लिए 'मिशन 113' की शुरुआत कर दी है। दोनों प्रमुख दल अब स्थानीय निकाय चुनाव को आगामी विधानसभा चुनाव की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण राजनीतिक मुकाबला मान रहे हैं।

डोटासरा बोले- चुनाव टालना सरकार की नैतिक हार

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सोमवार को जयपुर स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ही राज्य सरकार निकाय और पंचायत चुनाव कराने को मजबूर हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लंबे समय से अपने संवैधानिक दायित्व से बचती रही और यदि कांग्रेस अदालत का दरवाजा नहीं खटखटाती तो चुनाव लगातार टाले जाते।

डोटासरा ने इसे भजनलाल सरकार की "नैतिक हार" बताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास किया गया है।

कांग्रेस का बड़ा ऐलान, 50% टिकट युवाओं को

निकाय और पंचायत चुनाव को लेकर कांग्रेस ने बड़ा दांव खेलते हुए 50 प्रतिशत टिकट युवाओं को देने का फैसला किया है। डोटासरा ने कहा कि पार्टी बूथ स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक पूरी तरह चुनाव के लिए तैयार है और कार्यकर्ताओं को मैदान में उतरने के निर्देश दिए जा चुके हैं।

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि युवा "भाड़े के टट्टू" नहीं बल्कि देश का भविष्य हैं और जहां युवाओं की ऊर्जा होती है, वहीं देश आगे बढ़ता है।

1900 करोड़ के अनुदान का नुकसान होने का आरोप

डोटासरा ने आरोप लगाया कि समय पर निकाय और पंचायत चुनाव नहीं कराने के कारण राजस्थान को पंचायती राज संस्थाओं के लिए मिलने वाले लगभग 1900 करोड़ रुपये के केंद्रीय अनुदान से वंचित होना पड़ा। इससे गांवों और शहरों के विकास कार्य प्रभावित हुए।

उन्होंने यह भी कहा कि जनप्रतिनिधियों के अधिकार छीनकर उनकी जगह प्रशासक नियुक्त किए गए, जिससे भ्रष्टाचार बढ़ा और लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हुई। उन्होंने मुख्यमंत्री के गृह जिले भरतपुर में जिला प्रमुख का पद दो वर्षों से रिक्त होने का भी मुद्दा उठाया।

भ्रष्टाचार, तबादले और पेपर लीक पर सरकार को घेरा

डोटासरा ने आरोप लगाया कि भजनलाल सरकार के ढाई साल के कार्यकाल में विकास की बजाय भ्रष्टाचार और राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पैसे के दम पर तबादले किए जा रहे हैं और कई मामलों में बैकडेट में भी तबादले हो रहे हैं।

पेपर लीक के मुद्दे पर उन्होंने केंद्र सरकार को भी घेरते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में देशभर में 152 पेपर लीक हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल में पेपर लीक के आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए कठोर कानून बनाया था, लेकिन केंद्र सरकार ने इस दिशा में गंभीर पहल नहीं की।

शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के इस्तीफे की मांग

डोटासरा ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ-साथ राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में हजारों स्कूल बंद किए जा रहे हैं और महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के कारण अब मदन दिलावर के इस्तीफे की भी मांग उठ रही है।

भाजपा का 'मिशन 113', कमजोर सीटों पर रहेगा फोकस

निकाय और पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी ने भी संगठन को मजबूत करने की रणनीति तेज कर दी है। पार्टी के आंतरिक सर्वे के अनुसार प्रदेश की 200 विधानसभा सीटों में से 113 सीटों को संगठनात्मक रूप से कमजोर माना गया है। इन्हीं सीटों पर विशेष ध्यान देने के लिए विधानसभा प्रवासी कार्यकर्ताओं की नियुक्ति की जा रही है।

हाल ही में भाजपा प्रदेश मुख्यालय में हुई बैठक में बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने, जनसंपर्क अभियान चलाने और चुनावी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रशिक्षण के बाद प्रवासी कार्यकर्ताओं को संबंधित विधानसभा क्षेत्रों में भेज दिया गया है।

प्रदेश मुख्यालय करेगा सीधी निगरानी

भाजपा नेतृत्व इन प्रवासी कार्यकर्ताओं से सीधे फीडबैक लेगा। उनकी जिम्मेदारी बूथों की सक्रियता, कार्यकर्ताओं की भागीदारी, स्थानीय राजनीतिक माहौल और संगठन की स्थिति का लगातार मूल्यांकन करना होगा। इन्हीं रिपोर्टों के आधार पर पार्टी आगे की चुनावी रणनीति तैयार करेगी।

सीएम का गृह जिला भरतपुर भी 'डार्क जोन'

भाजपा के आंतरिक आकलन में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का गृह जिला भरतपुर पूरी तरह "डार्क जोन" की श्रेणी में शामिल बताया गया है। इसके अलावा सीकर, झुंझुनू, दौसा और टोंक जैसे जिले भी पूरी तरह कमजोर क्षेत्रों में चिन्हित किए गए हैं।

वहीं बीकानेर, उदयपुर, अलवर, नागौर और भीलवाड़ा जैसे जिलों में कुछ शहरी विधानसभा क्षेत्रों को छोड़कर अधिकांश सीटों को संगठनात्मक रूप से कमजोर माना गया है। ऐसे क्षेत्रों में पार्टी ने अभी से सक्रियता बढ़ा दी है ताकि पंचायत और निकाय चुनाव में बेहतर प्रदर्शन कर आगामी विधानसभा चुनाव की मजबूत नींव रखी जा सके।

राजस्थान में निकाय और पंचायत चुनाव को लेकर अब दोनों प्रमुख राजनीतिक दल पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर चुके हैं। कांग्रेस युवाओं और सरकार विरोधी मुद्दों को केंद्र में रखकर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है, जबकि भाजपा संगठनात्मक मजबूती और बूथ प्रबंधन के जरिए चुनावी बढ़त हासिल करने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति और अधिक गर्माने की संभावना है।